टीपू सुल्तान पर फिर छिड़ा सियासी महासंग्राम:’मिसाइल मैन’ के तर्क, ओवैसी के तेवर और भाजपा बिफरी
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
भारतीय राजनीति में इतिहास अक्सर वर्तमान की लड़ाई का हथियार बन जाता है। मैसूर के शासक टीपू सुल्तान, जिन्हें दुनिया ‘मैसूर का शेर’ कहती है, एक बार फिर भारतीय सियासत के केंद्र में हैं। विवाद की चिंगारी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के 68वें स्थापना दिवस यानी ‘दारुस्सलाम डे’ के मौके पर हैदराबाद में भड़की, जिसने देखते ही देखते महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक वैचारिक आग लगा दी है।
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प पहलू ‘मिसाइल मैन’ और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का संदर्भ है। एक तरफ भाजपा डॉ. कलाम को अपना आदर्श मानती है, लेकिन जब डॉ. कलाम के विचारों में टीपू सुल्तान की प्रशंसा की बात आती है, तो भगवा खेमे की प्रतिक्रिया पूरी तरह बदल जाती है।
#WATCH | Hyderabad, Telangana | AIMIM chief and MP Asaduddin Owaisi says, "…Tipu Sultan was martyred fighting the British…Tipu did not write love letters to the British, as Veer Savarkar did, begging for forgiveness and promising to do whatever they said. Tipu took up his… pic.twitter.com/qB9OUPtpu9
— ANI (@ANI) February 14, 2026
डॉ. कलाम, टीपू सुल्तान और मिसाइल तकनीक
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ फायर’ (Wings of Fire) में टीपू सुल्तान की सैन्य प्रतिभा का विस्तार से वर्णन किया है। कलाम साहब का मानना था कि टीपू सुल्तान की तोप प्रणाली और रॉकेट तकनीक ही वह आधार थी, जिससे आधुनिक मिसाइल तकनीक का जन्म हुआ। उन्होंने लिखा है कि किस तरह टीपू ने अंग्रेजों के खिलाफ रॉकेटों का इस्तेमाल किया था, जो उस समय दुनिया के लिए एक अजूबा था। डॉ. कलाम के अनुसार, भारत की आज की मिसाइल और रॉकेट टेक्नोलॉजी टीपू के उन्हीं सपनों का विस्तार है।
हैरानी की बात यह है कि जब तक यह बात डॉ. कलाम की किताबों तक सीमित थी, भाजपा को कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन जैसे ही एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस ऐतिहासिक तथ्य को सार्वजनिक मंच से दोहराया, भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों ने इसे ‘वोट बैंक की राजनीति’ करार दे दिया।
AIMIM के नेता @warispathan ने टीपू सुल्तान तस्वीर विवाद पर कहा "आरएसएस और बीजेपी वाले उन सभी का विरोध करेंगे जिन्होंने जंग ए आज़ादी में हिस्सा लिया। यह मुसलमानों से नफरत क्यों करते हैं? क्योंकि हम वह लोग हैं जिन्होंने जंग ए आज़ादी में अपनी जानें गवाई हैं.. pic.twitter.com/IQu65iXsev
— Shaik Hussam (@shaik_hussam) February 14, 2026
ओवैसी का ‘दारुस्सलाम डे’ पर तीखा प्रहार
हैदराबाद के दारुस्सलाम में पार्टी का झंडा फहराते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने इतिहास के पन्नों से सावरकर और टीपू सुल्तान की तुलना कर दी। ओवैसी ने कहा, “टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। उन्होंने अंग्रेजों को ‘लव लेटर’ (माफीनामे) नहीं लिखे, जैसा कि वीर सावरकर ने किया था। सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगी और उनके कहे अनुसार काम करने का वादा किया, लेकिन टीपू ने अपनी तलवार उठाई और वतन की आजादी के लिए जान दे दी।”
ओवैसी ने महात्मा गांधी का भी हवाला दिया और कहा कि गांधी जी ने अपनी पत्रिका ‘यंग इंडिया’ में टीपू सुल्तान को हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बताया था। ओवैसी का तर्क सीधा था—अगर डॉ. कलाम और महात्मा गांधी टीपू का सम्मान कर सकते हैं, तो आज की पीढ़ी को उनसे नफरत क्यों सिखाई जा रही है?
