NewsTOP STORIES

इस्लामाबाद वार्ता: अमेरिका और ईरान के बीच बिना समझौते के खत्म हुई मैराथन बैठक

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद रविवार को एक ऐतिहासिक लेकिन तनावपूर्ण कूटनीतिक ड्रामे का गवाह बनी। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक दशक की पहली सीधी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे उच्च स्तरीय बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को घोषणा की कि उनकी टीम पाकिस्तान से वापस लौट रही है। लगभग 21 घंटे तक चली इस मैराथन चर्चा के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके।

जेडी वेंस का कड़ा रुख

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत की विफलताओं का जिक्र करते हुए ईरान पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। इन शर्तों में परमाणु हथियार न बनाने का सख्त वादा भी शामिल था। वेंस ने इस्लामाबाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि समझौता न होना बुरी खबर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। वेंस के अनुसार उन्होंने अपनी ‘रेड लाइन्स’ यानी लक्ष्मण रेखाएं साफ कर दी थीं। अमेरिका अब बिना किसी समझौते के वापस लौट रहा है।

ट्रम्प की सक्रियता और मध्यस्थता की मेज

इस पूरी बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर्दे के पीछे से पूरी कमान संभाले हुए थे। वेंस ने खुलासा किया कि बातचीत के दौरान उनकी राष्ट्रपति ट्रम्प से कम से कम छह बार बात हुई। अमेरिका की ओर से इस टीम में जेडी वेंस के साथ मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जारेड कुशनर भी शामिल थे।

दूसरी तरफ ईरानी दल का नेतृत्व वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ कर रहे थे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह बैठक इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुई। पाकिस्तान की भूमिका इस बार केवल एक डाकिया की नहीं थी। पाकिस्तान ने इस बार दोनों कट्टर दुश्मनों को एक ही मेज पर आमने सामने बिठाने में सफलता हासिल की।

क्या थे विवाद के मुख्य मुद्दे?

इस बातचीत का सबसे बड़ा काँटा ‘आबनाए होर्मुज’ (Strait of Hormuz) बना। यह समुद्री रास्ता दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है। इसकी वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

ईरान की मांगें काफी लंबी थीं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार वे चाहते हैं कि:

  1. विदेशों में जमे हुए उनके फंड्स को तुरंत रिलीज किया जाए।
  2. आबناए होर्मुज पर उनका पूरा नियंत्रण बना रहे।
  3. वे इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल सकें।
  4. उन्हें युद्ध के हर्जाने का भुगतान किया जाए।
  5. लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम लागू हो।

वहीं अमेरिका का एजेंडा बिल्कुल साफ था। डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला रहे। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह पंगु बना दिया जाए ताकि वह कभी भी परमाणु बम न बना सके।

तनाव और संवेदनाओं का माहौल

इस्लामाबाद में हुई इस बैठक का माहौल काफी भारी था। ईरानी प्रतिनिधिमंडल काले कपड़ों में पहुंचा था। वे अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों का शोक मना रहे थे। ईरानी पक्ष अपने साथ उन छात्रों के जूते और बैग भी लेकर आया था जो एक सैन्य परिसर के पास स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे। हालांकि पेंटागन का कहना है कि इस हमले की जांच चल रही है। लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिकी सेना ने ही वह हमला किया था।

बैठक के अंदर का माहौल भी उतार-चढ़ाव भरा रहा। सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान कई बार दोनों पक्षों का पारा चढ़ा। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि कमरे का तापमान मूड के साथ बदलता रहा।

युद्ध और शांति के बीच फंसा क्षेत्र

इस बातचीत की विफलता का सीधा असर क्षेत्र में जारी दो हफ्ते के कमजोर युद्धविराम पर पड़ सकता है। जहाँ एक तरफ बातचीत चल रही थी वहीं अमेरिकी सेना ने कहा कि वह आबनाए होर्मुज को साफ करने की तैयारी कर रही है। अमेरिका ने दावा किया कि उसके दो युद्धपोत वहां से गुजरे हैं और वे बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए तैयार हैं। ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

इज़राइल का मुद्दा भी इस तनाव को और बढ़ा रहा है। अमेरिकी सहयोगी इज़राइल ने फरवरी में ईरान पर हुए हमलों में हिस्सा लिया था। वह अभी भी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। इज़राइल का कहना है कि उसका यह अभियान अमेरिका-ईरान युद्धविराम का हिस्सा नहीं है।

पाकिस्तान का बदला हुआ चेहरा

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है। जो देश एक साल पहले तक कूटनीतिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहा था वह आज दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच मध्यस्थता कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बातचीत क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता खोलेगी। इस बैठक के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया था। पांच हजार से ज्यादा सैनिक और अर्धसैनिक बल सड़कों पर तैनात थे।

आगे क्या होगा?

ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया पर कहा है कि तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रहेगी। लेकिन अभी यह तय नहीं है कि अगला दौर कब और कहां होगा। फिलहाल के लिए शांति की उम्मीदें धुंधली नजर आ रही हैं। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी है। दुनिया की नजरें अब तेल की कीमतों और आबनाए होर्मुज की स्थिति पर टिकी हैं। वेंस का खाली हाथ लौटना संकेत दे रहा है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *