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ऑनलाइन गेमिंग का खतरनाक जुनून: मेरठ के 22 मोहम्मद कैफ की गेम खेलते समय मौत, हाई बीपी से ब्रेन हेमरेज

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली, मेरठ

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने ऑनलाइन गेमिंग की लत और उससे जुड़े स्वास्थ्य खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली गेट क्षेत्र के खैरनगर इलाके के रहने वाले 22 वर्षीय मोहम्मद कैफ की कथित तौर पर ऑनलाइन गेम खेलते समय तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, गेम खेलते हुए उनका ब्लड प्रेशर अचानक खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जिससे ब्रेन हेमरेज हुआ और बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिवार और स्थानीय लोगों के मुताबिक, कैफ लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग में अत्यधिक समय बिताते थे। घटना वाले दिन भी वह देर रात तक मोबाइल पर हेडफोन लगाकर गेम खेल रहे थे। बताया जा रहा है कि तड़के करीब 3 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और वह बेड से गिर पड़े। परिजन उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनका ब्लड प्रेशर 300 से ऊपर दर्ज किया, जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक था।

डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में ब्रेन हेमरेज की आशंका जताई और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। वहां दो दिन तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद रविवार सुबह (8 फरवरी) को उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।

मोहम्मद कैफ अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता मोहम्मद फारूक प्रॉपर्टी का काम करते हैं। पिता के अनुसार, कैफ पिछले करीब दस वर्षों से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। परिवार का कहना है कि उन्हें बार-बार मोबाइल और गेमिंग का समय कम करने की सलाह दी जाती थी, लेकिन वह अक्सर घंटों गेम खेलने में डूबे रहते थे। उन्हें सोशल मीडिया पर रील बनाने का भी शौक था और दिन का बड़ा हिस्सा मोबाइल पर ही बीतता था।

डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक तनाव, उत्तेजना और लगातार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित रखने से शरीर में एड्रेनालिन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे हृदयगति और ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हाई बीपी की समस्या हो, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बिना ब्रेक गेम खेलना, नींद की कमी, तेज आवाज में हेडफोन का उपयोग और जीत-हार का मानसिक दबाव शरीर और दिमाग दोनों पर गंभीर असर डालता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग आधारित गेम्स में इस्तेमाल किए जाने वाले कई मैकेनिज्म उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इनसे डोपामिन रिलीज बढ़ता है, जिससे व्यक्ति को बार-बार खेलने की इच्छा होती है और धीरे-धीरे लत विकसित हो सकती है। यह लत मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, सामाजिक दूरी और शारीरिक बीमारियों को जन्म दे सकती है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या का मामला भी चर्चा में रहा, जिसमें ऑनलाइन टास्क-आधारित गेम की लत का एंगल सामने आया। बताया गया कि वे लंबे समय से एक विदेशी “लव गेम” में उलझी थीं और पढ़ाई छोड़कर ज्यादातर समय गेम खेलने में बिताती थीं। इन घटनाओं ने अभिभावकों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों ने ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कुछ बड़े स्वास्थ्य जोखिम भी गिनाए हैं —

  • लगातार बैठे रहने से ब्लड क्लॉट और पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा
  • अत्यधिक तनाव से हार्ट रिद्म गड़बड़ी (अरिदमिया)
  • नींद की कमी से न्यूरोलॉजिकल और मानसिक समस्याएं
  • आर्थिक नुकसान वाले गेम्स से डिप्रेशन और आत्मघाती प्रवृत्ति

डॉक्टरों की सलाह है कि युवाओं को गेमिंग का समय सीमित रखना चाहिए। हर 30–40 मिनट पर ब्रेक लेना, पर्याप्त नींद लेना, हाइड्रेशन बनाए रखना और पहले से मौजूद बीमारियों — जैसे हाई ब्लड प्रेशर — की नियमित मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। माता-पिता को भी बच्चों और युवाओं की डिजिटल गतिविधियों पर संतुलित नजर रखनी चाहिए और संवाद बनाए रखना चाहिए।

मेरठ की यह घटना एक कड़ा संदेश देती है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन गेमिंग यदि नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है। तकनीक का उपयोग संतुलन और सजगता के साथ करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।