ईरान-इज़राइल युद्ध पर अरब मीडिया की ‘एकतरफा पत्रकारिता’, इज़राइल के पक्ष में झुकाव साफ़
मुस्लिम नाउ, दुबई
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध को लेकर अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रमुख मीडिया संस्थाओं का रुख लगातार सवालों के घेरे में है। इस संघर्ष की शुरुआत से ही इन देशों की मीडिया में एकतरफा रिपोर्टिंग देखने को मिल रही है, जिसमें इज़राइल को मजबूत और ईरान को कमजोर दिखाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
रविवार को भी यह प्रवृत्ति बदली नहीं। गल्फ न्यूज, अरब न्यूज और अल-जज़ीरा जैसे प्रमुख मीडिया हाउस लगातार ऐसी खबरें चला रहे हैं जिनमें ईरान के खिलाफ प्रचार है और इज़राइली सैन्य कार्रवाई को ‘सफलता’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।
गल्फ न्यूज ने अमेरिकी बमवर्षक विमानों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें तकनीकी विवरण और उसकी मारक क्षमता को प्रमुखता से दर्शाया गया। अरब न्यूज ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को मुख्य समाचार बनाया, जबकि अल-जज़ीरा, जिसने कभी ग़ाज़ा पर इज़रायली हमलों की आलोचना में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, वह भी अब अमेरिकी बमवर्षकों के वीडियो चला रहा है – बिना आलोचना, बिना सवाल।
यह विडंबना ही है कि ये वही मीडिया संस्थान हैं जो भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर अक्सर तीखी आलोचना करते हैं, लेकिन ईरान पर इज़रायल और अमेरिका की बमबारी पर चुप्पी साधे हुए हैं।

आज जबकि अमेरिका ने सीधे ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं, और इज़राइल उसकी खुली सैन्य साझेदारी कर रहा है, तब भी इन मुस्लिम देशों की मीडिया ईरान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है और इज़राइल को ‘विजेता’ के रूप में पेश कर रही है।

ईरान की बड़ी सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ को कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। अन्य जो कुछ एजेंसियां बची हैं, वे अमेरिका के पक्ष में खबरें छाप रही हैं या फिर सन्नाटा ओढ़े हुए हैं।
तुर्की की बात करें तो वह भी इस संकट के दौरान खुले तौर पर इज़राइल की मदद कर रहा है, और उसकी मीडिया ईरान को कमजोर दिखाने में ही व्यस्त है। जबकि हकीकत यह है कि ईरान ने भी इज़राइल को जवाबी हमलों में भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें तेल अवीव जैसे शहर भी प्रभावित हुए हैं। लेकिन इस पर अरब मीडिया लगभग पूरी तरह चुप है।
अरब दुनिया की यह चुप्पी और पक्षपातपूर्ण रुख न केवल पत्रकारिता के मूल्यों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मुस्लिम उम्मत की एकजुटता पर भी गहरा आघात करता है।

ईरान जिस साहस से दो महाशक्तियों — अमेरिका और इज़राइल — का सामना कर रहा है, उसे मुस्लिम समाज के भीतर समर्थन मिलना चाहिए था, लेकिन इस युद्ध में भी अरब मीडिया का झुकाव ‘राजनीतिक हितों’ की ओर ज्यादा नजर आ रहा है, न कि इंसाफ और हकीकत की ओर।

