अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का आरोप, परमाणु हथियार पर ईरान की जिद से टूटा शांति का सपना
इस्लामाबाद
इस्लामाबाद की ऐतिहासिक शांति वार्ता आखिरकार बेनतीजा खत्म हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते पर मुहर नहीं लग सकी। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की अमेरिकी शर्त पर राजी नहीं हुआ। इसी वजह से बातचीत को बीच में ही रोकना पड़ा। पूरी दुनिया इस वार्ता से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी थी। लेकिन अंत में हाथ सिर्फ निराशा ही लगी।
जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि वे पूरी बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे संपर्क में थे। पिछले 21 घंटों में उनके बीच दर्जनों बार बातचीत हुई। अमेरिका का लक्ष्य बहुत स्पष्ट था। वॉशिंगटन चाहता था कि ईरान न केवल परमाणु हथियार छोड़ दे बल्कि उन्हें बनाने वाले उपकरणों पर भी रोक लगाए। वेंस ने कहा कि हमें ईरान से एक ठोस प्रतिबद्धता चाहिए थी। लेकिन उनके इनकार के बाद आगे बढ़ने का कोई मतलब नहीं रह गया था। वेंस की बातों में निराशा और सख्ती दोनों साफ झलक रही थी। उन्होंने सिर्फ तीन मिनट में अपनी बात खत्म की और पत्रकारों के ज्यादा सवालों का जवाब दिए बिना ही वहां से चले गए।
Vice President JD Vance gives an update in Pakistan:
— The White House (@WhiteHouse) April 12, 2026
"The simple fact is that we need to see an affirmative commitment that they will not seek a nuclear weapon, and they will not seek the tools that would enable them to quickly achieve a nuclear weapon." pic.twitter.com/il4THN5DwV
दूसरी तरफ ईरान ने इस विफलता के लिए अमेरिका के अड़ियल रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ई ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की माँगें नाजायज और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं। बक़ई के मुताबिक बातचीत तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक वॉशिंगटन अपनी ‘अत्यधिक माँगों’ को कम नहीं करता। ईरान ने साफ कर दिया कि वह अपने जायज अधिकारों और हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान की ओर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने और युद्ध के नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे जोर-शोर से उठाए गए।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा इस पूरी चर्चा में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है। ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। वहीं अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा का विषय मान रहा है। पाकिस्तानी मध्यस्थों ने दोनों देशों की दूरियों को कम करने की बहुत कोशिश की। विशेषज्ञों की टीमें अभी भी मसौदे पर काम कर रही हैं। लेकिन फिलहाल के लिए सुलह का कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है। दोनों पक्षों ने अब अपने तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए बातचीत में ब्रेक लिया है।
ईरान पर US-इजरायल का युद्ध: हाल के घटनाक्रम
- दिन 42: ट्रंप ने कहा- ईरान के पास ‘कोई दांव नहीं’, वेंस बातचीत के लिए रवाना
- दिन 41: कुवैत ने ड्रोन हमलों की निंदा की, US ने होर्मुज में नुकसान के प्रति आगाह किया
- दिन 40: ट्रंप ईरान पर हमला दो हफ़्ते के लिए टालने पर सहमत
- दिन 39: ट्रंप की डेडलाइन करीब आते ही UAE और कतर अलर्ट पर
- दिन 38: ईरान और US को युद्धविराम का मसौदा प्रस्ताव मिला
- दिन 37: ईरान में F-15E विमान के दूसरे क्रू सदस्य को बचाया गया
- दिन 36: ट्रंप की ईरान को चेतावनी: 48 घंटे, वरना कहर टूट पड़ेगा
- दिन 35: युद्ध तेज़ होने के बीच ट्रंप ने $1.5 ट्रिलियन के रक्षा बजट की मांग की
- दिन 34: UN प्रमुख ने दुनिया को आगाह किया- हम ‘एक बड़े युद्ध के कगार पर’ हैं
- दिन 33: ट्रंप ने कहा- US ईरान पर ‘बेहद ज़ोरदार’ हमला करेगा
- दिन 32: दुबई में कई घरों पर गिरा मलबा, 4 लोग घायल
- दिन 31: ट्रंप ने ईरान के खर्ग द्वीप को तबाह करने की धमकी दी
यह पूरी गहमागहमी उस समय हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है। पिछले 42 दिनों से युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान के पास अब ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं। इस युद्ध के कारण दुबई और कुवैत जैसे देशों में भी असुरक्षा का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी आगाह किया है कि दुनिया एक बहुत बड़े और विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। शांति की कोशिशें अब और भी मुश्किल होती जा रही हैं।
फिलहाल वार्ता को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। दोनों देशों के प्रतिनिधि अब अपनी-अपनी सरकारों को रिपोर्ट सौंपेंगे। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या दोबारा बातचीत की कोई गुंजाइश बनेगी? या फिर यह तनाव किसी बड़े सैन्य टकराव में बदल जाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो इस्लामाबाद की इस जमीन से शांति का संदेश नहीं बल्कि कड़वाहट ही बाहर आई है। उम्मीद की लौ अब बहुत मद्धम पड़ चुकी है। लोग दुआ कर रहे हैं कि कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद न हो जाए।

