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ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता के बीच ओमान जाएंगे ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी, बढ़ी कूटनीतिक हलचल

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता को लेकर जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ओमान की महत्वपूर्ण यात्रा पर जा रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ओमान, तेहरान और वाशिंगटन के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर संवाद बहाल कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और क्षेत्र में संभावित सैन्य टकराव को टालने की कोशिशें तेज हैं।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी मस्कट में ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी और सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों को मौजूदा परमाणु वार्ता प्रक्रिया के लिहाज से “महत्वपूर्ण” माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लारीजानी अपने साथ कौन सा औपचारिक संदेश या प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं।

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, हाल ही में ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता का पहला दौर फिर से शुरू हुआ था। यह वार्ता ऐसे समय में आगे बढ़ी जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैयारियों और सुरक्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई। माना जा रहा है कि लारीजानी की यह यात्रा उसी वार्ता के फॉलो-अप के रूप में हो रही है, जिसमें ईरान की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

दूसरी ओर, इजराइल भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए वाशिंगटन पहुंचे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ रणनीतिक समन्वय बढ़ाना और वार्ताओं के दायरे को सख्त शर्तों के साथ विस्तृत करने पर जोर देना बताया जा रहा है। नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के खिलाफ कठोर अंतरराष्ट्रीय रुख की वकालत करते रहे हैं।

इजराइल की ओर से लगातार यह मांग उठती रही है कि ईरान पूरी तरह यूरेनियम संवर्धन बंद करे, अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में कटौती करे और क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों से संबंध तोड़े। हालांकि ईरान ने इन मांगों को बार-बार खारिज किया है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह केवल प्रतिबंधों में ठोस ढील के बदले सीमित और पारदर्शी प्रतिबद्धताएं स्वीकार कर सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि ओमान की भूमिका इस पूरे समीकरण में बेहद अहम बन गई है। अतीत में भी ओमान ने अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान परिस्थितियों में जब प्रत्यक्ष वार्ता राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही है, तब अप्रत्यक्ष और मध्यस्थता आधारित कूटनीति को अधिक व्यवहारिक रास्ता माना जा रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ओमान में होने वाली बैठकों से कोई सकारात्मक संकेत निकलता है, तो परमाणु वार्ता की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है। इससे न केवल संभावित सैन्य टकराव की आशंकाएं कम होंगी, बल्कि ऊर्जा बाजार और वैश्विक कूटनीति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल सबकी नजर मस्कट में होने वाली मुलाकातों और वाशिंगटन में चल रही उच्चस्तरीय चर्चाओं पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति की दिशा तय कर सकती हैं।