हम खुश नहीं हैं : ईरान परमाणु वार्ता पर ट्रंप का सख्त रुख, सैन्य विकल्प से इनकार नहीं
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जेनेवा में तीसरे दौर की बातचीत बेनतीजा; मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा, कूटनीति बनाम टकराव की बहस तेज

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वॉशिंगटन डीसी।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी परमाणु वार्ता पर असंतोष जताते हुए कहा कि “हम बातचीत के तरीके से खुश नहीं हैं” और दोहराया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। व्हाइट हाउस से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे हमें वह देने को तैयार नहीं हैं जिसकी हमें ज़रूरत है… हम खुश नहीं हैं। आगे और बातचीत होगी, देखते हैं क्या होता है।”
जेनेवा में गतिरोध, विएना में तकनीकी बैठक
ईरान–अमेरिका के बीच तीसरे दौर की वार्ता जेनेवा में बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हुई। अगले सप्ताह विएना में तकनीकी स्तर की चर्चा प्रस्तावित है। ईरान का कहना है कि वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार रखता है और परमाणु हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता है।
ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बातचीत के बाद “अच्छी प्रगति” का दावा किया, लेकिन किसी ठोस कदम का खुलासा नहीं किया। तेहरान लंबे समय से प्रतिबंधों में राहत को प्राथमिक शर्त बताता रहा है।
“सैन्य विकल्प पसंद नहीं, पर जोखिम हमेशा”
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते, मगर “ज़रूरत पड़ने पर” विकल्प खुला है। “जब युद्ध होता है तो हर चीज़ का जोखिम होता है—अच्छा और बुरा दोनों,” उन्होंने कहा। शासन-परिवर्तन (रेजीम चेंज) की संभावना पर ट्रंप का जवाब था, “कोई नहीं जानता… बेहतर होगा बिना बल के हो, पर कभी-कभी करना पड़ता है। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है, मैं उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहूंगा।”
क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा, दूतावास अलर्ट
मध्य-पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की तैनाती बढ़ी है—एक एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से मौजूद है, दूसरा रास्ते में बताया जा रहा है। इज़राइल में अमेरिकी दूतावास ने गैर-आवश्यक कर्मियों और परिवारों के लिए “ऑथराइज़्ड डिपार्चर” की अनुमति दी है। राजदूत Mike Huckabee ने इच्छुक कर्मियों को शीघ्र प्रस्थान की सलाह दी।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के अगले सप्ताह इज़राइल दौरे की घोषणा भी हुई है, जहां वे ईरान, लेबनान और गाज़ा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu लंबे समय से ईरान पर कड़ा रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और निरीक्षण का सवाल
संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी तंत्र की एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले वर्ष 12-दिवसीय युद्ध के बाद बमबारी से प्रभावित संवेदनशील स्थलों तक निरीक्षकों को पहुंच नहीं मिली है, इसलिए ईरान के संवर्धन रोकने के दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने दोनों पक्षों से कूटनीतिक रास्ते पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को “चिंताजनक” बताया।
हवाई सेवाएं निलंबित, देशों की एडवाइजरी
तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट से कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत सहित कई देशों ने नागरिकों को क्षेत्र में यात्रा से बचने या सावधानी बरतने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने ईरान से अपने कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से हटाया है।
मध्यस्थ की भूमिका: ओमान के विदेश मंत्री से मुलाकात
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की वॉशिंगटन में ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात तय बताई गई है। ओमान वार्ता का प्रमुख मध्यस्थ रहा है। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार की चर्चा में कुछ “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई औपचारिक सहमति सामने नहीं आई।
ईरान की चेतावनी: हमले का जवाब देंगे
तेहरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की तो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है, जिनमें मित्र अरब देशों में स्थित बेस भी शामिल हैं। इस बयानबाज़ी ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
क्यूबा पर भी संकेत
ट्रंप ने एक अलग टिप्पणी में कहा कि क्यूबा सरकार आर्थिक संकट में है और अमेरिका से बातचीत कर रही है। उन्होंने “फ्रेंडली टेकओवर” जैसी संभावना का भी उल्लेख किया, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया।
आगे की राह: कूटनीति बनाम टकराव
जेनेवा में गतिरोध और क्षेत्र में सैन्य तैयारियों के बीच अब नजरें विएना की तकनीकी वार्ता और वॉशिंगटन–तेहरान के अगले दौर पर हैं। यदि प्रतिबंधों में राहत और संवर्धन की सीमाओं पर कोई मध्य-मार्ग निकलता है तो तनाव कम हो सकता है। अन्यथा, सैन्य विकल्प की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।
कुल मिलाकर, संदेश स्पष्ट है—अमेरिका ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को “रेड लाइन” मानता है, जबकि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु अधिकार पर अडिग है। आने वाले दिनों में कूटनीति की दिशा तय करेगी कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ता है या टकराव की ओर।

