ट्रंप का बड़ा दावा: भारत-पाक युद्ध में 11 विमान गिरे,गाज़ा के लिए अरबों डॉलर, ईरान को 10 दिन की चेतावनी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में आयोजित तथाकथित “बोर्ड ऑफ पीस” की पहली बैठक में एक के बाद एक ऐसे बयान दिए, जिनसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। अपने संबोधन में ट्रंप ने न केवल भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए सैन्य तनाव का जिक्र किया, बल्कि गाज़ा के पुनर्निर्माण, ईरान को दी गई सख्त चेतावनी और सूडान पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी खुलकर बात की।

भारत-पाकिस्तान युद्ध पर चौंकाने वाला दावा
ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के दौरान “11 लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे।” इससे पहले वे पांच और फिर दस विमानों के गिराए जाने की बात कह चुके थे। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि जब दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ रहे थे, तब उन्होंने दोनों प्रधानमंत्रियों को फोन कर युद्ध रोकने की अपील की थी।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि युद्ध नहीं रोका गया तो अमेरिका दोनों देशों के साथ व्यापारिक समझौते समाप्त कर देगा और 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगा देगा। उनके अनुसार, इस सख्ती के बाद दोनों पक्ष पीछे हटे। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि वे दोनों नेताओं को जानते हैं और उन्हें “अच्छे योद्धा” पसंद हैं, लेकिन युद्ध से बचना ज़रूरी था।
हालांकि ट्रंप के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके इन बयानों ने दक्षिण एशिया की कूटनीति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ और गाज़ा के लिए अरबों डॉलर
अपने संबोधन में ट्रंप ने “बोर्ड ऑफ पीस” के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका इस पहल के लिए 10 अरब डॉलर उपलब्ध कराएगा। शुरुआती फोकस गाज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण पर रहेगा, जो इज़राइल-हमास युद्ध के बाद व्यापक तबाही का शिकार हुई है।
उन्होंने बताया कि कज़ाखस्तान, अज़रबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, बहरीन, क़तर, सऊदी अरब, उज़्बेकिस्तान और कुवैत सहित कई देशों ने आर्थिक सहयोग का वादा किया है। कुल मिलाकर लगभग 7 अरब डॉलर की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं, जबकि दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए अनुमानित 70 अरब डॉलर की आवश्यकता बताई जा रही है।
हालांकि इस बोर्ड में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शामिल किए जाने पर आलोचना भी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने दोनों के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों को लेकर वारंट जारी किए हैं।
ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम
ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तेहरान को 10 दिनों के भीतर “सार्थक समझौता” करना होगा, अन्यथा अमेरिका “एक कदम आगे बढ़ाने” पर मजबूर होगा।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा तेज़ हो गया है। विमानवाहक पोत और मिसाइल प्रणाली ईरान की पहुंच में तैनात किए गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रशासन और पेंटागन अधिकारियों के हवाले से लिखा कि यदि कूटनीति विफल रहती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है।
ईरान ने इन धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे परमाणु संवर्धन का अधिकार है और वह युद्ध नहीं चाहता। ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में हुई वार्ता को “रचनात्मक” बताया गया, लेकिन मतभेद अब भी बने हुए हैं।
सूडान पर अमेरिकी प्रतिबंध
इसी बीच अमेरिका ने सूडान के अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के तीन कमांडरों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने आरोप लगाया कि अल-फाशिर शहर की घेराबंदी और कब्जे के दौरान व्यापक जातीय हत्याएं, यातनाएं और यौन हिंसा हुई।
अमेरिका ने तत्काल मानवीय युद्धविराम की अपील करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ आतंक की इस मुहिम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बढ़ता वैश्विक तनाव
ट्रंप के ताज़ा बयानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी विदेश नीति आक्रामक रुख पर कायम है। गाज़ा में मानवीय संकट, ईरान के साथ परमाणु गतिरोध, सूडान में हिंसा और दक्षिण एशिया में तनाव—इन सब मुद्दों पर अमेरिका खुद को निर्णायक भूमिका में देख रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर ट्रंप कूटनीतिक समाधान की बात करते हैं, तो दूसरी ओर सैन्य विकल्प को खुला रखकर दबाव की रणनीति अपनाते हैं। आने वाले दस दिन ईरान के संदर्भ में विशेष रूप से अहम माने जा रहे हैं।
विश्व समुदाय की निगाहें अब वॉशिंगटन, तेहरान, गाज़ा और दक्षिण एशिया पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या कूटनीति जीत हासिल करेगी या टकराव की राह और तेज़ होगी

