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अनिश्चितकालीन हड़ताल से ठप चटगांव बंदरगाह, पट्टे के खिलाफ आंदोलन

बांग्लादेश के सबसे बड़े और रणनीतिक रूप से अहम चटगांव बंदरगाह पर रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है, जिससे बंदरगाह की पूरी परिचालन व्यवस्था ठप हो गई है। यह हड़ताल चटगांव बंदरगाह संरक्षण आंदोलन के बैनर तले नए मूरिंग कंटेनर टर्मिनल (एनसीटी) को पट्टे पर देने के फैसले के विरोध में शुरू की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।

हड़ताल की शुरुआत रविवार सुबह ठीक 8 बजे की गई। इसके आधे घंटे के भीतर ही बंदरगाह के मुख्य प्रशासनिक क्षेत्र में असामान्य सन्नाटा छा गया। सुबह करीब 8:30 बजे बंदरगाह भवन के सामने गेट नंबर–4 पर पुलिस बल को पूरी तरह सतर्क देखा गया, जबकि बंदरगाह के भीतर वाहनों की आवाजाही लगभग पूरी तरह रुक गई।

मौके से मिली जानकारी के अनुसार, हड़ताल शुरू होते ही जेटी, यार्ड, टर्मिनल, प्रशासनिक भवन और बाहरी लाइटरेज क्षेत्रों में माल की अनलोडिंग, हैंडलिंग और परिवहन से जुड़ा सारा काम ठप हो गया। कंटेनरों की आवाजाही रुकने से आयात-निर्यात गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है, जिससे राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चटगांव बंदरगाह प्राधिकरण ने रविवार सुबह 9:30 बजे बंदरगाह भवन के सम्मेलन कक्ष में एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में लगभग 200 सामान्य कर्मचारियों और श्रमिकों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, आंदोलनकारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया और साफ कहा कि जब तक उनकी मूल मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे।

इस हड़ताल की औपचारिक घोषणा शनिवार को चटगांव प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई थी। पोर्ट प्रोटेक्शन काउंसिल के समन्वयक मोहम्मद इब्राहिम खोकन ने कहा कि एनसीटी को पट्टे पर देने का फैसला राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इससे बंदरगाह की स्वायत्तता व श्रमिकों के अधिकारों पर खतरा पैदा होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिषद की केवल यही एक मांग नहीं है। अन्य प्रमुख मांगों में चटगांव बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष एस. एम. मोनिरुज्जमान की वापसी, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाइयों को रद्द करना और श्रम नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों सहित सभी प्रकार के कानूनी उत्पीड़न को समाप्त करना शामिल है।

ढाका पोस्ट से बातचीत में मोहम्मद इब्राहिम खोकन ने कहा, “सुबह 8 बजे से बंदरगाह पर सभी प्रकार के काम बंद हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।” उन्होंने श्रम नेताओं को परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, दो श्रम नेताओं—शम्सु मियां टुकू और अबुल कलाम आजाद—को प्रशासन ने आम नागरिक बताकर अपने साथ ले लिया, जो आंदोलनकारियों में आक्रोश का कारण बना है।

पोर्ट प्रोटेक्शन काउंसिल के एक अन्य समन्वयक मोहम्मद हुमायूं कबीर ने बताया कि इससे पहले 31 जनवरी से 2 फरवरी तक प्रतिदिन आठ घंटे की हड़ताल की गई थी, जबकि 3 से 5 फरवरी तक लगातार हड़ताल जारी रही। नौसेना सलाहकार के आश्वासन के बाद शुक्रवार और शनिवार को आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित किया गया था, लेकिन वादे पूरे न होने के कारण अब और कड़ा कदम उठाया गया है।

वहीं, चटगांव महानगर पुलिस के उप आयुक्त (बंदरगाह) मोहम्मद अमीरुल इस्लाम ने कहा कि बंदरगाह की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में चटगांव बंदरगाह की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में हड़ताल के लंबे खिंचने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, बल्कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव और गहराने की भी आशंका जताई जा रही है।