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जामिया निज़ामिया में उर्दू यूनिवर्सिटी दाखिला जागरूकता अभियान

हैदराबाद

दक्षिण भारत की प्रतिष्ठित दीनि शिक्षण संस्था जामिया निज़ामिया में मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) के दाखिलों को लेकर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य खास तौर पर उन छात्रों तक जानकारी पहुंचाना था, जो दीनि शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक (असरी) शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते।

कार्यक्रम का उद्घाटन जामिया निज़ामिया के अमीर, हज़रत मौलाना मुफ़्ती खलील अहमद साहब के हाथों हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और शिक्षाविद मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में दीनि और दुनियावी शिक्षा के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अरबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सईद बिन मुखाशन ने अपने संबोधन में कहा कि जामिया निज़ामिया केवल दीनि तालीम का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यहां से कई ऐसे छात्र भी निकले हैं जिन्होंने आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि इस संस्थान में केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों के छात्र भी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी इसी संस्था से शिक्षा हासिल की थी।

डॉ. मुखाशन ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर छात्र दीनि शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों में भी दक्षता हासिल करते हैं, तो वे समाज में बेहतर योगदान दे सकते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी को एक अवसर के रूप में देखें, क्योंकि यहां शिक्षा का माध्यम उर्दू है, जो उनके लिए समझने और सीखने में सहज बनाता है।

कार्यक्रम में डॉ. मोहम्मद मुस्तफा अली सरवरी ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने उर्दू यूनिवर्सिटी के उन पूर्व छात्रों की सफलता की कहानियां साझा कीं, जिन्होंने कभी अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी, लेकिन बाद में MANUU में दाखिला लेकर न सिर्फ अपनी शिक्षा पूरी की, बल्कि आज अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में उच्च वेतन पर कार्यरत हैं।

उन्होंने एक छात्र का उदाहरण देते हुए बताया कि एक आईटीआई छात्र ने उर्दू यूनिवर्सिटी से एसी तकनीशियन का कोर्स किया और आज अफ्रीकी देश मोज़ाम्बिक में 4800 अमेरिकी डॉलर मासिक वेतन पर काम कर रहा है। इस तरह की कहानियां यह साबित करती हैं कि सही दिशा और अवसर मिलने पर छात्र अपने भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जामिया निज़ामिया के छात्र सीधे उर्दू, अरबी, फारसी और इस्लामिक स्टडीज़ जैसे विषयों में दाखिला ले सकते हैं। इसके अलावा अन्य पेशेवर और तकनीकी पाठ्यक्रमों में भी छात्रों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

इस अवसर पर MANUU एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष एजाज़ अली कुरैशी एडवोकेट, नासिर हुसैन शुऐब और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम से पहले एलुमनाई एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जामिया निज़ामिया के शैखुल जामिया हज़रत मौलाना डॉ. मोहम्मद सैफुल्लाह साहब से मुलाकात की और दाखिला जागरूकता अभियान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

इस मुलाकात के दौरान जामिया निज़ामिया के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन मुफ़्ती मोहम्मद अनवर अहमद, मौलाना हामिद कुरैशी (नायब शैखुल अदब) और मौलाना डॉ. मोहम्मद फिरोज़ खान (नायब शैखुल तफ्सीर) भी उपस्थित रहे।

यह जागरूकता अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक शैक्षिक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक दीनि संस्थानों के छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

आज जब शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, ऐसे में जामिया निज़ामिया जैसे संस्थानों में इस तरह के कार्यक्रम छात्रों के लिए नई उम्मीद और संभावनाओं के द्वार खोलते हैं। यह पहल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब दीन और दुनिया की शिक्षा को साथ लेकर चलने का समय आ गया है।

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