एएमयू में बनेगी अत्याधुनिक एआई लैब
अलीगढ़ से खास रिपोर्ट
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एक नई शुरुआत होने जा रही है। यह शुरुआत सिर्फ एक लैब बनने की कहानी नहीं है। यह उस रिश्ते की मिसाल भी है, जो एक छात्र का अपने विश्वविद्यालय से वर्षों बाद भी बना रहता है। यह कहानी है एक मां, उसके बेटे और अपनी मातृसंस्था के लिए लौटे एहसान की।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू के प्रतिष्ठित ज़ाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में जल्द ही एक समर्पित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई रिसर्च लैब स्थापित की जाएगी। इस पहल ने विश्वविद्यालय परिसर में नई उम्मीद जगाई है। खासकर उन छात्रों के लिए, जो बदलती दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तकनीक को समझना और उसमें आगे बढ़ना चाहते हैं।
इस लैब की स्थापना 34 लाख रुपये के योगदान से संभव हो रही है। यह राशि एएमयू की पूर्व छात्रा डॉक्टर मस्सरत शिकोह ने दी है। वह सऊदी अरब के गृह मंत्रालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन इस पहल के पीछे सबसे खास सोच उनके बेटे सैयद मोहम्मद वहीद की मानी जा रही है, जिन्होंने इस लैब की परिकल्पना की और इसे आकार देने का फैसला किया।
सैयद मोहम्मद वहीद तकनीकी दुनिया में जाना पहचाना नाम माने जाते हैं। वह एक वैश्विक एआई एंबेसडर हैं। एआई एथिक्स यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक पहलुओं पर लिख चुके हैं। वह ब्रिटेन सरकार की एक एआई परियोजना में एआई रिसर्च ऑफिसर के रूप में भी काम कर चुके हैं। अब वह इस नई लैब के संस्थापक और रणनीतिक सलाहकार की भूमिका निभाएंगे।
वहीद का एएमयू से रिश्ता केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। उनके परिवार का विश्वविद्यालय से पीढ़ियों पुराना संबंध रहा है। यही भावनात्मक जुड़ाव उन्हें वापस अपनी जड़ों की ओर ले आया। उनका मानना है कि एएमयू जैसे संस्थानों को दुनिया में तेजी से बदल रही एआई तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए।
आज दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीक नहीं रही। यह जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। मोबाइल फोन से लेकर अस्पतालों तक। बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक। हर जगह एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे समय में एएमयू में बनने वाली यह लैब छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
यह एआई लैब कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में स्थापित की जाएगी। यहां केवल बुनियादी पढ़ाई नहीं होगी। बल्कि उन क्षेत्रों पर काम किया जाएगा, जिनकी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा है। इसमें एप्लाइड एआई, जेनरेटिव एआई, एआई एजेंट्स, एजेंटिक एआई सिस्टम, रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन यानी आरएजी और एथिकल एआई जैसे विषय शामिल होंगे।
सरल भाषा में कहें तो छात्र केवल तकनीक को समझेंगे नहीं, बल्कि यह भी सीखेंगे कि उसका जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल कैसे हो। क्योंकि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नैतिकता और जवाबदेही पर बहस भी तेज हुई है।
इस लैब का मकसद केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा। विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। छात्रों को उन्नत प्रशिक्षण मिलेगा। उन्हें नई तकनीकों पर काम करने का मौका दिया जाएगा। इससे उनके रोजगार और शोध दोनों के अवसर बढ़ सकते हैं।
इस पहल की औपचारिक घोषणा के दौरान एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कुलपति ने इस योगदान की सराहना करते हुए कहा कि एएमयू के पूर्व छात्रों का विश्वविद्यालय से गहरा भावनात्मक रिश्ता हमेशा प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने माना कि ऐसे प्रयास केवल ढांचे को मजबूत नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
सैयद मोहम्मद वहीद का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक लैब बनाना नहीं है। वह चाहते हैं कि एएमयू दुनिया के एआई इकोसिस्टम में सक्रिय भूमिका निभाए। उनके अनुसार भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मंच और अवसर देने की है।
वह यह भी मानते हैं कि आने वाला समय बुद्धिमान तकनीकों का होगा। ऐसे में विश्वविद्यालयों को अभी से तैयारी करनी होगी। छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें। उन्हें प्रयोग करने, नए समाधान खोजने और वैश्विक स्तर की सोच विकसित करने का मौका मिलना चाहिए।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एएमयू लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक बदलाव का बड़ा केंद्र रहा है। यहां से निकले छात्रों ने देश और दुनिया में अलग पहचान बनाई है। अब एआई जैसी आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में यह नई शुरुआत विश्वविद्यालय की छवि को और मजबूत कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एआई सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में लाखों रोजगार पैदा हो सकते हैं। ऐसे में अगर विश्वविद्यालय समय रहते अपने छात्रों को तैयार करते हैं, तो यह देश के लिए भी बड़ा निवेश साबित होगा।
एएमयू में बनने वाली यह लैब केवल मशीनों और कंप्यूटरों का कमरा नहीं होगी। यह एक सोच की शुरुआत होगी। एक ऐसा मंच, जहां छात्र भविष्य की भाषा सीखेंगे। जहां तकनीक और जिम्मेदारी साथ चलेंगी। और शायद यहीं से कुछ ऐसे युवा निकलें, जो आने वाले समय में दुनिया की बड़ी तकनीकी चुनौतियों का हल खोजें।

