तालिबान के विदेश मंत्री के भारत दौरे पर मचा घमासान, क्या सरकार से चूक हुई?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की भारत यात्रा ने राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है। भारत सरकार द्वारा मुत्तकी को छह दिवसीय दौरे की अनुमति दिए जाने पर अब सवालों की बौछार हो रही है। अभी उन्हें भारत आए हुए दो दिन ही बीते हैं कि गोदी मीडिया और तथाकथित सेक्युलर मीडिया में आपसी टकराव और सरकार की नीतियों पर तीखी आलोचना शुरू हो गई है।
Govt has dishonoured every single Indian woman by allowing Taliban minister to exclude women journalists from presser. Shameful bunch of spineless hypocrites. pic.twitter.com/xxnqofS6ob
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) October 10, 2025
पुराने ज़ख्म ताज़ा हुए – कंधार हाईजैक की यादें
सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही तस्वीरों और पोस्टों में कंधार हाईजैक कांड में तालिबान की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिनके समर्थन से भारतीय विमानों का अपहरण हुआ और आतंकवादियों को छोड़ा गया, उन्हीं तालिबानी नेताओं को अब भारत बुलाया जा रहा है — यह फैसला कितना सही है?
People wanted Modi Govt to pressurize Taliban to grant rights to women in Afghanistan
— Veena Jain (@Vtxt21) October 11, 2025
But a Talibani minister came to India & women journalists were kept out of the press conference
Keeping hopes on Modi is a waste, it’s been proven once again 🙌 pic.twitter.com/JBezo3sobz
प्रेस कांफ्रेंस में महिला पत्रकारों की अनुपस्थिति बनी मुद्दा
मुत्तकी ने भारत दौरे के दौरान अफगान दूतावास में प्रेस कांफ्रेंस की, लेकिन उसमें किसी भी महिला पत्रकार को आमंत्रित नहीं किया गया। साथ ही, प्रेस कांफ्रेंस के मंच पर सिर्फ तालिबान का झंडा दिखाई दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। सेक्युलर मीडिया ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा, जबकि गोदी मीडिया ने मुत्तकी के देवबंद दौरे पर आपत्ति जताते हुए इसे तालिबानी विचारधारा का विस्तार बताया।
इस खूबसूरत तस्वीर पर आपका एक खूबसूरत ‘कमेंट’ क्या होगा…🤔 pic.twitter.com/9SOxUh1cWo
— Ashraf Hussain (@AshrafFem) October 11, 2025
देवबंद यात्रा पर सियासी भूचाल
मुत्तकी के देवबंद दौरे को लेकर भी राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। कुछ मीडिया चैनलों और नेताओं ने यहां तक कह दिया कि तालिबान और देवबंद की विचारधारा एक जैसी है। सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव चलाया जा रहा है कि देवबंद से पढ़े लोग आतंकवाद की राह पकड़ लेते हैं — जो अपने आप में बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप है।
Four years ago, Muslims were jailed for even expressing views on the Taliban. Opposition Muslim leaders were booked just for speaking about Afghanistan.
— Muslim IT Cell (@Muslim_ITCell) October 10, 2025
Today, the Taliban’s Foreign Minister Muttaqi is on a 6-day visit to India, being hosted with full diplomatic honors, and will… pic.twitter.com/Oyn7XlD8Vs
सरकार की उलझन – दो पाटों के बीच फंसी रणनीति
सरकार की स्थिति असहज दिख रही है। एक ओर वह मुत्तकी का औपचारिक स्वागत कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्री तालिबान के उदाहरण देकर अपने राज्य में कानून व्यवस्था की सख्ती का बचाव करते नजर आ रहे हैं। यह दोहरा रवैया जनता की नजरों में सवाल खड़े कर रहा है।
Just a few days ago, the Uttar Pradesh police took action against those hoisting Islamic flags on houses. Today, the Modi government has had to bow down to the Taliban and hoist the same Islamic flag. pic.twitter.com/4ZRZOHS3vU
— Nasreen Ebrahim (@NaasreenEbrahim) October 11, 2025
मुत्तकी की सफाई – विवाद को किया शांत
हालांकि, मुत्तकी ने प्रेस कांफ्रेंस में महिला पत्रकारों को न बुलाने पर उठे विवाद को हल्के अंदाज़ में शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “इस बार पास सीमित थे, इसलिए कुछ को बुलाया गया, कुछ को नहीं। अगली बार जब मैं भारत आऊंगा, तो महिला पत्रकारों को ज़रूर आमंत्रित किया जाएगा।”
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार पत्रकार पुष्प रंजन ने इस पर व्यंग्य करते हुए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा –
“देखिए, झुका दिया तालिबान को देश की महिला शक्ति ने!”

तालिबान प्रवक्ता ने भी दी सफाई
तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि महिला पत्रकारों को जानबूझकर नहीं रोका गया। यह तकनीकी कारण था, न कि किसी नीति का हिस्सा। उन्होंने कहा कि काबुल में मुत्तकी नियमित रूप से महिला पत्रकारों से मिलते हैं और उन्हें इंटरव्यू भी देते हैं।
भविष्य की तैयारी – मीडिया प्रतिनिधियों में तालमेल ज़रूरी
तालिबान की ओर से साफ कर दिया गया है कि भविष्य में भारत दौरे के दौरान महिला पत्रकारों को भी प्रेस वार्ताओं में शामिल किया जाएगा। लेकिन इसके लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी होगा ताकि किसी प्रकार का विवाद फिर न हो।
افغان وزیر خارجہ امیر خان متقی کا دارلعلوم دیوبند میں میڈیا سے گفتگو pic.twitter.com/HWT1WjznP9
— امارتِ اسلامی اردو (@IEAUrduOfficial) October 11, 2025
निष्कर्षतः, मुत्तकी की भारत यात्रा ने एक बार फिर तालिबान को लेकर भारत की नीति, मीडिया की भूमिका और सामाजिक सोच पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां कुछ लोग इसे एक कूटनीतिक चाल मानते हैं, वहीं कई लोग इसे नैतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से खतरनाक निर्णय बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पूरे विवाद से कैसे निपटती है — चुप्पी साधकर या स्पष्टता के साथ?

