दमिश्क को बड़ी कामयाबी: SDF से संघर्ष के बाद सीरिया में सीज़फायर
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,दमिश्क
कई दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद सीरियाई सरकार और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (SDF) के बीच युद्धविराम समझौते की घोषणा कर दी गई है। सीरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, इस समझौते के तहत एसडीएफ अपनी सेनाएं यूफ्रेटिस नदी के पश्चिमी इलाकों से वापस बुलाएगी और धीरे-धीरे सीरियाई राष्ट्रीय सेना में एकीकृत होगी। इस घटनाक्रम को सीरिया के लंबे संघर्ष में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
संघर्ष के बाद समझौता
यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब उत्तर-पूर्वी सीरिया में सरकार और एसडीएफ के बीच कई दिनों तक ज़ोरदार झड़पें हुईं। दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक चौकियों, तेल क्षेत्रों और अहम बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष चल रहा था। अंततः रविवार को घोषित इस समझौते ने लड़ाई को रोकने और सत्ता संतुलन को सरकार के पक्ष में मोड़ दिया।
सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने दमिश्क में बयान देते हुए कहा कि इस समझौते के बाद सीरियाई राज्य संस्थान तीन प्रमुख प्रांतों—अल-हसाका, देइर अज़-ज़ोर और रक्का—में प्रवेश करेंगे, जो अब तक एसडीएफ के नियंत्रण में थे। उन्होंने अरब कबीलों से शांति बनाए रखने और समझौते के क्रियान्वयन में सहयोग करने की अपील भी की।
एसडीएफ का सैन्य और प्रशासनिक विलय
समझौते की सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि एसडीएफ के लड़ाके और प्रशासनिक ढांचा सीरियाई राज्य व्यवस्था में शामिल होंगे। आईएसआईएस (ISIS) के कैदियों और शिविरों की निगरानी कर रही एसडीएफ की इकाइयों को भी सरकारी ढांचे में समाहित किया जाएगा, जिससे इन शिविरों की कानूनी और सुरक्षा जिम्मेदारी पूरी तरह दमिश्क सरकार के हाथ में आ जाएगी।
इसके साथ ही, एसडीएफ को यह अधिकार दिया गया है कि वह कुछ नेताओं के नाम प्रस्तावित करे, जिन्हें केंद्र सरकार में वरिष्ठ सैन्य, सुरक्षा और नागरिक पदों पर नियुक्त किया जा सकता है। इसे “राष्ट्रीय साझेदारी” की दिशा में एक कदम बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय भूमिका और प्रतिक्रियाएं
यह घोषणा राष्ट्रपति अल-शारा की अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैरक से मुलाकात के बाद की गई। हालांकि एसडीएफ प्रमुख मज़लूम अब्दी को भी इस बैठक में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण उनकी यात्रा स्थगित कर दी गई। कुर्द समाचार एजेंसी रुदाव के अनुसार, मज़लूम अब्दी सोमवार को दमिश्क पहुंचकर अल-शारा से मुलाकात करेंगे और उन्होंने देइर अज़-ज़ोर और रक्का से पीछे हटने की पुष्टि भी कर दी है।
अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे “विभाजन के बजाय साझेदारी को अपनाने वाला ऐतिहासिक मोड़” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका सीरिया में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में एसडीएफ के शांतिपूर्ण एकीकरण को सकारात्मक रूप से देखता है।
वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने भी अल-शारा से फोन पर बातचीत कर सीरिया को समर्थन देने की बात कही। एर्दोआन ने स्पष्ट किया कि सीरियाई क्षेत्र से आतंकवाद का पूर्ण सफाया पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक है। तुर्की लंबे समय से एसडीएफ को कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से जुड़ा मानता रहा है, जिसे वह आतंकवादी संगठन घोषित करता है।
दमिश्क के लिए “रणनीतिक जीत”
अल जज़ीरा के संवाददाता अयमान ओघाना के अनुसार, यह युद्धविराम दमिश्क और उसके सहयोगी तुर्की के लिए एक बड़ी जीत है। उनके मुताबिक, समझौते के तहत एसडीएफ ने गैर-सीरियाई पीकेके तत्वों को हटाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे तुर्की की सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता दूर होती दिख रही है।
अब रक्का, हसाका और देइर अज़-ज़ोर जैसे शहर पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होंगे और वहां की नागरिक संस्थाएं दमिश्क के अधीन काम करेंगी। इसके साथ ही सरकार सभी सीमा चौकियों, तेल और गैस क्षेत्रों पर भी नियंत्रण स्थापित करेगी।
सैन्य बढ़त और एसडीएफ की कमजोरी
समझौते से पहले सीरियाई सेना ने तेज़ी से आगे बढ़ते हुए कई अहम इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया था। सरकारी मीडिया के अनुसार, सेना ने तबका शहर, उससे जुड़ा बांध, रक्का के पश्चिम में फ्रीडम डैम और देश के सबसे बड़े ओमर तेल क्षेत्र तथा कोनोकॉ गैस फील्ड पर नियंत्रण हासिल कर लिया। यह एसडीएफ के लिए बड़ा झटका था।
टोरंटो विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक जमाल मंसूर के अनुसार, एसडीएफ राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ चुकी थी। क्षेत्रीय समर्थन की कमी, अरब कबीलों की नाराज़गी और आर्थिक उपेक्षा के कारण उसकी पकड़ कमजोर हो गई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इराकी कुर्द नेतृत्व ने भी एसडीएफ को सरकार के साथ सहयोग की सलाह दी थी।
निष्कर्ष
यह युद्धविराम केवल संघर्ष रोकने का समझौता नहीं, बल्कि सीरिया की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत है। एसडीएफ का पीछे हटना और सरकारी ढांचे में विलय दमिश्क के लिए लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक लड़ाई में निर्णायक बढ़त माना जा रहा है। साथ ही, यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष और सीरिया के भविष्य के राजनीतिक मानचित्र को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है।

