Religion

काबा के गिलाफ को सिलती है दुनिया की सबसे लंबी मशीन

नौशाद अख्तर | मुस्लिम नाउ विशेष

जब भी दुनिया भर से लाखों मुसलमान हज या उमरा के लिए मक्का पहुंचते हैं तो उनकी निगाह सबसे पहले खान ए काबा पर पड़ती है। काबा पर चढ़ा हुआ काला रेशमी गिलाफ हर श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस गिलाफ को अरबी में किसवा कहा जाता है। सोने और चांदी के धागों से सजी कुरआनी आयतें इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस विशाल और वजनी किसवा को तैयार कैसे किया जाता है। इसके अलग अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल होता है। आखिर वह कौन सी मशीन है जो दुनिया के सबसे पवित्र इस्लामी प्रतीक के गिलाफ को अंतिम रूप देती है।

मुहर्रम के आगमन और इस्लामी नए साल की शुरुआत के अवसर पर यह जानकारी लोगों के लिए विशेष दिलचस्पी का विषय बन गई है।

क्या है काबा का किसवा

किसवा वह विशेष काला रेशमी कपड़ा है जिससे काबा शरीफ को ढका जाता है। हर वर्ष हज सीजन समाप्त होने के बाद नया किसवा काबा पर चढ़ाया जाता है। पुराने किसवा को सावधानीपूर्वक उतार लिया जाता है।

इस गिलाफ पर कुरआन की आयतें, इस्लामी संदेश और सुंदर ज्यामितीय डिजाइन सोने तथा चांदी के धागों से उकेरे जाते हैं। इसका निर्माण एक अत्यंत जटिल और महीनों तक चलने वाली प्रक्रिया है।

मक्का में बनता है पवित्र गिलाफ

सऊदी अरब ने किसवा निर्माण के लिए एक विशेष संस्थान स्थापित किया है। मक्का स्थित किंग अब्दुलअजीज कॉम्प्लेक्स फॉर द काबा कवर इस कार्य का केंद्र है।

यहीं पर रेशम की बुनाई होती है। यहीं रंगाई की जाती है। यहीं कुरआनी आयतों की कढ़ाई होती है। और यहीं अंतिम सिलाई का काम भी पूरा किया जाता है।

किसवा के निर्माण में दर्जनों विशेषज्ञ, कारीगर, डिजाइनर और तकनीकी विशेषज्ञ पूरे वर्ष काम करते हैं।

कितने बड़े होते हैं किसवा के हिस्से

काबा का नया गिलाफ कई अलग अलग भागों में तैयार किया जाता है। प्रत्येक मुख्य रेशमी पैनल लगभग 14 मीटर लंबा और एक मीटर चौड़ा होता है।

इन पैनलों के भीतर सफेद सूती अस्तर लगाया जाता है। इसके बाद उन्हें बेहद सावधानी के साथ जोड़ा जाता है ताकि पूरा गिलाफ एक समान दिखाई दे।

हर हिस्से को गणितीय सटीकता के साथ व्यवस्थित किया जाता है। एक छोटी सी गलती भी पूरे डिजाइन को प्रभावित कर सकती है।

दुनिया की सबसे लंबी सिलाई मशीन

किसवा निर्माण की सबसे रोचक बात वह विशाल सिलाई मशीन है जिसका उपयोग अंतिम जोड़ाई के लिए किया जाता है।

उपलब्ध तकनीकी जानकारी के अनुसार यह मशीन लगभग 16 मीटर यानी करीब 52 फीट लंबी है। इसे दुनिया की सबसे लंबी सिलाई मशीनों में गिना जाता है।

यह मशीन सामान्य औद्योगिक मशीनों से पूरी तरह अलग है। इसे विशेष रूप से बड़े आकार के रेशमी कपड़ों को जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।

विशाल आकार के कारण 14 मीटर लंबे पैनलों को बिना मोड़े और बिना नुकसान पहुंचाए सीधे सिलना संभव हो जाता है।

लेजर तकनीक से होती है सिलाई

इस मशीन की सबसे बड़ी विशेषता इसका लेजर आधारित नियंत्रण तंत्र है।

लेजर सिस्टम सिलाई के दौरान सुई और धागे की दिशा को नियंत्रित करता है। इससे हर सिलाई सीधी रहती है। सभी जोड़ एक समान दिखाई देते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इतने बड़े कपड़े को हाथ से या सामान्य मशीन से सिलने पर हल्का सा टेढ़ापन भी दिखाई दे सकता है। लेकिन लेजर तकनीक इस संभावना को लगभग समाप्त कर देती है।

इसी वजह से किसवा का प्रत्येक हिस्सा बिल्कुल संतुलित और सुंदर दिखाई देता है।

1400 किलो तक होता है वजन

काबा का पूरा किसवा केवल सुंदर ही नहीं बल्कि अत्यंत भारी भी होता है।

विभिन्न स्रोतों के अनुसार तैयार गिलाफ का कुल वजन लगभग 1400 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्राकृतिक रेशम, सूती अस्तर और सोने चांदी से कढ़ाई किए गए धागे शामिल होते हैं।

इतने भारी वस्त्र को संभालना और जोड़ना अपने आप में एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।

पीढ़ियों से चली आ रही है कारीगरी

किसवा निर्माण केवल एक औद्योगिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक जीवित विरासत भी है।

मक्का के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। आधुनिक मशीनें और डिजिटल तकनीकें जरूर शामिल हुई हैं लेकिन पारंपरिक कढ़ाई और हस्तकला आज भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि किसवा निर्माण दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक हस्तकलाओं में से एक है।

क्यों खास है यह प्रक्रिया

काबा का गिलाफ केवल एक कपड़ा नहीं है। यह इस्लामी सभ्यता, कला, तकनीक और आस्था का संगम है।

एक ओर इसमें सदियों पुरानी कारीगरी दिखाई देती है। दूसरी ओर अत्याधुनिक लेजर तकनीक और कम्प्यूटरीकृत मशीनें इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करती हैं।

यही कारण है कि हर साल जब नया किसवा काबा पर चढ़ाया जाता है तो वह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि तकनीकी उत्कृष्टता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बन जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

काबा का किसवा कहाँ बनता है?

मक्का के किंग अब्दुलअजीज कॉम्प्लेक्स फॉर द काबा कवर में।

किसवा कितनी बार बदला जाता है?

हर वर्ष हज सीजन के बाद नया किसवा चढ़ाया जाता है।

किसवा सिलने वाली मशीन कितनी लंबी है?

लगभग 16 मीटर या 52 फीट लंबी।

किसवा का वजन कितना होता है?

करीब 1400 किलोग्राम तक।

किसवा किस सामग्री से बनता है?

उच्च गुणवत्ता वाले काले रेशम, सफेद सूती अस्तर और सोने चांदी की कढ़ाई से।