अनुचित मांगों के कारण इस्लामाबाद बातचीत ठप, न्यूज एजेंसी का दावा-वार्ता से पीछे हटने को बहाना ढूंढ रहा था अमेरिका
नई दिल्ली/इस्लामाबाद:
मिडल ईस्ट में जारी युद्ध को रोकने की एक और बड़ी कोशिश नाकाम हो गई है। रविवार को ईरान ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका की “अनुचित मांगों” की वजह से इस्लामाबाद में हो रही बातचीत ठप हो गई। दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे तक लगातार और गहन चर्चा चली। लेकिन अंत में कड़वाहट और अविश्वास ही हाथ लगा।ईरान की एक न्यूज एजेंसी का कहना है कि अमेरिका बातचीत से हटने के लिए बहाना ढूंढ रहा था
ईरान का पक्ष: अमेरिका की ज़िद बनी बाधा
ईरानी सरकारी ब्रॉडकास्टर (IRIB) ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि ईरानी दल ने अपने देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत लगा दी। ईरान की ओर से कई पहल और प्रस्ताव भी दिए गए। लेकिन अमेरिकी पक्ष अपनी उन मांगों पर अड़ा रहा जिन्हें ईरान ने “तर्कहीन” बताया है। इसी खींचतान के बीच बातचीत खत्म हो गई और ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां से रवाना हो गया।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने इस्लामिक रिपब्लिक की बातचीत करने वाली टीम के एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया कि तेहरान की अभी बातचीत का अगला दौर आयोजित करने की कोई योजना नहीं है।
इस सूत्र ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी टीम बातचीत की मेज़ से हटने के लिए कोई बहाना ढूंढ रही थी। उनके अनुसार, अमेरिका को अपनी खोई हुई अंतरराष्ट्रीय छवि को फिर से बनाने के लिए इन बातचीत की ज़रूरत थी, और “ईरान के साथ युद्ध में हार और गतिरोध” के बावजूद, उसने अपनी उम्मीदों को कम करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई।
इस सूत्र ने आगे कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक की बातचीत करने वाली टीम ने, लोगों के प्रतिनिधियों के तौर पर, “मैदान में हासिल की गई उपलब्धियों” को सुरक्षित रखा है।
خبرگزاری فارس به نقل از یک منبع نزدیک به تیم مذاکرهکننده جمهوری اسلامی گزارش داد تهران در حال حاضر برنامهای برای برگزاری دور بعدی مذاکرات ندارد.
— ايران اينترنشنال (@IranIntl) April 12, 2026
این منبع همچنین مدعی شد تیم آمریکایی بهدنبال بهانهای برای ترک میز مذاکره بوده است. به گفته او، آمریکا این مذاکرات را برای بازسازی… pic.twitter.com/ZLOHgklg4y
जेडी वेंस का कड़ा रुख: यह ईरान के लिए बुरी खबर है
दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक अलग ही कहानी बयां की। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका ने अपना “आखिरी और सबसे बेहतरीन” प्रस्ताव मेज पर रख दिया था। वेंस ने कहा कि अब यह ईरान पर निर्भर है कि वह इसे स्वीकार करता है या नहीं।
वेंस ने बातचीत की विफलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इन शर्तों में सबसे प्रमुख मांग यह थी कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। जेडी वेंस ने सख्त लहजे में कहा कि यह समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी “रेड लाइन्स” यानी लक्ष्मण रेखाओं को लेकर बिल्कुल गंभीर है।
ट्रम्प की पल-पल पर नज़र
इस ऐतिहासिक वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पूरी तरह सक्रिय थे। वेंस ने बताया कि बातचीत के दौरान उनकी राष्ट्रपति ट्रम्प से कम से कम छह बार बात हुई। गौर करने वाली बात यह है कि एक दशक से भी ज्यादा समय के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली सीधी मुलाकात थी। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से यह अब तक की सबसे उच्च स्तरीय चर्चा मानी जा रही थी।
मैदान-ए-जंग और कूटनीति का तनाव
इस्लामाबाद में जहाँ मेज पर बहस चल रही थी, वहीं समंदर में तनाव चरम पर था। खबरों के मुताबिक ईरान अब ‘आबनाए होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की स्थिति में नहीं है। बताया जा रहा है कि ईरान ने वहां जो बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, वह अब उनका ट्रैक खो चुका है। यानी खुद ईरान को नहीं पता कि उसने सुरंगें कहाँ लगाई थीं।
इसी बीच दो अमेरिकी युद्धपोतों ने इस समुद्री रास्ते को पार किया। ईरान द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद यह इस तरह का पहला ट्रांजिट है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सेना इस रास्ते को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
किसने की अगुवाई?
इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर शामिल थे। ईरान की ओर से वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने कमान संभाली थी।
मौजूदा हालात: अनिश्चितता का साया
बातचीत के बेनतीजा रहने से पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। एक तरफ अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह और पीछे नहीं हटेगा। वहीं ईरान का कहना है कि वह अपनी गरिमा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
फिलहाल के लिए सुलह की उम्मीदें धुंधली पड़ती दिख रही हैं। सीमा पर तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तेल की कीमतों का दबाव बरकरार है। आने वाले दिन इस युद्ध और कूटनीति के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे। सुरक्षा कारणों और बिगड़ते हालातों को देखते हुए नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से पूरी तरह परहेज करें।

