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फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास तोड़फोड़ पर बवाल,पत्थरबाज़ी के बाद पुलिस तैनाती

पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बुधवार तड़के उस समय तनाव फैल गया जब दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई एक सदी से अधिक पुरानी सैयद फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद और उससे सटे क्षेत्रों के आसपास की गई, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी देखी गई। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब कुछ लोगों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं और कथित तौर पर पत्थरबाज़ी भी की गई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एमसीडी की यह तोड़फोड़ कार्रवाई 7 जनवरी को सुबह 8 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इसे अचानक लगभग रात 1:30 बजे ही शुरू कर दिया गया। इस अप्रत्याशित समय को लेकर स्थानीय निवासियों और मस्जिद प्रबंधन समिति ने आपत्ति जताई। वीडियो फुटेज में बुलडोज़रों को मस्जिद परिसर के पास मौजूद कुछ ढांचों को गिराते हुए देखा गया, जबकि इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। मौके पर कम से कम 17 अर्थमूवर मशीनें मौजूद थीं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कुछ “शरारती तत्वों” ने पत्थरबाज़ी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि पुलिस का दावा है कि स्थिति को “कम से कम बल प्रयोग” करते हुए जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया और इलाके में शांति बहाल कर दी गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में आंसू गैस के इस्तेमाल की बात कही गई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तोड़फोड़ रामलीला मैदान के पास स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद से सटे अतिक्रमित क्षेत्रों में की जा रही थी। उनके अनुसार, स्थिति को तेजी से नियंत्रित कर लिया गया और फिलहाल किसी तरह का तनाव नहीं है।

हालांकि यह कार्रवाई उस समय की गई जब ठीक एक दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद की प्रबंध समिति द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया था। याचिका में एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी लगभग 0.195 एकड़ भूमि पर बने ढांचों को अतिक्रमण बताते हुए हटाने का निर्देश दिया गया था।

मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि यह भूमि एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है, जिस पर वक्फ अधिनियम लागू होता है। समिति ने अदालत में कहा कि वह दिल्ली वक्फ बोर्ड को नियमित रूप से लीज़ रेंट का भुगतान कर रही है और इस भूमि से जुड़े किसी भी विवाद पर केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अमित बंसल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस विवाद पर विचार आवश्यक है। अदालत ने एमसीडी और भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 के लिए तय की। हालांकि अदालत ने प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे एमसीडी को कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया।

एमसीडी का कहना है कि संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट (जेएसआर) के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि मस्जिद समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा 0.195 एकड़ से बाहर की भूमि पर मालिकाना हक या वैध कब्जे के कोई दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लगभग 2,512 वर्गफुट सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण किया गया था, जबकि रामलीला मैदान की लगभग 36,248 वर्गफुट भूमि पर कथित रूप से एक ‘बारातघर’ और निजी क्लिनिक संचालित हो रहे थे।

मस्जिद समिति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वहां कोई स्थायी बारातघर नहीं है और खाली स्थान का उपयोग कभी-कभार विवाह समारोहों के लिए किया जाता था। साथ ही समिति ने यह भी बताया कि एक चैरिटेबल क्लिनिक चलाया जा रहा था, जो जरूरतमंदों को न्यूनतम शुल्क पर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता था। समिति के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्ति उप्पल ने अदालत को जानकारी दी कि क्लिनिक की गतिविधियां अब बंद कर दी गई हैं और कथित अतिक्रमण हटाने पर समिति को कोई आपत्ति नहीं है।

एल एंड डीओ की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि वर्ष 1940 में 0.195 एकड़ भूमि लीज़ पर दी गई थी और उस सीमित क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई का प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान को ध्वस्तीकरण से बाहर रखा गया है और कार्रवाई केवल कथित अतिक्रमित संरचनाओं तक सीमित है।

फिलहाल तुर्कमान गेट इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।