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ईरान युद्ध चौथे दिन और भड़का, दुबई स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला, तेहरान और बेरूत में भीषण बमबारी

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तेहरान।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध चौथे दिन और खतरनाक हो गया है। अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान और लेबनान पर लगातार हमले जारी हैं। इसके जवाब में ईरान भी क्षेत्र में अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों को निशाना बना रहा है। ताजा घटनाक्रम में दुबई स्थित अमेरिकी दूतावास के पास हमले की खबर सामने आई है। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह के आसपास भी धमाकों की सूचना मिली है।

तेहरान, बेरूत और अन्य शहरों में रात भर धमाके सुनाई देते रहे। रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों में अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

तेहरान में लगातार हमले

ईरान की राजधानी तेहरान पर अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त बमबारी जारी है। कई सैन्य ठिकानों के साथ सरकारी संस्थानों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार क़ोम शहर में उस इमारत पर भी हमला किया गया जहां विशेषज्ञों की सभा स्थित है। यही संस्था ईरान के सर्वोच्च नेता के चयन की जिम्मेदारी संभालती है।

हमलों के बाद शहर के कई इलाकों से धुएं के गुबार उठते देखे गए। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार कई इमारतों को भारी नुकसान हुआ है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

इन हमलों के जवाब में ईरान ने चौथी रात भी इज़रायल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार दुबई स्थित अमेरिकी दूतावास के पास विस्फोट हुआ। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह के आसपास भी हमले की सूचना है।

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र के आर्थिक और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाएगा।

कतर में अमेरिकी एयरबेस पर हमला

कतर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। इनमें से एक मिसाइल को कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया। दूसरी मिसाइल अल उदैद एयरबेस के इलाके में गिरी।

अल उदैद एयरबेस मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है। यहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। फिलहाल किसी के घायल होने की खबर नहीं है लेकिन नुकसान का आकलन अभी जारी है।

सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकीं

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अल खार्ज इलाके के ऊपर दो क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। अधिकारियों के अनुसार दोनों मिसाइलें देश की सीमा में घुसते ही नष्ट कर दी गईं।

यह घटना दिखाती है कि संघर्ष अब पूरे खाड़ी क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।

बेरूत में होटल पर हमला

लेबनान की राजधानी बेरूत के पास भीषण हमला हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार हाजमियेह इलाके में स्थित एक होटल को निशाना बनाया गया। यह हमला बिना किसी चेतावनी के किया गया जिससे वहां अफरा तफरी मच गई।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। इससे पहले अरामौन और सादियात इलाके में भी आवासीय इमारतों पर हमले हुए थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत और आठ लोग घायल हुए हैं।

पूर्वी शहर बालबेक में भी एक आवासीय इमारत पर हमला हुआ जिसमें चार लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए।

इज़रायल में अलर्ट

इज़रायली सेना ने कहा है कि ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं। नागरिकों से सुरक्षित आश्रयों में जाने और वहीं रहने को कहा गया है।

सेना ने चेतावनी दी है कि जब तक आधिकारिक निर्देश न मिलें लोग सुरक्षित स्थानों से बाहर न निकलें।

होरमुज जलडमरूमध्य पर संकट

इस संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान ने रणनीतिक होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।

इस स्थिति को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अमेरिका तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करने के लिए तैयार है।

ईरान के इस कदम का असर पहले ही दिखाई देने लगा है। इराक के रमाइला तेल क्षेत्र और वेस्ट क़ुर्ना परियोजना में उत्पादन धीमा कर दिया गया है।

यूरोप में गैस कीमतों में उछाल

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर यूरोप के ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। गैस की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

अमेरिका में राजनीतिक विवाद

अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर बहस तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सीनेटर Chris Murphy ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान बिना किसी स्पष्ट समय सीमा के चलाया जा रहा है और इसका अंत नजर नहीं आ रहा। उनके अनुसार प्रशासन ने कांग्रेस की अनुमति के बिना मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध शुरू कर दिया है।

मर्फी ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष में और अमेरिकी सैनिक मारे जा सकते हैं और जमीन पर सेना भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

क्या जमीन पर उतरेगी अमेरिकी सेना

अब तक अमेरिका ने मुख्य रूप से हवाई और नौसैनिक हमलों पर भरोसा किया है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो जमीनी सैनिक भेजने के विकल्प को खारिज नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे बड़े देश में जमीनी अभियान बेहद कठिन होगा। विश्लेषकों के अनुसार ईरान का आकार इराक से कई गुना बड़ा है और वहां सैन्य कार्रवाई लंबे और जटिल युद्ध में बदल सकती है।

संघर्ष के और फैलने की आशंका

मध्य पूर्व में अब कई मोर्चे खुल चुके हैं। ईरान और इज़रायल सीधे टकरा रहे हैं। लेबनान में हिज़्बुल्लाह सक्रिय है। खाड़ी देशों में मिसाइल हमले हो रहे हैं। ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है।

इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध में धकेल देगा।

दुनिया की नजर अब अगले कदम पर टिकी है। क्या कूटनीति रास्ता निकालेगी या मध्य पूर्व एक और लंबे और खतरनाक युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

Sorce : Al-jazeera