#WATCH | दिल्ली: भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान पर कहा, "महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष का दिमाग खराब हो चुका है, वो पागल हो चुके हैं और महाराष्ट्र कांग्रेस, कांग्रेस पार्टी वोट बैंक की नीति में निचले स्तर पर आ चुकी है। छत्रपति… pic.twitter.com/1NJdI8xTzd
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 14, 2026
शिवाजी महाराज से तुलना: महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल
विवाद ने तब और उग्र रूप ले लिया जब महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। शिवाजी महाराज, जो महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए आराध्य और गौरव का प्रतीक हैं, उनकी तुलना टीपू से होने पर भाजपा ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष का दिमाग खराब हो चुका है। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे लिए देवता के समान हैं, उनकी तुलना टीपू सुल्तान से करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस एक खास वोट बैंक के लिए किस निचले स्तर तक जा सकती है।” पूनावाला ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मांग की कि सपकाल को तुरंत पार्टी से बाहर किया जाए।
वारिस पठान का पलटवार: “नफरत क्यों?”
एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने इस विवाद पर भाजपा और आरएसएस को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, “भाजपा और संघ उन सभी का विरोध करते हैं जिन्होंने जंग-ए-आजादी में हिस्सा लिया। ये मुसलमानों से नफरत क्यों करते हैं? शायद इसलिए क्योंकि हम वो लोग हैं जिन्होंने इस देश की आजादी के लिए अपनी जानें कुर्बान की हैं।” पठान ने स्पष्ट किया कि टीपू सुल्तान का इतिहास भारतीय वीरता का हिस्सा है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।
ओवैसी के गुर्गों का एलान ए दार-उल-इस्लाम, वह भी छत्रपति शिवाजी महाराज की पावन भूमि परhttps://t.co/SO8UiFJIzs
— Dr. Suresh Chavhanke “Sudarshan News” (@SureshChavhanke) February 14, 2026
मीडिया की भूमिका और नफरत का बाजार
इस विवाद को हवा देने में सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाणके जैसे पत्रकारों ने इस मुद्दे पर विशेष कार्यक्रम बनाकर इसे ‘हिंदू अस्मिता’ बनाम ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का रंग देने की कोशिश की। ओवैसी के भाषण और कांग्रेस नेताओं के बयानों को काट-छाँट कर पेश किया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
समय से पहले क्यों मनाया गया ‘दारुस्सलाम डे’?
AIMIM का स्थापना दिवस आमतौर पर 2 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन इस बार पवित्र रमजान का महीना शुरू होने की संभावना (19 फरवरी से) को देखते हुए इसे 14 फरवरी को ही आयोजित किया गया। इस 68वें स्थापना दिवस पर ओवैसी ने न केवल पार्टी की मजबूती का प्रदर्शन किया, बल्कि पूर्व सांसद इम्तियाज जलील को सम्मानित कर महाराष्ट्र में अपनी सक्रियता का संकेत भी दिया।
निष्कर्ष टीपू सुल्तान पर छिड़ा यह ताजा विवाद केवल इतिहास की व्याख्या नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों और ध्रुवीकरण की राजनीति का एक हिस्सा है। डॉ. कलाम की वैज्ञानिक दृष्टि और गांधी जी की सामाजिक सोच में जो टीपू सुल्तान एक नायक थे, आज की राजनीति उन्हें एक ‘विवादास्पद चरित्र’ बनाने पर तुली है। सवाल यह है कि क्या हम अपने महापुरुषों को केवल राजनीतिक चश्मे से देखेंगे, या डॉ. कलाम की तरह उनके योगदान को स्वीकार करने का साहस दिखाएंगे?

