तमिलनाडु में ‘थलापति’ का राज: क्या विजय की जीत के पीछे कोई ‘गुप्त स्क्रिप्ट’ है?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, चेन्नई
तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त एक ही नाम की गूंज है और वह है जोसेफ विजय चंद्रशेखर। सिनेमाई पर्दे पर ‘थलापति’ कहलाने वाले विजय अब असल जिंदगी में सूबे के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। पांच राज्यों के चुनावी नतीजों में तमिलनाडु ने सबसे ज्यादा चौंकाया है। पश्चिम बंगाल, असम या केरल के परिणाम तो काफी हद तक अनुमान के मुताबिक थे, लेकिन तमिलनाडु में विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) ने जिस तरह से क्लीन स्वीप किया है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं। विजय ने मात्र दो साल पुरानी पार्टी के दम पर पांच दशक पुरानी द्रविड़ राजनीति की जड़ों को हिलाकर रख दिया है।
दिल्ली वाली ‘शक्तियों’ का हाथ या शुद्ध जनमत?
विजय की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या विजय की इस कामयाबी के पीछे वही ताकतें हैं, जिन्होंने कभी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और एक बुजुर्ग समाजसेवी को चेहरा बनाकर कांग्रेस का किला ढहा दिया था? इस चर्चा को हवा दी है विजय की एक पुरानी तस्वीर ने, जिसमें वह नीली शर्ट पहने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के बड़े नेताओं के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या पर्दे के पीछे से कोई बड़ी ताकत विजय को खाद-पानी दे रही थी? हालांकि विजय की जीत के असली राज खुलने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन फिलहाल उनके विरोधी इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बता रहे हैं।
Actor Vijay’s video offering prayers is going viral on social media.
— Prof. इलाहाबादी ( نور ) (@ProfNoorul) May 4, 2026
Meanwhile, in Tamil Nadu, his party TVK is rapidly gaining momentum and is being seen as a strong contender to form the government.
pic.twitter.com/prf0I5AWbw
मुस्लिम वोट बैंक और विजय की ‘एक्टिंग’ पर सवाल
विजय की जीत में एक और महत्वपूर्ण पहलू है और वह है मुस्लिम मतदाताओं का रुझान। जानकार मानते हैं कि अगर तमिलनाडु के मुसलमानों ने विजय का साथ नहीं दिया होता, तो उनके लिए सत्ता की दहलीज तक पहुंचना नामुमकिन था। जीत के बाद से ही विजय के कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में वह कहीं मुस्लिम टोपी पहने दिख रहे हैं तो कहीं नमाज पढ़ने की अदाकारी कर रहे हैं। आलोचक इसे उनकी सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं। हालांकि विजय निजी तौर पर ईसाई हैं, इसलिए दक्षिण भारत की राजनीति में एक ईसाई मुख्यमंत्री का आना अपने आप में एक बड़ी घटना है। वैसे तो केरल में ईसाई और मुस्लिम अभिनेताओं की भरमार है, लेकिन जो कामयाबी एनटीआर, जयललिता या अब विजय को मिली है, वैसी सफलता वहां किसी और को नसीब नहीं हुई।
Secularism is not negotiable.
— Prof. इलाहाबादी ( نور ) (@ProfNoorul) May 4, 2026
Joseph Vijay reaffirms his dedication to inclusive governance and social justice as Tamil Nadu looks toward a new leadership direction.
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कैसे तैयार हुई ‘थलापति’ की सियासी जमीन?
विजय की यह जीत रातों-रात नहीं मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने पिछले 15 सालों से इसके लिए बेहद खामोशी और चतुराई से जमीन तैयार की थी। विजय ने अपनी फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बनाया। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए लगातार भ्रष्टाचार, सामाजिक न्याय और आम आदमी की समस्याओं को उठाया। पर्दे पर उनकी छवि एक ऐसे हीरो की बनी जो सिस्टम के खिलाफ अकेले लड़ता है और गरीबों का मसीहा बनता है। यही फिल्मी छवि धीरे-धीरे उनकी असल जिंदगी की पहचान बन गई। साल 2009 से ही उनका फैन क्लब ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) सक्रिय था, जो पर्दे के पीछे जनकल्याण के काम कर रहा था। साल 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में जब उनके समर्थित 100 से ज्यादा उम्मीदवार जीते, तभी साफ हो गया था कि विजय अब फिल्मी पर्दे से निकलकर सत्ता के गलियारों में दस्तक देने वाले हैं।
– Stampede issue (More than 20 ppl Died)
— Ravi Teja (@Brs_Teja) May 4, 2026
– Trisha Issue (Own fans gave up)
– Wife campaigned against him
Yet Vijay is winning Tamilnadu !
