ईरान के नए रक्षा मंत्री Mehrdad Akhlaghi कौन हैं?
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तेहरान।
अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपने रक्षा मंत्रालय की कमान मेहरदाद अखलाघी केताबची (Mehrdad Akhlaghi) को सौंपी है। बैलिस्टिक मिसाइलों, एयरोस्पेस तकनीक और रक्षा उद्योग में चार दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले अखलाघी ऐसे समय में रक्षा मंत्री बने हैं, जब ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और युद्ध से प्रभावित रक्षा ढांचे का पुनर्निर्माण बड़ी चुनौती है। उनकी नियुक्ति को ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन तकनीक और सैन्य उत्पादन को आगे बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अल जजीरा की 18 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद ने रविवार को अखलाघी की नियुक्ति को मंजूरी दी। संसद में उनके समर्थन में 237 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 15 सदस्यों ने विरोध किया। उन्हें रक्षा और सशस्त्र बल रसद मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। अमेरिका और इजरायल के साथ 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से ईरान की संसद ऑनलाइन बैठकें कर रही है।
अखलाघी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब युद्ध के विस्तार की आशंका बनी हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव जारी है। इससे पहले रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह युद्ध के पहले दिन मारे गए थे। उसी दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौत हुई थी। इसके बाद माजिद इब्ने रजा को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से सौंपी गई थी। अब वह अखलाघी के उपमंत्री के रूप में काम करेंगे।
42 साल से अधिक का रक्षा क्षेत्र का अनुभव
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के अनुसार, मेहरदाद अखलाघी को रक्षा मंत्रालय और उससे संबंधित संस्थानों में 42 साल से अधिक समय तक काम करने का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता बैलिस्टिक मिसाइलों, ठोस ईंधन से चलने वाली प्रणोदन प्रणालियों, एयरोस्पेस तकनीक और सैन्य औद्योगिक उत्पादन में रही है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अखलाघी पहले शाहिद बाघेरी इंडस्ट्रियल ग्रुप, एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन और डिफेंस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन जैसे संस्थानों का नेतृत्व कर चुके हैं। इन संगठनों की भूमिका ईरान की मिसाइल प्रणालियों और रक्षा उत्पादन क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण रही है।
उनके अनुभव का सबसे अहम पहलू सैन्य तकनीक को विकसित करने और उसे उत्पादन के स्तर तक पहुंचाने से जुड़ा है। ऐसे समय में जब युद्ध के कारण ईरान के कई रक्षा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, अखलाघी की तकनीकी पृष्ठभूमि को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उनकी जिम्मेदारी केवल मंत्रालय चलाने तक सीमित नहीं होगी। उन्हें सैन्य उत्पादन को दोबारा गति देने, हथियारों की उपलब्धता बढ़ाने और रक्षा उद्योग की क्षमता मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा।
अखलाघी और उनसे जुड़े कई रक्षा संस्थान अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के अधीन भी हैं। इससे ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता और सैन्य उत्पादन से जुड़ी चुनौतियां और जटिल हो सकती हैं।
सेज्जिल और जोल्फाघार मिसाइलों के विकास में भूमिका
ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, अखलाघी पिछले कई दशकों से देश की मिसाइल प्रणालियों और हथियार विकास से जुड़ी परियोजनाओं में शामिल रहे हैं। उन्हें सेज्जिल और जोल्फाघार बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और विस्तार में भूमिका निभाने वाला अधिकारी बताया गया है। इसके अलावा, सटीक निशाना लगाने वाले अल्मास मिसाइलों और यासिन गाइडेड बमों से संबंधित परियोजनाओं में भी उनकी विशेषज्ञता का उल्लेख किया गया है।
सेज्जिल और जोल्फाघार ईरान के प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों का हिस्सा हैं। इन हथियार प्रणालियों का विकास ईरान की उस व्यापक रणनीति से जुड़ा है, जिसके तहत वह अपनी सैन्य क्षमता और संभावित हमलों का जवाब देने की ताकत बढ़ाना चाहता है। हालांकि, किसी भी हथियार प्रणाली की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन उसके तकनीकी विवरण, परिचालन स्थिति और युद्ध में प्रदर्शन के आधार पर ही किया जा सकता है।
अखलाघी को अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों, अनुसंधान रॉकेटों और सेमनान स्थित इमाम खुमैनी स्पेस सेंटर से संबंधित तकनीकी ढांचे का भी अनुभव है। ईरान के लिए एयरोस्पेस तकनीक का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि इसका संबंध अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ रॉकेट इंजीनियरिंग और कुछ सैन्य तकनीकों से भी हो सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अखलाघी अपने तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। क्या वह मौजूदा मिसाइल प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देंगे, या युद्ध के अनुभव के आधार पर नए हथियारों और रक्षा तकनीकों के विकास को प्राथमिकता देंगे? फिलहाल, उनके सामने इन दोनों क्षेत्रों में काम करने की चुनौती है।
Iran’s new Defense Minister: Iran’s heavy fighter will take off next year. The aircraft is entirely made in Iran. https://t.co/AGXKQTNpYq
— Clash Report (@clashreport) October 18, 2026
मिसाइलों और ड्रोन की क्षमता बढ़ाना प्राथमिकता
