ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध का विस्तार: मिलिशिया की एंट्री, तेल बाजार में उछाल और परमाणु जोखिम के बीच बहु-मोर्चीय संघर्ष
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स्टीफन एन आर, सीनियर एसोसिएट एडिटर, गल्फ न्यूज़ (विश्लेषणात्मक रिपोर्ट)


ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब खुलकर क्षेत्रीय युद्ध में बदलता दिख रहा है। सोमवार को हालात ने नाटकीय मोड़ लिया, जब ईरान समर्थित मिलिशियाओं और लेबनान के Hezbollah ने भी मोर्चा संभाल लिया। मिसाइल और ड्रोन हमले इज़राइल के साथ-साथ कई अरब देशों तक फैल गए। तेल टैंकरों पर हमले, परमाणु स्थलों पर कथित निशाना साधने और हवाई क्षेत्र बंद होने से संकट बहु-मोर्चीय हो चुका है।
युद्ध का दायरा कैसे बढ़ा?
ईरान ने अमेरिकी-इज़राइली हमलों के जवाब में इज़राइल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसी दौरान कुवैत में तीव्र सैन्य गतिविधियों के बीच गलती से अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान मार गिराए गए। सभी छह क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, क्योंकि Strait of Hormuz के पास टैंकरों पर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक व्यवधानों की खबरें आईं।
कतर ने गिराए ईरानी बमवर्षक
खाड़ी क्षेत्र में पहली बार किसी देश ने सीधे ईरानी विमानों को मार गिराने की पुष्टि की। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायुसेना ने दो सुखोई Su-24 बमवर्षकों को गिराया। इसके साथ ही कतर ने अस्थायी रूप से एलएनजी उत्पादन रोक दिया। यह संकेत है कि संघर्ष अब केवल परोक्ष नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का रूप ले चुका है।
ट्रंप के ‘चार स्पष्ट लक्ष्य’
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए युद्ध के चार स्पष्ट उद्देश्य गिनाए:
- ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करना
- उसकी नौसेना को समाप्त करना
- यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके
- ईरानी शासन को बाहरी ‘आतंकी नेटवर्क’ को समर्थन देने से रोकना
ट्रंप ने इसे “आखिरी और सर्वश्रेष्ठ मौका” बताया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि “बड़ी लहर” अभी आना बाकी है और जमीनी सैनिक भेजने से भी इनकार नहीं किया।
ईरानी जवाब: लंबी जंग के लिए तैयार
तेहरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख अली लारीजानी ने कहा कि ईरान लंबी जंग के लिए तैयार है। “हम अमेरिका की तरह अल्पकालिक सोच नहीं रखते,” उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा।
इस बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय को नष्ट कर दिया है।
लेबनान में तबाही, हिज़्बुल्लाह का जवाब
इज़राइली हवाई हमलों में लेबनान में कम से कम 52 लोगों की मौत और 150 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है। 28,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
इज़राइली रक्षा बल (IDF) ने दावा किया कि बेरूत में हिज़्बुल्लाह के खुफिया प्रमुख हुसैन मकलेद को मार गिराया गया। इसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल पर रॉकेट और ड्रोन दागे।
इज़राइल ने 1 लाख से अधिक रिजर्व सैनिकों को बुला लिया है और “लंबे युद्ध” की चेतावनी दी है।
तेल, टैंकर और रिफाइनरी पर हमले
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सहयोगी तेल टैंकर “ATHE NOVA” पर ड्रोन से हमला किया। जहाज में आग लग गई।
ओमान की खाड़ी में मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले टैंकर पर ड्रोन बोट से हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हुई।
सऊदी अरब की रस तनूरा रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद अस्थायी बंदी की घोषणा की गई। यह संयंत्र प्रतिदिन पांच लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का प्रसंस्करण करता है।
यूएई में अबू धाबी की वायु रक्षा प्रणाली ने ड्रोन को रोका, जबकि जॉर्डन ने एहतियातन रात में हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से बंद कर दिया।
परमाणु स्थलों पर खतरा
ईरान ने दावा किया कि उसके नतांज संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया गया, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
International Atomic Energy Agency (IAEA) ने कहा कि अब तक किसी परमाणु स्थल को बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं है, लेकिन संचार व्यवधान के कारण निगरानी बाधित है। यह स्थिति परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी पक्षों से अस्पतालों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन
ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के विरोध में पाकिस्तान के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए। कम से कम 23 लोगों की मौत की खबर है। कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राजनयिक परिसरों की ओर मार्च किया, जहां पुलिस से झड़पें हुईं।
कुवैत में दूतावास पर हमला
कुवैत में अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर आग और धुआं उठने की खबर आई, जिसे ईरानी हमले से जोड़ा जा रहा है। इससे पहले वाशिंगटन ने अमेरिकियों को “शेल्टर इन प्लेस” की सलाह दी थी।
गोलिस्तान पैलेस को नुकसान
तेहरान स्थित यूनेस्को सूचीबद्ध Golestan Palace को भी धमाकों से नुकसान पहुंचा है। खिड़कियां, दरवाजे और शीशे टूटने की खबर है। यह सांस्कृतिक विरासत पर युद्ध के प्रभाव को दर्शाता है।
यूरोप और वैश्विक प्रतिक्रिया
जर्मनी ने सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है, जबकि रूस ने कहा कि वह ईरान और खाड़ी देशों के संपर्क में है। हजारों यूरोपीय पर्यटक हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण फंसे हुए हैं। जर्मनी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सैन्य निकासी संभव नहीं है।
तुर्की ने अस्थायी रूप से ईरानी पर्यटकों के लिए अल्पकालिक सीमा पार आवाजाही रोक दी है।
मीडिया और संचार बाधित
तेहरान के कुछ हिस्सों में राज्य टीवी ट्रांसमीटर ठप पड़ गए हैं। इंटरनेट सेवाएं व्यापक रूप से बाधित हैं। इससे स्वतंत्र जानकारी का प्रवाह रुक गया है और अफवाहों का खतरा बढ़ गया है।
मौत का बढ़ता आंकड़ा
ईरान के रेड क्रिसेंट के अनुसार अब तक कम से कम 555 लोगों की मौत हो चुकी है और 130 से अधिक शहर प्रभावित हुए हैं। इज़राइल में 11 और लेबनान में 31 मौतों की पुष्टि हुई है।
बहु-मोर्चीय युद्ध का खतरा
यह संघर्ष अब केवल अमेरिका-ईरान या इज़राइल-ईरान तक सीमित नहीं रहा। हिज़्बुल्लाह, इराक और सीरिया की शिया मिलिशिया, और यमन के हौथी जैसे समूह सक्रिय हैं। इससे मध्यपूर्व में एक व्यापक, बहु-स्तरीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
यदि जमीनी सैनिकों की तैनाती होती है, तो यह संघर्ष और गहरा सकता है।
निष्कर्ष: निर्णायक हफ्ते
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अभियान चार सप्ताह तक चल सकता है। लेकिन इतिहास बताता है कि मध्यपूर्व के युद्ध शायद ही तय समयसीमा में सिमटते हैं।
ऊर्जा बाजार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता—सब दांव पर लगे हैं।
अब सवाल यह नहीं कि युद्ध शुरू हुआ या नहीं, बल्कि यह है कि इसे सीमित रखा जा सकेगा या नहीं। आने वाले दिन तय करेंगे कि क्या कूटनीति आखिरी क्षण में रास्ता निकालेगी, या मध्यपूर्व एक लंबे, भीषण और अनिश्चित संघर्ष में डूब जाएगा।

