अमेरिका में इतिहास रचती मुस्लिम एनीमेशन फिल्म: ‘टाइम हॉपर्स: द सिल्क रोड’ रिलीज़
650+ सिनेमाघरों में रिलीज़, मुस्लिम किरदारों की बड़ी छलांग
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमेरिका के सिनेमाई परिदृश्य में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में बच्चों के लिए बनाई गई नई एनीमेशन फीचर फिल्म ‘टाइम हॉपर्स: द सिल्क रोड’ चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह पहली मुस्लिम-थीम पर आधारित एनीमेटेड फीचर फिल्म है, जिसे पूरे अमेरिका में बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया है। 650 से अधिक थिएटर लोकेशनों पर प्रदर्शित इस फिल्म को परिवार और बच्चों के मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ एक रचनात्मक उपलब्धि है, बल्कि प्रतिनिधित्व, विविधता और सकारात्मक सांस्कृतिक प्रस्तुति की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
फिल्म की शुरुआत लगभग छह वर्ष पहले एक छोटे और सीमित संसाधनों वाले वेब एनीमेशन प्रोजेक्ट से हुई थी, जिसे “मुस्लिम किड्स टीवी” प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत किया गया था। उसी शुरुआती प्रयास ने आगे चलकर एक पूर्ण लंबाई की थिएटर रिलीज़ एनीमेशन फिल्म का रूप ले लिया। इस पूरी यात्रा को जमीनी स्तर से उठी रचनात्मक पहल और सामुदायिक सहयोग का उदाहरण माना जा रहा है।

‘टाइम हॉपर्स: द सिल्क रोड’ की कहानी चार प्रतिभाशाली बच्चों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो काल्पनिक “अक़्ली अकादमी” के छात्र हैं। एक संयोगवश खोज के दौरान वे टाइम ट्रैवल की शक्ति तक पहुँच जाते हैं और इतिहास की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। उनका मिशन है—सातवीं से तेरहवीं सदी के उस दौर में पहुँचना, जिसे इस्लामी सभ्यता का स्वर्णकाल कहा जाता है, और उन महान वैज्ञानिकों की रक्षा करना जिन्होंने गणित, प्रकाशिकी, खगोलशास्त्र और अन्य विज्ञान क्षेत्रों में बुनियादी योगदान दिया। कहानी में अल-ख्वारिज्मी और इब्न अल-हैथम जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भी शामिल किया गया है। अल-ख्वारिज्मी को बीजगणित (एलजेब्रा) का जनक माना जाता है, जबकि इब्न अल-हैथम को आधुनिक प्रकाशिकी का अग्रदूत कहा जाता है।
फिल्म में बच्चों का सामना एक काल्पनिक खलनायक—समय को मोड़ने की शक्ति रखने वाले एक दुष्ट रसायनज्ञ—से होता है, जो इतिहास की धारा को बदलना चाहता है। रोमांच, खोज और ज्ञान से भरी यह कहानी बच्चों को मनोरंजन के साथ इतिहास और विज्ञान की विरासत से परिचित कराती है।
फिल्म की सह-लेखिका और निर्देशक फ्लोरडेलिज़ा डेरीट का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक रोमांचक कहानी कहना नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक योगदानों को सामने लाना भी है जिन्हें मुख्यधारा के नैरेटिव में अक्सर पर्याप्त जगह नहीं मिलती। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अरब और मुस्लिम वैज्ञानिकों तथा विद्वानों के योगदान ने आधुनिक दुनिया की बुनियाद रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन बच्चों की लोकप्रिय सामग्री में इनका उल्लेख कम दिखाई देता है। फिल्म उसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
निर्माता माइकल माइलो के अनुसार, बच्चों—खासकर मुस्लिम बच्चों—के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे खुद को कहानियों में नायक के रूप में देखें। इससे उनमें आत्मविश्वास और व्यापक समाज से जुड़ाव की भावना मजबूत होती है। उनका कहना है कि जब बच्चे खुद को सकारात्मक भूमिकाओं में देखते हैं, तो वे इतिहास और वर्तमान—दोनों से बेहतर रिश्ता बना पाते हैं।
फिल्म की एक और खासियत इसकी वॉइस कास्ट है। इसमें कई प्रमुख मुस्लिम-अमेरिकी शिक्षाविदों और सामाजिक हस्तियों ने अपनी आवाज़ दी है, जिनमें उमर सुलेमान, डालिया मुजाहिद और उमर रेगन जैसे नाम शामिल हैं। इससे फिल्म को प्रामाणिकता और सामुदायिक जुड़ाव दोनों मिलता है।
विषयवस्तु के स्तर पर फिल्म को परिवार के साथ देखे जाने योग्य बताया गया है। इसमें हल्का रोमांच और खतरे के कुछ दृश्य हैं—जैसे पीछा किया जाना, बच्चों का पकड़ा जाना और बच निकलने की कोशिश—लेकिन इन्हें बच्चों के अनुकूल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का मूल स्वर सकारात्मक, प्रेरक और ज्ञानवर्धक है। इसका लक्ष्य डर या टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि जिज्ञासा और सम्मान जगाना है।
निर्माताओं ने फिल्म को सीधे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर जारी करने के बजाय थिएटर रिलीज़ का रास्ता इसलिए चुना, ताकि यह मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुंचे और इसे एक सामुदायिक या सीमित दायरे की फिल्म मानकर नजरअंदाज न किया जाए। उनका मानना है कि बड़े पर्दे पर उपस्थिति से फिल्म को व्यापक स्वीकार्यता मिलती है और संवाद का दायरा बढ़ता है।
यह पहल ऐसे समय में आई है जब अमेरिका सहित कई समाजों में पहचान, प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक छवि को लेकर बहस जारी है। ऐसे माहौल में बच्चों के लिए ऐसी सामग्री, जो विविध पृष्ठभूमियों को सकारात्मक और रचनात्मक रूप में दिखाए, सामाजिक समझ को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है। फिल्म यह संदेश देती है कि विज्ञान, शिक्षा और रचनात्मकता की विरासत किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा धरोहर है।
फ्लोरडेलिज़ा डेरीट इससे पहले भी दो फिल्में बना चुकी हैं और वर्ष 2016 में उन्होंने बच्चों के लिए “मुस्लिम किड्स टीवी” नामक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया था। उनका फोकस लगातार ऐसी सामग्री विकसित करने पर रहा है जो बच्चों को ज्ञान, पहचान और आत्मविश्वास से जोड़ सके।
कुल मिलाकर, ‘टाइम हॉपर्स: द सिल्क रोड’ केवल एक एनीमेशन फिल्म नहीं, बल्कि इतिहास, विज्ञान और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने वाला रचनात्मक पुल है—जो मनोरंजन के साथ समझ और संवाद की नई संभावनाएं भी खोलता है।

