AMU के सैयद बासिल रिज़वी को इसरो में प्रतिष्ठित इंटर्नशिप
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने एक बार फिर शैक्षणिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रतिभा का परचम लहराया है। ज़ाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (ZHCET) के आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस विभाग में बी.टेक के तृतीय वर्ष के छात्र सैयद बासिल रिज़वी का चयन भारत की शीर्ष वैज्ञानिक संस्था भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतर्गत नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर–नॉर्थ (NRSC-N), नई दिल्ली में एक अत्यंत प्रतिष्ठित इंटर्नशिप के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल छात्र की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि एएमयू और उसके इंजीनियरिंग संस्थान के लिए भी गर्व का विषय है।
यह इंटर्नशिप कार्यक्रम भारत सरकार के अधीन संचालित इसरो के सबसे महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्रों में से एक में व्यावहारिक प्रशिक्षण का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। इस दौरान सैयद बासिल रिज़वी को रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक विश्लेषण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के वास्तविक अनुप्रयोगों पर काम करने का अवसर मिलेगा। यह अनुभव न केवल उनके तकनीकी ज्ञान को और मज़बूत करेगा, बल्कि उन्हें देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा।
सैयद बासिल रिज़वी का चयन उनकी निरंतर उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों, गहरी विषयगत समझ और तकनीकी कौशल का प्रमाण है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में उनकी मज़बूत पकड़ ने उन्हें इस प्रतिष्ठित अवसर तक पहुँचाया है। यह इंटर्नशिप उनके अकादमिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, जो भविष्य में अनुसंधान, नवाचार और उच्च स्तरीय तकनीकी योगदान के नए द्वार खोल सकती है।
ज़ाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्राचार्य प्रोफेसर मोहम्मद मुज़म्मिल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सैयद बासिल रिज़वी को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा,
“इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र उभरती हुई तकनीकों में लगातार अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह हमारे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान उन्मुख वातावरण और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम है।”
उन्होंने विश्वास जताया कि सैयद बासिल इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाकर न केवल अपने कौशल को और निखारेंगे, बल्कि भविष्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उन्नत क्षेत्रों में सार्थक योगदान भी देंगे।
कॉलेज की प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रभारी डॉ. मोइना अथर ने भी छात्र की इस सफलता को संस्थान के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा,
“यह उपलब्धि सैयद बासिल रिज़वी की कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास, धैर्य और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। इसरो जैसे प्रतिष्ठित संगठन में चयन होना किसी भी छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि है और यह दर्शाता है कि हमारे छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे चयन अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनते हैं और उन्हें उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का संगम आने वाले वर्षों में विज्ञान और विकास की दिशा तय करेगा। रिमोट सेंसिंग, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इसरो के अधीन NRSC-N में प्रशिक्षण प्राप्त करना किसी भी युवा इंजीनियर के लिए एक अनमोल अवसर माना जाता है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय लंबे समय से देश को कुशल वैज्ञानिक, इंजीनियर और शोधकर्ता प्रदान करता आ रहा है। सैयद बासिल रिज़वी की यह सफलता इस परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और सशक्त उदाहरण है। विश्वविद्यालय परिसर में इस उपलब्धि को लेकर हर्ष और उत्साह का माहौल है, और साथी छात्र इसे प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।
यह चयन न केवल एक छात्र की सफलता की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समर्पण, अनुशासन और सतत परिश्रम के माध्यम से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सैयद बासिल रिज़वी की यह उपलब्धि एएमयू के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और भारत के वैज्ञानिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

