NewsPolitics

कोलकाता नीट प्रदर्शन में नफरती साजिश और व्हाट्सएप पर फैलते भ्रामक तर्कों का सच

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कोलकाता

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देश भर में जारी आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ पर आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ जहां छात्रों का विरोध जारी है, वहीं दूसरी तरफ इस विरोध प्रदर्शन की आड़ में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और आंदोलन के पीछे कई तरह के मनगढ़ंत दावे रचने की कोशिशें सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक मुस्लिम सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर को निशाना बनाने का प्रयास किया गया।

इस घटना के साथ-साथ व्हाट्सएप पर बारह बिंदुओं वाला एक भ्रामक संदेश भी तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस संदेश में आंदोलन को प्रायोजित और कृत्रिम साबित करने की कोशिश की जा रही है। इन दोनों मामलों ने नीट आंदोलन के आसपास चल रही राजनीति और साजिशों को उजागर कर दिया है।

कोलकाता प्रदर्शन के दौरान क्या घटा?

कोलकाता में नीट परीक्षा धांधली के खिलाफ छात्र और युवा लगातार आवाज उठा रहे हैं। सियालदह और राजाबाजार के पास आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में कई युवा शामिल हुए थे। इसी दौरान प्रदर्शन में भाग ले रहे एक मुस्लिम कंटेंट क्रिएटर, जिनका इंस्टाग्राम हैंडल sajahan_anyways है, को एक विवादित स्थिति का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान पीड़ित क्रिएटर को उनके मोबाइल पर ब्लिंकइट ऐप से एक ऑर्डर का नोटिफिकेशन प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर में प्राप्तकर्ता का नाम दर्ज करने के बजाय ‘हे मुल्ला’ जैसी नफरती और अपमानजनक टिप्पणी लिखी गई थी। यह ऑर्डर शौरज्या शिखर बेताल नाम के एक व्यक्ति द्वारा बुक किया गया था। इस पार्सल में कैश-ऑन-डिलीवरी यानी सीओडी के आधार पर पोर्क बेकन (सूअर का मांस) भेजा गया था।

सोशल मीडिया पर इसके स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पीड़ित प्रदर्शनकारी ने बताया कि यह कदम पूरी तरह से धार्मिक उकसावे की नीयत से उठाया गया था। इसका मकसद प्रदर्शन स्थल पर तनाव पैदा करना और माहौल को सांप्रदायिक रंग देना था।

पीड़ित प्रदर्शनकारी का संयमित और करारा जवाब

धार्मिक भावनाओं को भड़काने की इस हरकत पर उस मुस्लिम क्रिएटर ने बेहद समझदारी और शांति से अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस तरह की घटिया हरकतों से उनकी आस्था या उनके सिद्धांतों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

“तुम मुझे ‘हे मुल्ला’ लिखकर सूअर का मांस भेजोगे, तब भी मैं तुमसे नफरत नहीं करने लगूंगा। न ही इससे सही और गलत पर मेरा विश्वास कमजोर होगा। तुम्हें इसे कम से कम कैश ऑन डिलीवरी पर नहीं भेजना चाहिए था। जो सामान तुमने ऑर्डर किया, उसका भुगतान तुम्हें खुद करना चाहिए था। आज के आर्थिक हालात में 228 रुपये भी बहुत मायने रखते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इस नफरती हरकत के कारण एक निरपराध डिलीवरी कर्मचारी को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ी। डिलीवरी करने आए व्यक्ति का नाम मोहम्मद था। उसे पार्क स्ट्रीट से सियालदह तक सिर्फ इसलिए आना पड़ा, ताकि वहां जाकर पता चले कि कोई असली खरीदार मौजूद ही नहीं है। आर्थिक संकट और महंगे ईंधन के दौर में एक गरीब कर्मचारी की सुरक्षा और समय को इस तरह जोखिम में डालना दुखद है।

क्रिएटर ने ऑर्डर भेजने वाले व्यक्ति से कहा कि वे उससे नफरत नहीं करते। वे समझते हैं कि समाज में फैलती नफरत लोगों को इस तरह की हरकतों के लिए उकसाती है। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन वह व्यक्ति अपनी सोच में बदलाव लाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने ब्लिंकइट कंपनी की सुरक्षा नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या ब्लिंकइट को पता है कि उनके ऐप का इस्तेमाल नफरत फैलाने और किसी समुदाय को अपमानित करने के लिए किया जा रहा है? कंपनी को ऐसे मामलों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत कड़े नियम बनाने चाहिए।

व्हाट्सएप पर वायरल ’12 ऑब्जर्वेशन्स’ का विश्लेषण

कोलकाता की इस घटना के साथ ही एक और मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर एक लंबा संदेश घुमाया जा रहा है। इसमें नीट आंदोलन को एक प्रायोजित साजिश के तौर पर पेश करने के लिए 12 अलग-अलग बातें कही गई हैं।

इस वायरल संदेश के मुख्य बिंदु और उनका स्वरूप इस प्रकार है:

  • बांग्लादेश जैसी स्थिति का दावा: मैसेज में तर्क दिया गया है कि भारत में पड़ोस की तरह जेन जी के जरिए सरकार न गिराई जा सके, इसलिए सीजेपी जैसी पार्टी को खड़ा किया गया।
  • अभिजीत दीपके और वांगचुक पर आरोप: दावा किया गया कि अभिजीत दीपके को एजेंट बनाकर पेश किया गया और सोनम वांगचुक को आंदोलन की शुरुआत में इस्तेमाल करने के बाद किनारे कर दिया गया। YouTube
  • सोशल मीडिया पर बढ़त का तर्क: इसमें कहा गया कि सीजेपी के फॉलोअर्स को फर्जी और कृत्रिम तरीके से बढ़ाया गया है।
  • विपक्ष से न मिलने पर सवाल: संदेश में सवाल उठाया गया कि विदेश से लौटने के बाद अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर बैठने से पहले विपक्ष के नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं की।
  • प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई: आरोप लगाया गया कि छात्रों पर लाठियां चलाई गईं लेकिन मुख्य आयोजक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
  • इस्तीफे को भुनाने का दावा: इस मैसेज में तर्क दिया गया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन को राजनीतिक रूप से भुनाया गया।

यह पूरा संदेश यह साबित करने की कोशिश करता है कि नीट आंदोलन कोई स्वाभाविक छात्र आंदोलन नहीं है, बल्कि इसे एक खास मकसद के तहत गढ़ा गया है।

जमीनी मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति

इन दोनों घटनाओं को देखने से साफ होता है कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे को अब भटकाने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ जहां ब्लिंकइट के जरिए धार्मिक उकसावे की कोशिश की गई, वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

कोलकाता में पीड़ित युवक की समझदारी के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। हालांकि, यह घटना दर्शाती है कि छात्रों के वास्तविक सवालों का जवाब देने के बजाय माहौल को किस दिशा में मोड़ने की कोशिश हो रही है। नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका है। इस समय जरूरत फर्जी संदेशों और नफरती हरकतों से बचकर मुख्य मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *