फीफा विश्व कप में ईरान की एंट्री पर बवाल
लॉस एंजिलिस
फीफा विश्व कप 2026 अभी शुरू भी नहीं हुआ है और ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर में ईरानी मूल के लोगों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पूर्व फुटबॉल खिलाड़ियों ने प्रदर्शन करते हुए फीफा से मांग की है कि ईरान को विश्व कप से बाहर किया जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी सरकार मानवाधिकार उल्लंघनों के गंभीर आरोपों का सामना कर रही है और ऐसे में विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर उसकी मौजूदगी गलत संदेश देती है।
ईरान की टीम अगले कुछ दिनों में फीफा विश्व कप 2026 में अपने अभियान की शुरुआत करने वाली है। इससे पहले लॉस एंजिलिस सिटी हॉल के बाहर हुए प्रदर्शन ने खेल और राजनीति के रिश्ते को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि विश्व कप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हिस्सा लेने से तेहरान सरकार को अपनी छवि सुधारने का अवसर मिलता है। उनका दावा है कि ईरान के भीतर मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में खेल के जरिए सरकार को सकारात्मक पहचान मिलना उचित नहीं है।
Tomorrow the World Cup begins. In Iran, they presented their national football team while waving Hezbollah flags and chanting “Death to America” and “Death to Israel.”
— Yossi BenYakar (@YossiBenYakar) June 10, 2026
I searched mainstream media for the footage of them chanting “Death to America”, but couldn’t find it. They only… pic.twitter.com/refdFm7m3D
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने उन खिलाड़ियों और खिलाड़ियों से जुड़े परिवारों की तस्वीरें भी प्रदर्शित कीं, जिनके बारे में कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें सरकार का विरोध करने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ तस्वीरें ऐसे खिलाड़ियों की भी थीं जिनकी मौत को लेकर लंबे समय से विवाद और सवाल उठते रहे हैं।
ईरानी मूल के अमेरिकी नागरिक रयान सलामी ने कहा कि दुनिया को ईरान की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए। उनका कहना था कि विश्व कप में भागीदारी से यह संदेश जाता है कि सब कुछ सामान्य है, जबकि उनके अनुसार देश के भीतर हालात अलग हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल खेल नहीं बल्कि मानवाधिकारों के मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।
इस प्रदर्शन में ईरान की राष्ट्रीय टीम के पूर्व खिलाड़ी भी शामिल हुए। उनमें सबसे प्रमुख नाम असघर अदीबी का रहा, जिन्होंने 1970 के दशक में ईरान का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने मंच से बोलते हुए मौजूदा राष्ट्रीय टीम और ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के रिश्तों पर सवाल उठाए।
अदीबी ने कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन जब खिलाड़ियों और खेल संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ जाता है तो सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है। उन्होंने फीफा से इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
हालांकि प्रदर्शन के दौरान एक दिलचस्प बहस भी देखने को मिली। कुछ लोगों का मानना था कि राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी स्वयं राजनीतिक फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उनका कहना था कि कई खिलाड़ी दबाव और कठिन परिस्थितियों में अपना करियर जारी रखते हैं। इसलिए खिलाड़ियों और सरकार के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।
वहीं दूसरे प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राष्ट्रीय टीम में शामिल होने वाले खिलाड़ी किसी न किसी रूप में व्यवस्था का हिस्सा बन जाते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व केवल खेल नहीं बल्कि एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक जिम्मेदारी भी है।
प्रदर्शनकारी पेमानेह शफी ने कहा कि उनके अनुसार वास्तविक खेल नायक वे खिलाड़ी हैं जिन्होंने दबाव के बावजूद अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खेल जगत में ऐसे लोगों को अधिक सम्मान मिलना चाहिए जिन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया।
फीफा विश्व कप 2026 पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित हो रहे इस टूर्नामेंट पर पूरी दुनिया की नजर है। ऐसे समय में ईरान की भागीदारी को लेकर उठे विवाद ने टूर्नामेंट के राजनीतिक आयाम को भी सामने ला दिया है।
What has happened at the 2026 World Cup over the last 48 hours:
— IRI Embassy in Armenia (@iraninyerevan) June 10, 2026
• Swiss footballer Embolo's visa was put under review and he was only able to join his team days later.
• Iraqi national team player Aymen Hussein was held for questioning for nearly 7 hours upon entering the… pic.twitter.com/JN2kRjdW4P
विशेषज्ञों का मानना है कि खेल और राजनीति का संबंध नया नहीं है। इतिहास में कई बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देशों की भागीदारी विवाद का विषय बन चुकी है। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का दौर हो या विभिन्न देशों पर लगाए गए खेल प्रतिबंध, ऐसे उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं।
इस पूरे विवाद के बीच फीफा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान की राष्ट्रीय टीम ने भी अब तक सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन यह साफ है कि विश्व कप के दौरान यह बहस मैदान के बाहर भी जारी रहने वाली है।
प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि वे मैचों के दौरान भी अपनी आवाज उठाने की कोशिश करेंगे। कुछ लोगों ने कहा कि वे ईरान के पुराने शेर और सूरज वाले झंडे को स्टेडियमों में प्रदर्शित करने का प्रयास करेंगे। यह झंडा 1979 की ईरानी क्रांति से पहले राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक माना जाता था।
ईरानी मूल की अमेरिकी नागरिक नसरीन सैफी ने कहा कि कई लोग इस प्रतीक के माध्यम से अपनी पहचान और राजनीतिक विचार व्यक्त करना चाहते हैं। उनके अनुसार विश्व कप केवल फुटबॉल का आयोजन नहीं बल्कि अभिव्यक्ति का एक मंच भी बन सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि फीफा विश्व कप 2026 में ईरान की टीम का प्रदर्शन जितना चर्चा में रहेगा, उतनी ही चर्चा उसके इर्द गिर्द पैदा हुए राजनीतिक विवादों की भी होगी। सोशल मीडिया, मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी समुदायों के कारण यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर लगातार सुर्खियों में बना रह सकता है।
Iran has secured a spot in the World Cup, but celebrations have been tempered by the US-Israeli war on Iran.
— AJE Sport (@AJE_Sport) June 10, 2026
Al Jazeera’s Tohid Asadi reports that many in Tehran are turning to football for a sense of relief. pic.twitter.com/UX5fhe8px4
फिलहाल ईरान की टीम अपने पहले मुकाबले की तैयारी में जुटी है। लेकिन लॉस एंजिलिस में हुए विरोध प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विश्व कप के इस संस्करण में फुटबॉल के साथ साथ राजनीति, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
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