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मुख्यमंत्री के विकास कार्यों को समर्पित होगा हज़रत मुबारक खां शहीद का उर्स

अबू शाहमा अंसारी,लखनऊ/गोरखपुर:

गोरखपुर के ऐतिहासिक ‘नॉर्मल’ क्षेत्र में स्थित हज़रत मुबारक खां शहीद (रह.) का तीन दिवसीय वार्षिक उर्स-ए-पाक आगामी 15 अप्रैल से पूरी अकीदत और एहतराम के साथ शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष के उर्स की सबसे विशेष बात यह है कि दरगाह कमेटी ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बहुआयामी विकास कार्यों को समर्पित करने का निर्णय लिया है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इकरार अहमद ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, यह उर्स हर साल इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की 26, 27 और 28 तारीख को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष यह तिथियां 15, 16 और 17 अप्रैल को पड़ रही हैं।

कमेटी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में जो विकास की लहर चली है और कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, उससे आम जनता को अभूतपूर्व लाभ मिला है। इसी कृतज्ञता को प्रकट करने के लिए इस वर्ष के आयोजन को ‘विकास कार्यों’ के नाम किया गया है।


तीन दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा

उर्स के दौरान धार्मिक सभाओं, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। कार्यक्रम का विवरण कुछ इस प्रकार है:

प्रथम दिन: 15 अप्रैल

  • प्रात: काल: दरगाह शरीफ में ‘गुस्ल’ और ‘संदल पोशी’ की रस्म अदा की जाएगी।
  • रात्रि 9:00 बजे: एक विशाल धार्मिक जलसे का आयोजन होगा, जिसमें बिहार के प्रसिद्ध वक्ता मौलाना गुलाम रसूल बलियावी और मध्य प्रदेश के डॉ. रूह-उल-अमीन मुख्य रूप से शिरकत करेंगे और दीन की रोशनी फैलाएंगे।

द्वितीय दिन: 16 अप्रैल

  • प्रात: काल: फज्र की नमाज के बाद कुरान खानी और सुबह 9 बजे महफिल-ए-मिलाद होगी।
  • दोपहर 12:15 बजे: कुल शरीफ की रस्म संपन्न की जाएगी।
  • शाम (मगरिब के बाद): मियां बाजार से पारंपरिक ‘सरकारी चादर’ और ‘गागर’ का जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस अपने तय रास्तों से होते हुए दरगाह पहुंचेगा।
  • रात्रि: ईशा की नमाज के बाद भव्य ‘कव्वाली मुकाबला’ शुरू होगा, जो जायरीन के आकर्षण का केंद्र रहेगा।

तृतीय दिन: 17 अप्रैल

  • उर्स के अंतिम दिन भी सुबह कुरान खानी और महफिल-ए-मिलाद का आयोजन होगा।
  • जुमे की नमाज के बाद: विशाल ‘लंगर’ का वितरण किया जाएगा और देश में अमन, शांति व भाईचारे के लिए विशेष दुआ मांगी जाएगी।
  • समापन: अंतिम कव्वाली मुकाबले के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन होगा।

तैयारियां और अपील

पूर्वांचल सहित आसपास के कई जिलों से हजारों की संख्या में जायरीन और अकीदतमंदों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए दरगाह परिसर में साफ-सफाई, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। दरगाह कमेटी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिरकत कर उर्स की रौनक बढ़ाएं और मुल्क की खुशहाली की दुआओं में शामिल हों।

“यह उर्स न केवल इबादत का माध्यम है, बल्कि एकता और प्रदेश की प्रगति का जश्न भी है।” — दरगाह कमेटी

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