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कनाडा लिटरेचर फेस्टिवल में गूंजी अजमेर शरीफ के सूफी दर्शन की आवाज

मिसिसॉगा/टोरंटो

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में आयोजित प्रतिष्ठित कनाडा लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में भारत की ऐतिहासिक सूफी विरासत की झलक देखने को मिली। अजमेर शरीफ स्थित हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के 26वीं पीढ़ी के गद्दी नशीन और चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इस महोत्सव में हिस्सा लिया। उन्होंने वैश्विक मंच से भारत के 800 साल पुराने सूफी दर्शन, शांति और आपसी सद्भाव का संदेश दुनिया के सामने रखा।

यह साहित्यिक महोत्सव 13 मई से 18 मई 2026 तक मिसिसॉगा और टोरंटो शहरों में आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न धर्मों के बीच संवाद, पुस्तक विमोचन और सूफी कविताओं के सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में कनाडा के बहुसांस्कृतिक समाज और भारतीय प्रवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

सांस्कृतिक कूटनीति और भारत-कनाडा संबंध

इस महोत्सव के विभिन्न सत्रों में कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक और टोरंटो में भारत के महावाणिज्य दूत महावीर सिंघवी भी शामिल हुए। दोनों वरिष्ठ राजनयिकों की मौजूदगी ने इस आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया। इसे भारत और कनाडा के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

राजनयिकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन दोनों देशों के बीच जनता के स्तर पर संबंधों को प्रगाढ़ बनाते हैं। भारत की आध्यात्मिक संस्कृति और बहुलवाद के विचार दोनों देशों को आपस में जोड़ते हैं।

महाकुंभ 2025 पर आधारित पुस्तक का विमोचन

साहित्य महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण लेखक याकुब मैथ्यू की बहुप्रतीक्षित कॉफी-टेबल बुक ‘सीकिंग द इनफिनिट: महाकुंभ 2025’ का कनाडाई विमोचन रहा। इस किताब में दुनिया भर के 50 से अधिक विचारकों और आध्यात्मिक गुरुओं के विचारों को शामिल किया गया है।

टोरंटो में भारतीय प्रवासियों की गरिमामयी उपस्थिति में इस पुस्तक पर चर्चा की गई। पैनल चर्चा के दौरान वक्ताओं ने विभिन्न धर्मों के बीच संवाद, आध्यात्मिक एकता और जीवन के गहरे अर्थों की खोज पर अपने विचार साझा किए।

सर्वधर्म मंच पर जुटे दुनिया के बड़े विचारक

मिसिसॉगा के अपोलो कन्वेंशन सेंटर में ‘ए कॉन्फ्लुएंस ऑफ फेथ्स: सीकिंग द इनफिनिट’ विषय पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इस सत्र में हाजी सैयद सलमान चिश्ती मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

उनके साथ मंच पर कई अन्य प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं:

  • पुस्तक के लेखक याकुब मैथ्यू
  • बौद्ध आध्यात्मिक गुरु लामा आर्या ड्रोलमा
  • प्रख्यात विचारक राकेश कौल
  • हैरी मान

इस महत्वपूर्ण सत्र का संचालन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रभु गुप्तारा ने किया। सभी विचारकों ने एक सुर में कहा कि अलग-अलग धर्मों का अंतिम लक्ष्य मानवता की सेवा ही है।

सूफी शायरी और रूहानी संवाद की शाम

मिसिसॉगा के नोल रयान थिएटर में हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सूफी शायरी और रूहानी संवाद की एक विशेष शाम को संबोधित किया। इस सत्र में उन्होंने कनाडाई दर्शकों को चिश्ती सूफी सिलसिले की परंपराओं और रहस्यवाद से रूबरू कराया।

उन्होंने दर्शकों को समझाया कि सूफी मत किस तरह संगीत, कविता और प्रेम के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने का मार्ग दिखाता है। इस सत्र को स्थानीय दर्शकों ने काफी पसंद किया।

प्रमुख विचारकों और दिग्गजों के मुख्य वक्तव्य

महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने अपनी बात रखी। हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि चिश्ती सूफी परंपरा पिछले 800 वर्षों से यही सिखा रही है कि बिना किसी शर्त के मानवता की सेवा करना ही ईश्वर को पाने का रास्ता है। अजमेर शरीफ से लेकर ओंटारियो झील के तट तक हमारा संदेश एक ही है कि सबसे प्रेम करो और किसी से बैर मत रखो।

लेखक याकुब मैथ्यू ने अपनी पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि अनंत कोई ऐसी जगह नहीं है जहां पहुंचना है। यह तो एक ऐसा सच है जिसे सिर्फ याद रखना है कि आपके भीतर ही एक असीम क्षितिज छिपा है। टोरंटो का यह जमावड़ा साबित करता है कि सत्य की खोज हर सीमा से परे है।

भारत के उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा कि इस तरह के मंच दिखाते हैं कि अंतरधार्मिक शांति और सद्भाव ही मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की असली नींव हैं। भारत की आध्यात्मिक संस्कृति बहुलवाद और आपसी सम्मान के उन साझा मूल्यों को दर्शाती है जिन्हें भारत और कनाडा मिलकर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

महावाणिज्य दूत महावीर सिंघवी ने कहा कि लोगों के बीच आपसी संबंध कूटनीति के सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं। इस महोत्सव में जो एकता देखी गई जहां हर धर्म के लोग शांति के लिए एक साथ आए वह भारत-कनाडा संबंधों के मूल उद्देश्य को दर्शाती है।

सांस्कृतिक सेतु के रूप में लिटरेचर फेस्टिवल

कनाडा लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के आयोजक अजय मोदी ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव की शुरुआत जाति, भाषा, धर्म और संस्कृति की सीमाओं से परे ज्ञान और संवाद का जश्न मनाने के लिए हुई थी।

इस साल के आयोजन ने साबित कर दिया है कि साहित्य महोत्सव वैश्विक समझ बढ़ाने और वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बन सकते हैं। यह भारत और कनाडा के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का काम करता है। कुल मिलाकर छह दिनों तक चला यह महोत्सव टोरंटो और मिसिसॉगा में वैचारिक विमर्श का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा।

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