केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फाँसी की सज़ा, 10 अहम तथ्य
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
यमन के युद्धग्रस्त, हूती-नियंत्रित क्षेत्र में कैद केरल की नर्स निमिषा प्रिया हत्या के आरोप में दोषसिद्ध हैं और मौत की सज़ा का सामना कर रही हैं। एक बेहतर भविष्य की तलाश में 2008 में यमन गईं निमिषा की कहानी महत्वाकांक्षा, उत्पीड़न से बचने की जद्दोजहद, और अंततः एक त्रासदीपूर्ण मोड़ का मिश्रण है। यहाँ इस संवेदनशील मामले को समझने के लिए 10 प्रमुख बिंदु प्रस्तुत हैं:
1. यमन में हत्या का दोषसिद्ध मामला
पलक्कड़ (केरल) की नर्स निमिषा प्रिया को 2017 में अपने यमनी बिज़नेस पार्टनर талाल अब्दो महदी की हत्या का दोषी पाया गया। वह वर्तमान में सना (हूती नियंत्रण क्षेत्र) की जेल में बंद हैं और यमन के कानून के तहत मृत्युदंड का सामना कर रही हैं।
2. सज़ा और अपील की प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद मुक़दमा चला; 2018 में दोषसिद्धि और 2020 में ट्रायल कोर्ट से मौत की सज़ा। उनकी अपील नवंबर 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने खारिज कर दी। 2024 में राष्ट्रपति अनुमोदन के बाद मृत्युदंड पर मुहर लगी। फाँसी की तारीख मूलतः 16 जुलाई 2025 तय थी।
3. अपराध का कथित क्रम
निमिषा का कहना है कि महदी ने उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया था और उन्हें लगातार उत्पीड़न झेलना पड़ा। देश से निकलने के प्रयास में उन्होंने कथित तौर पर महदी को सिडेटिव इंजेक्शन दिया ताकि पासपोर्ट वापस ले सकें—परंतु वह घातक सिद्ध हुआ। घबराकर उन्होंने शरीर के टुकड़े किए और उन्हें पानी की टंकी में छिपाने का प्रयास किया। वे सऊदी-यमन सीमा पर पकड़ी गईं।
4. पीड़ित परिवार की क़िसास (प्रतिशोध) की मांग
यमन में शरीयत आधारित क़ानूनी प्रावधानों के तहत पीड़ित परिवार क़िसास (जीवन के बदले जीवन) की मांग कर सकता है। 14 जुलाई को तलाल के भाई अब्देल फ़तह महदी ने बीबीसी अरबी से कहा कि वे खूनबहा स्वीकार नहीं करेंगे और फाँसी पर अड़े हैं; उन्होंने भारतीय मीडिया द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न संबंधी दावों को “गढ़ा हुआ” बताया।
5. डिया (खूनबहा) प्रस्ताव अस्वीकार
निमिषा का जीवन बचाने के प्रयास में समर्थकों ने लगभग 10 लाख डॉलर (₹8.5 करोड़) जुटाए, जिसे डिया के रूप में परिवार को पेश किया गया। लेकिन महदी परिवार ने सम्मान का हवाला देते हुए क्षमा से इंकार कर दिया।
6. फिलहाल फाँसी टली
16 जुलाई 2025 की प्रस्तावित फाँसी अस्थायी तौर पर स्थगित कर दी गई है। यह राहत नए मध्यस्थ प्रयासों, अंतरराष्ट्रीय अपीलों और धार्मिक हस्तक्षेपों के पुनरारंभ के बीच मिली है।
7. ग्रैंड मुफ्ती का शांति-प्रयास
भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख कंथापुरम ए.पी. अबूबक्कर मुसलियार ने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने धार्मिक नेटवर्क के ज़रिए उन्होंने यमन के सूफ़ी विद्वानों—जिनमें महदी परिवार से निकटता रखने वाले भी शामिल हैं—से संपर्क साधा, जिससे संवाद की एक दुर्लभ संभावना बनी।
8. भारत की सीमित कूटनीतिक पहुँच
सना पर हूती नियंत्रण होने से भारत की औपचारिक राजनयिक पहुँच सीमित है। इसलिए मामला मुख्यतः अनौपचारिक चैनलों, बैकडोर संप्रेषण और धार्मिक मध्यस्थों पर टिका है। 14 जुलाई को भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार लगभग हर संभव प्रयास कर चुकी है।
9. परिवार पर भावनात्मक और आर्थिक बोझ
निमिषा की माँ 2023 में यमन पहुँचीं ताकि क्षमा की गुहार कर सकें। परिवार पर ₹60 लाख से अधिक का ऋण चढ़ गया है—क़ानूनी, यात्रा और मध्यस्थता खर्चों के कारण। पति टोमी थॉमस लगातार सार्वजनिक समर्थन और दया याचना की अपील कर रहे हैं।
10. उम्मीद की पतली डोर
कानूनी रास्ते लगभग बंद हैं, लेकिन पीड़ित परिवार द्वारा क्षमा अभी भी निमिषा की जान बचा सकती है। डिया अस्वीकार होने के बाद परिवार की चुप्पी ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। धार्मिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और परिजनों के प्रयास जारी हैं—पर समय निकलता जा रहा है।
पृष्ठभूमि संक्षेप
- 2008: बेहतर रोज़गार के लिए निमिषा यमन गईं; पहले अस्पतालों में काम, फिर क्लिनिक शुरू किया।
- 2017: महदी की मौत; हत्या का मामला।
- 2020: मृत्युदंड।
- 2023-24: उच्चस्तरीय अपीलें खारिज; राष्ट्रपति अनुमोदन।
- 16 जुलाई 2025: प्रस्तावित फाँसी — फिलहाल स्थगित।

