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कश्मीर में शिया सुन्नी एकता: मुहर्रम से पहले साजिशें नाकाम करने का संकल्प

मुस्लिम समुदाय के भीतर शिया और सुन्नी के नाम पर राजनीति करने वालों के लिए कश्मीर से एक बड़ी खबर आई है। कुछ वैचारिक मतभेदों के बावजूद दोनों ही समुदाय अब करीब आ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों ने इस एकता को और मजबूत किया है। हाल ही में ईरान पर हुए विदेशी हमलों के बाद दोनों समुदायों के बीच एकजुटता की भावना और गहरी हुई है।

इसका सीधा असर जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में देखने को मिला। यहाँ शिया और सुन्नी समुदाय के प्रमुख नेता एक मेज पर साथ बैठे। उन्होंने न सिर्फ आपसी भाईचारे पर बात की बल्कि मुहर्रम के दौरान माहौल बिगाड़ने वाली ताकतों को भी कड़ा संदेश दिया।

मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा की अहम बैठक

श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के मुख्यालय में एक विशेष बैठक का आयोजन हुआ। यह बैठक मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा यानी MMU की शिया सुन्नी समन्वय समिति की थी। इस बैठक का निर्देश MMU के संरक्षक मीरवाइज़ डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने दिया था। बैठक का मुख्य उद्देश्य मुहर्रम से पहले मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करना था।

बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ धार्मिक नेता आगा सैयद मुजतबा ने की। इसमें कश्मीर के प्रमुख विद्वान, उलेमा और अलग-अलग धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि मौजूदा समय में समाज को बांटने वाले तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है।

बैठक के मुख्य बिंदु

  • मुहर्रम की पवित्रता: सभी संप्रदायों के नेताओं ने मुहर्रम महीने के सम्मान और पवित्रता को बनाए रखने का संकल्प लिया।
  • सोशल मीडिया पर नजर: पिछले साल मुहर्रम के दौरान इंटरनेट पर फैलाई गई भ्रामक जानकारियों पर चिंता जताई गई।
  • विशेष समिति का गठन: MMU के तहत एक नई समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया जो मुहर्रम के दौरान असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखेगी।
  • धार्मिक गरिमा का सम्मान: पैगंबर मुहम्मद के साथियों और उनके पवित्र परिवार यानी अहले-बैत के प्रति सर्वोच्च सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया गया।

वैश्विक और स्थानीय चुनौतियों पर मंथन

बैठक में शामिल उलेमाओं ने माना कि आज स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम समुदाय के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों का सामना केवल एकजुट होकर ही किया जा सकता है। धार्मिक नेताओं ने साफ कहा कि भड़काऊ भाषण या नफरत फैलाने वाली बातें इस्लामी मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ हैं।

नेताओं ने आम जनता और विशेषकर युवाओं से अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग सार्वजनिक बातचीत और सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियों में संयम बरतें। किसी भी ऐसी सामग्री को शेयर न करें जिससे समाज में गलतफहमी या तनाव पैदा हो।

असामाजिक तत्वों से निपटने की तैयारी

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला एक नई निगरानी समिति का गठन करना था। यह समिति मुहर्रम के दौरान सक्रिय रहेगी। इसका काम जमीन पर और सोशल मीडिया दोनों जगह भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली हर कोशिश को नाकाम करना होगा। अगर कोई भी व्यक्ति या समूह नफरत फैलाने की कोशिश करेगा तो यह समिति तुरंत सक्रिय होकर उसका मुकाबला करेगी।

अध्यक्षता कर रहे आगा सैयद मुजतबा ने मीरवाइज़-ए-कश्मीर और उलेमाओं के प्रयासों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर में विभिन्न संप्रदायों के बीच समझ और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाना समय की सबसे बड़ी मांग है।

बैठक में शामिल प्रमुख हस्तियाँ

इस ऐतिहासिक समन्वय बैठक में कश्मीर के कई बड़े और सम्मानित चेहरे शामिल हुए। इनमें मौलाना शौकत हुसैन केंग, आगा सैयद मोहम्मद यूसुफ और सैयद आदिल मुर्तज़ा प्रमुख थे। उनके साथ ही सैयद मोहसिन रिज़वी, मौलाना बिलाल अहमद हाजी, मुफ़्ती ग़ुलाम रसूल समून और सिब्त मोहम्मद शब्बीर कुम्मी ने भी अपने विचार रखे।

बैठक में सैयद परवेज़ सफ़वी, मोहम्मद अल्ताफ़ मुंतज़िर, गुलाम मोहम्मद नागो, मोहम्मद जमाल बच्चू, इमदाद साक़ी और कारी मोहम्मद असलम रहीमी भी मौजूद रहे। इसके अलावा मुफ्ती तौफीक उमर नदवी, मुश्ताक अहमद सोफ़ी, पीर गुलाम नबी, माजिद अब्बास जवाद, अधिवक्ता यासिर रऊफ, इम्तियाज मलिक और मजलिस के सचिव मौलाना एम.एस. रहमान शम्स ने भी इस एकता मुहिम को आगे बढ़ाने की बात कही।

समाज के लिए एक बड़ा संदेश

कश्मीर से उठी यह आवाज केवल एक घाटी तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश और दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश है। जब भी मुहर्रम का महीना करीब आता है तो कुछ शरारती तत्व शिया और सुन्नी समुदाय के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं। श्रीनगर की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि इस बार ऐसी किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

दोनों पक्षों के उलेमाओं ने हाथ मिलाकर यह साबित किया है कि आपसी संवाद से हर गलतफहमी को दूर किया जा सकता है। कश्मीर का यह कदम आने वाले दिनों में धार्मिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश करेगा।