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ट्रंप का शांति का दांव या मनोवैज्ञानिक युद्ध: बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया

वॉशिंगटन/तेहरान:

पश्चिम एशिया की तपती जमीन पर बिछी जंग की बिसात अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहाँ सच और ‘फेक न्यूज’ के बीच का अंतर धुंधला पड़ता जा रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि शांति की मेज सज चुकी है, तो दूसरी तरफ तेहरान की संसद से उठी दहाड़ इसे महज बाजार को नियंत्रित करने वाला “सफेद झूठ” करार दे रही है। इन सबके बीच, मिसाइलों की गड़गड़ाहट और गिरती तेल की कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिचकोले खाने पर मजबूर कर दिया है।

ट्रंप का ‘शांति’ कार्ड और तेहरान का पलटवार

सोमवार को व्हाइट हाउस के गलियारों से एक ऐसी खबर निकली जिसने दुनिया भर के शेयर बाजारों को चौंका दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका एक “सम्मानित” ईरानी नेता के साथ सीधी बातचीत कर रहा है और इस्लामिक गणराज्य इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक बड़े समझौते का इच्छुक है। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया, “ईरान इस बार गंभीर है, वे शांति चाहते हैं।”

ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर द्वारा रविवार को हुई इस गुप्त मुलाकात के दावे ने दुनिया को राहत की उम्मीद तो दी, लेकिन तेहरान ने इस पर पानी फेरने में देर नहीं लगाई। ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘फेक न्यूज’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन इस तरह की अफवाहों का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के लिए कर रहा है।

हॉर्मुज का जलडमरूमध्य: पांच दिन की मोहलत और अंधेरे का डर

जंग के चौथे हफ्ते में प्रवेश करते ही ट्रंप ने ईरान के सामने एक सख्त अल्टीमेटम रखा था—या तो दुनिया की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपना कब्जा हटाओ, वरना ईरान के पावर प्लांटों को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। सोमवार को यह समय सीमा खत्म होने वाली थी, लेकिन ट्रंप ने इसे अचानक पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया।

यह पांच दिन की मोहलत शांति की दिशा में एक कदम है या किसी बड़े सैन्य हमले की तैयारी, इस पर संशय बरकरार है। ईरान के सरकारी अखबारों का मानना है कि ट्रंप केवल समय खरीद रहे हैं ताकि ऊर्जा की कीमतों को नीचे लाया जा सके और अपनी सैन्य रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके।

बाजार में भूचाल: 11 फीसदी गिरी तेल की कीमतें

ट्रंप की इस घोषणा का असर युद्ध के मैदान से ज्यादा तेल के कुओं पर दिखा। जैसे ही बातचीत की खबरें फैलीं, तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध के कारण पहले ही तेल, ईंधन और गैस की कीमतों में जो बेतहाशा वृद्धि हुई है, उसका सबसे बुरा असर एशियाई और अफ्रीकी विकासशील देशों के करोड़ों गरीबों पर पड़ रहा है।

रक्तपात की भयावह तस्वीरें: लेबनान से तेहरान तक मातम

कूटनीति के दांव-पेंचों के बीच इंसानी जानों की कीमत चुकाई जा रही है। इजरायली युद्धक विमानों ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बमबारी जारी रखी है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 1,039 लोग मारे जा चुके हैं और 2,786 घायल हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने पुलों पर हो रही बमबारी को ‘जमीनी आक्रमण की प्रस्तावना’ करार दिया है।

उधर, ईरान में भी मौत का आंकड़ा 1,500 के पार पहुंच चुका है। इजरायल का कहना है कि वह केवल बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है, लेकिन तेहरान की गलियों में सुनाई देने वाले धमाके कुछ और ही दास्तां बयां कर रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे युद्ध के पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

परमाणु भय और ‘ऑब्लिटरेट’ की धमकी

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यदि कोई समझौता होता है, तो अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अपने कब्जे में ले लेगा—एक ऐसी शर्त जिसे ईरान ऐतिहासिक रूप से ठुकराता रहा है। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी धमकी दी है कि यदि उनके पावर प्लांटों को छुआ गया, तो वे खाड़ी देशों में उन तमाम ऊर्जा ढांचों और ‘डिसैलिनेशन प्लांट’ (खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र) को तबाह कर देंगे जहाँ अमेरिकियों की हिस्सेदारी है।

यह युद्ध केवल जमीन का नहीं, बल्कि अस्तित्व का बन गया है। ईरान ने इजरायल के डिमोना परमाणु केंद्र के पास भी मिसाइलें गिराई हैं, जो दुनिया को परमाणु तबाही के मुहाने पर ले जाने का संकेत है।

मध्यस्थता की धुंधली उम्मीद: तुर्की और मिस्र का प्रयास

इस अंधकार के बीच तुर्की और मिस्र उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और अमेरिका के साथ बातचीत की है। वहीं मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी ने ईरान को तनाव कम करने के “स्पष्ट संदेश” भेजे हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी पुष्टि की है कि वे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हो रही गुप्त हलचल से वाकिफ हैं।

निष्कर्ष: एक अनिश्चित भविष्य

क्या ट्रंप का यह ‘पलटवार’ किसी बड़े समझौते की प्रस्तावना है या यह शांति के मुखौटे में छिपा एक भीषण सैन्य प्रहार? ईरान का कहना है कि ट्रंप “पीछे हट गए” हैं, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि वे ईरान में ठिकानों पर “आक्रामक रूप से हमले” जारी रखे हुए हैं।

फिलहाल, दुनिया पांच दिनों की इस मोहलत पर सांसें थामे बैठी है। अगर इन पांच दिनों में कूटनीति विफल रही, तो खाड़ी देशों का पानी और बिजली दोनों गुल हो सकते हैं, जिसका असर सात समंदर पार तक महसूस किया जाएगा। यह एक ऐसा उपन्यास है जिसका हर पन्ना खून से लिखा जा रहा है और क्लाइमेक्स अभी बाकी है।