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ईरान पर हमले के बाद अमेरिका बैकफुट पर? ट्रंप की अपील, खाड़ी में अलर्ट और प्रवासी भारतीयों में दहशत

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वॉशिंगटन डीसी

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ईरान के साथ सीधे टकराव की राह चुनने के बाद खुद को महाशक्ति बताने वाला अमेरिका अब अभूतपूर्व सुरक्षा संकट से जूझता दिख रहा है। ईरानी पलटवार के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल सहित मध्यपूर्व के एक दर्जन से अधिक देशों में रह रहे अपने नागरिकों को “तुरंत व्यावसायिक उड़ानों से निकल जाने” की सख्त सलाह जारी कर दी है।

अमेरिकी विदेश विभाग की सहायक सचिव (कांसुलर मामलों) मोरा नामदार ने बयान जारी कर कहा कि बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन में मौजूद अमेरिकी नागरिक गंभीर सुरक्षा जोखिम को देखते हुए तुरंत देश छोड़ें।

ट्रंप का दोहरा संदेश: हमला भी, बातचीत भी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक ओर ईरान पर सैन्य कार्रवाई को “आवश्यक” बताते हुए उसका बचाव किया, वहीं दूसरी ओर दावा किया कि ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा, “वे बात करना चाहते हैं, और हम बात करेंगे।”

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने “ईरानी देशभक्तों” से मौजूदा हालात का फायदा उठाकर शासन परिवर्तन की अपील भी की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद सत्ता समीकरण अनिश्चित बने हुए हैं।

ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों को चेतावनी देते हुए कहा कि हथियार डाल दें, वरना “निश्चित परिणाम” भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किया गया सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है।

इजरायल-लेबनान मोर्चा भी गरम

इसी बीच इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हवाई हमले में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के शीर्ष कमांडर अदहम अल-उस्मान को मार गिराने का दावा किया है। इजरायल के अनुसार, वह लेबनान सेक्टर का प्रमुख था और उसने सैकड़ों हमलों की योजना बनाई थी।

ईरान समर्थित गुटों द्वारा इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद क्षेत्रीय युद्ध का दायरा और बढ़ गया है।

खाड़ी में सायरन, प्रवासी मज़दूरों में डर

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ईरानी हमलों के बाद खाड़ी देशों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी है। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेलंगाना के करीमनगर, जगतियाल और सिरसिला जिलों के हजारों प्रवासी मज़दूरों में भारी चिंता व्याप्त है।

मिसाइल अलर्ट और सुरक्षा बंदोबस्त के चलते कई इलाकों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रवासी मज़दूर घरों के भीतर रहने को मजबूर हैं। एयरपोर्ट संचालन में बाधा और उड़ानों के रद्द होने से जो लोग भारत लौटना चाहते थे, वे भी फंसे हुए हैं।

तेलंगाना के गांवों में बेचैनी

तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में परिवार अपने प्रियजनों की सलामती को लेकर दिन-रात चिंतित हैं। कई प्रवासियों ने वीडियो कॉल और फोन के जरिए परिवारों को भरोसा दिलाया है कि वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन अनिश्चितता का माहौल कायम है।

परिवारों की रोज़ी-रोटी खाड़ी की नौकरियों पर निर्भर है। ऐसे में युद्ध का खतरा केवल जान का जोखिम नहीं, बल्कि आर्थिक संकट का भी संकेत है।

स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है।

क्या अमेरिका घबराया हुआ है?

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अपने नागरिकों को तत्काल प्रस्थान की सलाह देना इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन संभावित बड़े हमलों की आशंका से इनकार नहीं कर पा रहा।

CNN ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि अगले 24 घंटों में ईरान में हमलों की “बड़ी वृद्धि” की तैयारी की जा रही है। इसका अर्थ है कि सैन्य टकराव अभी और तेज हो सकता है।

खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि पेंटागन ने आधिकारिक रूप से भारी नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सुरक्षा सतर्कता का स्तर उच्चतम पर पहुंचा दिया गया है।

सऊदी अधिकारी का बयान और बदलते समीकरण

एक सऊदी अधिकारी के बयान ने इस संकट को और पेचीदा बना दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि उनका देश सीधे युद्ध में कूदने के बजाय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और इजरायल की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

यह बयान उस समय आया है जब खाड़ी देश सार्वजनिक रूप से संयम और स्थिरता की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है।

शासन परिवर्तन की बहस

ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu दोनों ने दावा किया है कि उनका उद्देश्य ईरानी जनता के लिए “स्वतंत्रता की परिस्थितियां” बनाना है।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि बाहरी सैन्य हस्तक्षेप से आंतरिक अस्थिरता बढ़ सकती है और क्षेत्र में लंबा संघर्ष छिड़ सकता है।

ईरान में सर्वोच्च नेतृत्व के बाद उत्तराधिकारी का नाम अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में राजनीतिक अनिश्चितता और गहरी हो गई है।

खाड़ी और इजरायल में फंसे अमेरिकी

अमेरिकी विदेश विभाग ने गैर-आपातकालीन कर्मियों और उनके परिवारों को इजरायल छोड़ने की अनुमति पहले ही दे दी थी। अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कथित तौर पर दूतावास स्टाफ से कहा कि यदि वे जाना चाहते हैं तो “आज ही चले जाएं।”

यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि स्थिति सामान्य नहीं है। अमेरिका ने अपने नागरिकों से व्यावसायिक साधनों से यात्रा करने को कहा है, जो यह दर्शाता है कि अभी सैन्य निकासी की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जोखिम वास्तविक है।

व्यापक असर: अर्थव्यवस्था और तेल बाजार

खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल आपूर्ति और कीमतों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर भी होगा।

तेलंगाना जैसे राज्यों के प्रवासी परिवारों की आर्थिक सुरक्षा भी इसी पर निर्भर करती है। यदि बड़े पैमाने पर प्रवासियों की वापसी होती है, तो घरेलू रोजगार बाजार पर भी दबाव बढ़ सकता है।

आगे क्या?

मौजूदा हालात में तीन संभावनाएं सामने हैं:

  1. सीमित सैन्य टकराव और शीघ्र वार्ता – यदि बातचीत शुरू होती है।
  2. लंबा क्षेत्रीय युद्ध – जिसमें लेबनान, सीरिया और खाड़ी के अन्य देश भी सक्रिय रूप से शामिल हो सकते हैं।
  3. ईरान में आंतरिक राजनीतिक परिवर्तन – जिसकी दिशा अभी अस्पष्ट है।

फिलहाल, मध्यपूर्व बारूद के ढेर पर बैठा है। अमेरिका की चेतावनी, ट्रंप के बयान, इजरायली हमले और ईरानी पलटवार—इन सबने मिलकर क्षेत्र को अस्थिरता के नए दौर में धकेल दिया है।

खाड़ी में रह रहे भारतीय और अमेरिकी नागरिकों के लिए यह केवल भू-राजनीतिक खबर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुरक्षा और भविष्य की चिंता का सवाल बन चुका है। आने वाले 48 घंटे निर्णायक साबित हो सकते हैं।