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रजा तलई निक ने इसी महीने कहा था कि अखलाघी की नियुक्ति से देश की रणनीतिक हथियार प्रणालियों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत झलकती है। उन्होंने विशेष रूप से मिसाइलों और ड्रोन का उल्लेख किया था। उनके अनुसार, ईरान अपने आक्रामक हथियारों को लगातार बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।
अमेरिका लगातार दावा करता रहा है कि उसने ईरान की सैन्य औद्योगिक क्षमताओं के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया है। दूसरी ओर, तेहरान का कहना है कि उसके पास अब भी ऐसी महत्वपूर्ण आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताएं मौजूद हैं, जो अमेरिकी और इजरायली हमलों की पहुंच से बाहर हैं। ईरान यह भी दावा करता रहा है कि युद्ध के अनुभव के आधार पर उसके हथियारों में सुधार किया गया है।
इन दावों के बीच स्वतंत्र रूप से यह तय करना आसान नहीं है कि ईरान के रक्षा उद्योग को कितना नुकसान पहुंचा है और उसकी सैन्य उत्पादन क्षमता किस स्तर पर बनी हुई है। लेकिन अखलाघी की नियुक्ति से स्पष्ट है कि ईरान सरकार मिसाइलों, ड्रोन और अन्य रणनीतिक हथियारों को अपनी रक्षा नीति के केंद्र में रखना चाहती है।
नए रक्षा मंत्री ने संसद सदस्यों को बताया था कि उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है। इनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी भी शामिल थे। इन बैठकों का उद्देश्य युद्ध के दौरान और उसके बाद सशस्त्र बलों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझना था।
रक्षा उद्योग के पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती
अखलाघी के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम ईरान के सैन्य औद्योगिक ढांचे को फिर से खड़ा करना और उसकी उत्पादन क्षमता का विस्तार करना है। युद्ध के दौरान रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के दावों के बीच यह जिम्मेदारी और कठिन हो गई है।
उनकी प्राथमिकताओं में सैन्य उत्पादन को तेज करना, हवाई रक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाना और नई तकनीकों को रक्षा क्षेत्र में शामिल करना शामिल है। इसके लिए सरकारी संस्थानों के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों की मदद लेने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आधुनिक युद्ध में केवल मिसाइलों और लड़ाकू विमानों की संख्या ही निर्णायक नहीं होती। रडार, निगरानी प्रणाली, ड्रोन, संचार नेटवर्क और हवाई हमलों से बचाव की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस लिहाज से ईरान के नए रक्षा मंत्री के सामने अपनी सैन्य व्यवस्था के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत होगी।
इसके अलावा, अखलाघी को सशस्त्र बलों के कल्याण में सुधार और दूसरे देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के सामने तकनीकी संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तक पहुंच की चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में रक्षा उत्पादन को घरेलू स्तर पर मजबूत करना उसकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
अमेरिका को अखलाघी की दो टूक चेतावनी
रक्षा मंत्री बनने के बाद अखलाघी ने रविवार को अपने पहले सार्वजनिक बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु और ऊर्जा ढांचे के खिलाफ ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल की धमकी दी थी।
अखलाघी ने कहा कि ईरान ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और वह शांत मन से अपना काम जारी रखे हुए है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि अमेरिकी सैनिक इस क्षेत्र से सुरक्षित कैसे निकलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका एक बम गिराता है, तो उसे यह भी देखना होगा कि उसके कितने सैनिकों को क्षैतिज अवस्था में वहां से निकालना पड़ेगा। यह टिप्पणी अमेरिकी सैनिकों के संभावित हताहत होने की ओर इशारा करती है।
उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान का नया रक्षा नेतृत्व युद्ध के बीच अमेरिका के सामने सख्त रुख अपनाना चाहता है। हालांकि, बयानबाजी और वास्तविक सैन्य क्षमता में अंतर होता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की रक्षा तैयारियां, मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य उत्पादन किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
ईरान की रक्षा नीति के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
मेहरदाद अखलाघी केताबची की नियुक्ति केवल रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन नहीं है। यह ऐसे समय में हुई है, जब ईरान को एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ युद्ध के कारण सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ मिसाइल और ड्रोन क्षमता को बनाए रखने तथा बढ़ाने की जरूरत है।
उनका लंबा तकनीकी अनुभव ईरान को रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस परियोजनाओं में मदद कर सकता है। लेकिन इस अनुभव को वास्तविक परिणामों में बदलना आसान नहीं होगा। इसके लिए संसाधनों की उपलब्धता, सैन्य संस्थानों के बीच समन्वय और लगातार बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता जरूरी होगी।
ईरान के नए रक्षा मंत्री की सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि वह हवाई रक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत कर पाते हैं, सैन्य उद्योग को किस गति से पुनर्गठित करते हैं और नई तकनीकों को रक्षा प्रणाली में किस तरह शामिल करते हैं।
फिलहाल, अखलाघी के सामने सबसे बड़ी चुनौती युद्ध के बीच ईरान की सैन्य क्षमताओं को बनाए रखना और रक्षा उद्योग को फिर से मजबूत करना है। उनकी नियुक्ति से ईरान की मिसाइल, ड्रोन और सैन्य तकनीक संबंधी नीतियों में निरंतरता के संकेत मिलते हैं। लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों में ही स्पष्ट हो सकेगा।

