मुंबई के अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में डॉ. वाला जमाल का सम्मान, उर्दू अदब को नई ऊँचाई
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, मुंबई
महानगर के प्रतिष्ठित और व्यापक रूप से प्रसारित साप्ताहिक अख़बार वीकली अवामी राय के रजत जयंती समारोह और अंतरराष्ट्रीय मुशायरे का आयोजन इस्लाम जिमखाना, मुंबई में अत्यंत गरिमा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। साहित्य और संस्कृति से सराबोर इस विशेष संध्या की अध्यक्षता प्रख्यात शायर, लेखक और समाजसेवी डॉ. नूर अमरोहवी ने की। कार्यक्रम में देश-विदेश के नामचीन शायरों, साहित्यकारों और उर्दू प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

डॉ. नूर अमरोहवी की विशिष्ट उपस्थिति
डॉ. नूर अमरोहवी विशेष आग्रह पर केवल दो दिनों के लिए मुंबई पधारे। साहित्यिक जगत में यह सर्वविदित है कि वे बहुत सीमित मुशायरों में शिरकत करते हैं। इसके बावजूद उर्दू अदब, संस्कृति और विशेषकर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में उनके योगदान को व्यापक मान्यता प्राप्त है। उन्हें अमेरिका में आधुनिक शैली के मुशायरों का अग्रदूत माना जाता है। उनकी संस्थागत पहल अल-नूर इंटरनेशनल के बैनर तले पिछले दो दशकों से आयोजित “एन इवनिंग इन द नेम ऑफ पीस एंड यूनिटी” कार्यक्रमों ने अंतरधार्मिक संवाद और सद्भाव के संदेश को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है।

‘डॉ. नूर अमरोहवी साहित्यिक सम्मान’ की स्थापना
उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति की अंतरराष्ट्रीय सेवा को मान्यता देने के उद्देश्य से वीकली अवामी राय ने ‘डॉ. नूर अमरोहवी साहित्यिक सम्मान’ की स्थापना की है। यह सम्मान प्रतिवर्ष उन विशिष्ट हस्तियों को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने विदेशों में उर्दू की उन्नति और प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वर्ष 2026 के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान मिस्र मूल की सुप्रसिद्ध अरब-उर्दू शायरा डॉ. वाला जमाल को प्रदान किया गया।

डॉ. वाला जमाल: उर्दू की वैश्विक प्रतिनिधि
डॉ. वाला जमाल, जो मूलतः मिस्र से हैं, शम्स विश्वविद्यालय (काहिरा) में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की लेखिका हैं। समकालीन उर्दू शायरी में उनका एक विशिष्ट स्थान है। उनकी नफ़ासत-ए-बयान, लहजे की शालीनता और उर्दू पर अद्भुत पकड़ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। वे विश्वभर के मुशायरों में नियमित रूप से आमंत्रित होती रही हैं। उनके साहित्यिक और अकादमिक योगदान को देखते हुए वीकली अवामी राय के प्रबंधन ने सर्वसम्मति से उन्हें इस वर्ष के सम्मान के लिए चुना।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. वाला जमाल ने भावुक शब्दों में कहा,
“मुझे दुनिया के कई हिस्सों से सम्मान मिले हैं, लेकिन ‘डॉ. नूर अमरोहवी साहित्यिक सम्मान’ पाकर जो खुशी मिली है, वह सबसे अलग और गहरी है। डॉ. नूर अमरोहवी का नाम अदबी हलकों में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल शायर ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी सामुदायिक नेता और उच्च नैतिक मूल्यों वाले व्यक्तित्व हैं। लंबे समय से मेरी इच्छा थी कि मैं उनके साथ किसी मुशायरे के मंच पर बैठूं—आज वह तमन्ना भी पूरी हो गई।”

उद्देश्यपूर्ण मुशायरों का संदेश
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. नूर अमरोहवी ने मुशायरों को उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक मूल्यों से जोड़े रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजनों का लक्ष्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में शांति, एकता और पारस्परिक सम्मान का संदेश फैलाना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिका में वे पिछले बीस वर्षों से विभिन्न धर्मों—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि—के लोगों को साथ लाकर संवाद और सद्भाव का वातावरण निर्मित करते रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई में उनकी उपस्थिति केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि यहां के लोगों के स्नेह और आयोजकों के आग्रह का सम्मान करने के लिए है। उन्होंने विशेष रूप से आयोजक डॉ. अलाउद्दीन शेख के दीर्घकालिक और निस्वार्थ सेवाभाव की सराहना की, जिन्होंने उर्दू भाषा और उसके चाहने वालों के लिए निरंतर कार्य किया है।
अंतरराष्ट्रीय मुशायरे की रंगत
मुशायरे में विभिन्न देशों से आए शायरों ने अपनी रचनाओं से शाम को यादगार बना दिया। श्रोताओं की बड़ी संख्या ने उर्दू शायरी की इस अंतरराष्ट्रीय महफ़िल का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम के दौरान उर्दू अदब की विविधता और वैश्विक स्वरूप की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण डॉ. नूर अमरोहवी को मुशायरे के मध्य में ही प्रस्थान करना पड़ा, किंतु उनके संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली संबोधन ने कार्यक्रम को विशिष्ट आयाम प्रदान किया।

शानदार मेज़बानी और समापन
कार्यक्रम के अंत में वीकली अवामी राय और आयोजक डॉ. अलाउद्दीन शेख की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों के सम्मान में भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया गया। इस सुस्वादु और गरिमामय आतिथ्य ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।
रजत जयंती के इस आयोजन ने न केवल वीकली अवामी राय की साहित्यिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि उर्दू भाषा की सुगंध सीमाओं से परे है। डॉ. वाला जमाल को प्रदान किया गया यह सम्मान उर्दू की वैश्विक यात्रा का प्रतीक है—जहां शब्द, संस्कृति और मानवीय मूल्य एक साथ मिलकर दुनिया को जोड़ने का कार्य करते हैं।

