Uttar pradesh muslims success story : गौसेवा से पहचान बने बुलंदशहर के बब्बन मियां
मुस्लिम नाउ विशेष

बुलंदशहर के एक छोटे से गांव चांदियाना में एक ऐसी कहानी सांस ले रही है, जो आज के समय में उम्मीद जगाती है। यह कहानी है बब्बन मियां उर्फ़ जुबैदुर्रहमान की। एक ऐसे शख्स की, जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गायों की सेवा को समर्पित कर दिया। खास बात यह है कि वह इस काम को किसी दिखावे या चर्चा के लिए नहीं, बल्कि दिल से करते हैं।
स्याना तहसील के चांदियाना गांव में रहने वाले बब्बन मियां के लिए गौसेवा कोई नया रास्ता नहीं है। यह उनके परिवार की कई दशक पुरानी परंपरा है। वह बताते हैं कि उनके घर में पिछले पचास वर्षों से गायों की सेवा होती आ रही है। हालांकि करीब बीस साल पहले उन्होंने इसे एक संगठित रूप दिया और एक गौशाला की स्थापना की।
इस गौशाला का नाम रखा गया “मधुसूदन गौशाला”। नाम सुनकर लोग अक्सर हैरान होते हैं। लेकिन बब्बन मियां के लिए इसका जवाब बहुत साफ है। उनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा और भाईचारे के प्रतीक हैं। गायों के प्रति उनका प्रेम दुनिया जानती है। इसलिए उन्होंने गौशाला का नाम कृष्ण के नाम पर रखा। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति की पहचान है।
बब्बन मियां कहते हैं कि गायों से उनका लगाव उन्हें विरासत में मिला। इसकी शुरुआत उनकी मां से हुई। उनकी मां गायों से बेहद प्रेम करती थीं। उनकी देखभाल करती थीं। घर के माहौल में यह अपनापन बचपन से ही उनके भीतर उतरता चला गया।
मां के निधन के बाद बब्बन मियां ने तय किया कि वह इस प्रेम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने गौशाला बनाई और गायों की सेवा को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया। आज उनका पूरा परिवार इस पहचान से जुड़ चुका है। गांव में लोग उन्हें सम्मान से “गोपालक” कहकर बुलाते हैं।
दिल्ली में रियल एस्टेट का कारोबार हो, खेती की जमीनें हों या आम के बाग, बब्बन मियां मानते हैं कि असली सुकून उन्हें गौसेवा से मिला। वह कहते हैं कि कारोबार पैसा दे सकता है, लेकिन मन की शांति नहीं। गायों के बीच बिताया गया समय उन्हें अलग खुशी देता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी इस काम के लिए सरकारी मदद या चंदे पर भरोसा नहीं किया। उनका मानना है कि सेवा सबसे बड़ी पूंजी है। अगर नीयत साफ हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।
चांदियाना गांव खुद भी इतिहास से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि शेरशाह सूरी के दौर में कई पठान परिवार यहां आकर बसे थे। आज भी यह गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मेलजोल के लिए जाना जाता है। ऐसे माहौल में बब्बन मियां की सोच इस विरासत को और मजबूत करती है।
आज मधुसूदन गौशाला सिर्फ एक गौशाला नहीं रही। यह एक मिसाल बन चुकी है। यहां आम लोगों से लेकर कई जानी मानी हस्तियां भी पहुंच चुकी हैं। अभिनेता रज़ा मुराद, टीवी शो भाभीजी घर पर हैं की टीम, बॉक्सर संग्राम सिंह, मेनका गांधी, अनुराधा पौडवाल और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जैसे कई नाम इस जगह का दौरा कर चुके हैं।

बब्बन मियां मानते हैं कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी गंगा जमुनी तहजीब है। जहां अलग अलग धर्म और संस्कृतियां साथ चलती हैं। उनकी कहानी यही संदेश देती है कि इंसानियत, प्रेम और सेवा किसी एक धर्म की नहीं होती। शायद इसी सोच ने उन्हें बुलंदशहर की एक खास पहचान बना दिया है।