This is unreal star power !! pic.twitter.com/ruGvBN1EnV
द्रविड़ राजनीति के किलों को ढहाने वाला ‘बूथ मैनेजमेंट’
विजय की पार्टी TVK की सबसे बड़ी ताकत उनका संगठनात्मक ढांचा रहा। उन्होंने अपनी पार्टी को सिर्फ रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रखा। विजय ने अपने फैन क्लब को एक अनुशासित राजनीतिक ढांचे में बदल दिया। राज्य के हर जिले, हर विधानसभा और हर बूथ पर उनके पास कार्यकर्ताओं की एक फौज तैयार थी। पार्टी ने हजारों बूथ एजेंट नियुक्त किए और सीधे जनता से संवाद किया। विजय का पूरा फोकस युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर था। उन्होंने ‘जेन-जी’ यानी आज की युवा पीढ़ी की नब्ज को पकड़ा। उन्होंने युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और प्रशासनिक सुधार का सपना दिखाया। यही वजह रही कि युवा मतदाताओं ने पुरानी पार्टियों को छोड़कर विजय पर भरोसा जताया।
DMK और AIADMK की विदाई और नया सवेरा
तमिलनाडु में पिछले कई दशकों से सत्ता की चाबी या तो डीएमके के पास रही या फिर एआईएडीएमके के पास। एम करुणानिधि और जयललिता जैसे कद्दावर नेताओं के बाद राज्य में एक नेतृत्व का खालीपन आ गया था। विजय ने इसी खाली जगह को भरा। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर सत्तारूढ़ डीएमके सरकार पर हमले किए। विजय ने खुद को एक ऐसे विकल्प के रूप में पेश किया जो द्रविड़ राजनीति के पुराने ढर्रे को बदल सकता है। उन्होंने महिलाओं के लिए मासिक आर्थिक सहायता जैसे लोकलुभावन वादे भी किए, जिसने गरीब तबके के वोट अपनी ओर खींच लिए। नतीजों ने बता दिया कि अब तमिलनाडु की जनता पुराने चेहरों से ऊब चुकी है और वह बदलाव चाहती है।
VIJAY IN TAMIL NADU
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) May 4, 2026
FAMILY CELEBRATES. PRICELESS VIDEO.
DUOPOLY BROKEN?
50+ years of DMK vs AIADMK dominance faces disruption
DYNASTY PUSHBACK
Setback to Stalin–Udhayanidhi signals voter resistance
DRAVIDIAN MODEL TESTED
Welfare + identity no longer a guaranteed win
VIJAY FACTOR… pic.twitter.com/qmmQsR2GbI
ऑडियो लॉन्च से शुरू हुई थी बगावत
विजय के राजनीतिक सफर की शुरुआत उनकी फिल्मों के ऑडियो लॉन्च कार्यक्रमों से ही हो गई थी। ये कार्यक्रम सिर्फ फिल्म के गानों के लिए नहीं होते थे, बल्कि विजय यहां से अपनी राजनीतिक भाषा बोलते थे। वे शिक्षा व्यवस्था की खामियों, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर खुलकर बोलने लगे थे। साल 2019 में जब उन्होंने सीएए (CAA) का विरोध किया, तभी यह संकेत मिल गया था कि वह अब सक्रिय राजनीति में आने का मन बना चुके हैं। उन्होंने खुद को भाजपा से दूर रखा और द्रविड़ अस्मिता के साथ-साथ एक समावेशी राजनीति की बात की। इसी संतुलन ने उन्हें हर वर्ग का प्रिय बना दिया।

क्या विजय इस कामयाबी को बरकरार रख पाएंगे?
तमिलनाडु में फिल्मी सितारों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं है। एमजीआर और जयललिता ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली और लंबे समय तक राज किया। हालांकि कमल हासन और रजनीकांत जैसे सितारे उस तरह का जादू नहीं दिखा पाए। विजय ने साबित कर दिया है कि फिल्मी लोकप्रियता को अगर मजबूत संगठन और स्पष्ट संदेश के साथ जोड़ा जाए, तो उसे चुनावी जीत में बदला जा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय एक सफल अभिनेता की तरह एक सफल मुख्यमंत्री भी साबित होंगे? क्या वह उन वादों को पूरा कर पाएंगे जिनके दम पर उन्होंने यह ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया है? फिलहाल तो तमिलनाडु की सड़कों पर ‘थलापति’ के नाम का जश्न है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी जब उन्हें फाइलों और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना होगा।
तमिलनाडु की राजनीति अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। विजय का उदय सिर्फ एक सितारे की जीत नहीं है, बल्कि यह एक नई राजनीतिक लहर है जिसने पुराने किलों को ढहा दिया है। क्या यह लहर भविष्य में दिल्ली की राजनीति को भी प्रभावित करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

