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चुनाव से पहले बिहार में गरमाई राजनीति, राहुल-तेजस्वी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ से BJP बेचैन

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, पटना/सासाराम

‘वोट चोरी’ का मुद्दा बिहार की सियासत में बड़ा राजनीतिक विमर्श बन गया है। विधानसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन ने इस बहस को इस कदर हवा दी है कि सत्तारूढ़ बीजेपी-जदयू गठबंधन बेचैनी महसूस करने लगा है। इसकी झलक रविवार को साफ़ दिखाई दी, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का आगाज़ किया और जवाब में तुरंत ही बीजेपी ने ‘विधानसभा मतदाता सम्मेलन’ की घोषणा कर डाली।

सत्ता पक्ष की कोशिश है कि विपक्ष के इस आंदोलन को ‘विकास’ के एजेंडे से ढक दिया जाए। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने पिछले साल फिर से बीजेपी के साथ हाथ मिलाया, अब तक बिहार को विकास की राह पर नहीं ला पाए। उल्टा, विपक्ष का दावा है कि सत्ता बचाने के लिए एक साजिशन लाखों वोटरों के वोट कटवाए गए ताकि राजद की सत्ता वापसी रोकी जा सके। यही मुद्दा उठाने के लिए रविवार से शुरू हुई यह 16 दिनी वोटर अधिकार यात्रा आयोजित की गई है।

तेजस्वी का हमला : “वोट की चोरी नहीं, डकैती”

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र की जननी बिहार से लोकतंत्र को मिटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा,
“यह महज़ वोट की चोरी नहीं, बल्कि डकैती है। बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान में वोट का अधिकार देकर जनता को ताक़त दी, लेकिन भाजपा चुनाव आयोग को आगे करके यह अधिकार छीन रही है।”

तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा,
“मोदी जी, यह बिहार है। यहां खैनी के साथ चूना रगड़ दिया जाता है। बिहार में हम बेईमानी नहीं होने देंगे।”

तेजस्वी ने जदयू-भाजपा सरकार को “नकलची सरकार” बताया और दावा किया कि उनके वादों की नकल करके नीतीश सरकार घोषणाएँ कर रही है। उन्होंने जनता से वादा किया कि मौका मिला तो वे बिहार में विकास करने वाली सरकार देंगे।

राहुल गांधी की अगुवाई में 1,300 किलोमीटर की यात्रा

राहुल गांधी ने कहा कि इस यात्रा के दौरान 16 दिन में 20 जिलों से होते हुए कुल 1,300 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यह यात्रा सासाराम से शुरू होकर 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल ‘वोटर अधिकार रैली’ के साथ समाप्त होगी। इसमें इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय नेता भी शामिल होंगे।
यह यात्रा औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, छपरा और आरा तक जाएगी।

एनडीए का पलटवार : 23 अगस्त से मतदाता सम्मेलन

इधर, एनडीए ने भी विपक्ष की रणनीति का जवाब देने के लिए 23 अगस्त से ‘विधानसभा मतदाता सम्मेलन’ शुरू करने की घोषणा की है। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम 18 दिनों तक चलेगा और सात चरणों में सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगा।
एनडीए का दावा है कि हर सम्मेलन में 5 से 10 हज़ार लोग शामिल होंगे और उन्हें महिला सशक्तिकरण, युवाओं के लिए रोजगार, तथा महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण जैसे विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी।

जायसवाल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “सोशल इंजीनियर” बताते हुए कहा कि उन्होंने 27 क्षेत्रों में परिवर्तनकारी काम किए हैं, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह विभाजनकारी मुद्दों को हवा देकर बिहार की प्रगति की अनदेखी कर रहा है।


👉 कुल मिलाकर, बिहार का राजनीतिक माहौल विधानसभा चुनाव से कई महीने पहले ही गरमा गया है। एक तरफ विपक्ष “वोट चोरी” का मुद्दा लेकर सड़कों पर है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ एनडीए विकास और सोशल इंजीनियरिंग की दुहाई देकर जनता को साधने की कोशिश कर रहा है।