दशकों बाद ऐतिहासिक पहल: क्या वॉशिंगटन में खत्म होगा इजराइल-लेबनान युद्ध?
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वॉशिंगटन/बेरूत:
मध्य पूर्व की राजनीति में मंगलवार को एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। दशकों की दुश्मनी और एक महीने से जारी भीषण खूनखराबे के बीच इजराइल और लेबनान वॉशिंगटन में सीधी राजनयिक वार्ता की मेज पर आमने-सामने होंगे। यह मुलाकात इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि साल 1993 के बाद पहली बार दोनों देश बिना किसी मध्यस्थ के एक ही कमरे में बैठकर बात करेंगे।
वार्ता की मेज पर कौन-कौन?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में होने वाली इस बैठक में इजराइल के राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद हिस्सा लेंगी। अमेरिका को उम्मीद है कि इस सीधी बातचीत से उस युद्ध को रोकने का कोई रास्ता निकलेगा जिसने पूरे लेबनान को खंडहर में तब्दील कर दिया है।
लेबनान सरकार के लिए यह कदम उठाना आसान नहीं था। देश के भीतर हिजबुल्ला जैसे ताकतवर समूह इस सीधी वार्ता का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। हालांकि, जिस तरह से आम जनता युद्ध की मार झेल रही है, उसे देखते हुए लेबनान सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है।
मौत के आंकड़ों के बीच शांति की तलाश
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक महीने में इजराइली हमलों ने तबाही की सारी हदें पार कर दी हैं। अब तक कम से कम 2,089 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें 166 मासूम बच्चे और 252 महिलाएं शामिल हैं। घायलों की संख्या सात हजार के करीब पहुंच रही है। लगभग 10 लाख लोग अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर आ गए हैं। इस मानवीय संकट ने लेबनान सरकार को मजबूर किया है कि वह युद्ध के मैदान के बजाय कूटनीति की मेज को चुने।
हिजबुल्ला और ईरान का रुख
भले ही वॉशिंगटन में राजनयिक हाथ मिलाने की तैयारी कर रहे हों, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। हिजबुल्ला के नेता नइम कासिम ने लेबनान सरकार से इस वार्ता को तुरंत रद्द करने की मांग की है। वहीं, हिजबुल्ला के राजनीतिक परिषद के सदस्य वाफिक सफा ने साफ कर दिया है कि वह वॉशिंगटन में होने वाले किसी भी समझौते को नहीं मानेंगे।
ईरान ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी है। ईरान चाहता है कि लेबनान खुद अपनी बात रखने के बजाय उसके समर्थन वाली नीति पर चले। लेकिन लेबनान सरकार इस बार अपनी अलग पहचान और शांति की जरूरत पर अड़ी हुई है।
इजराइल की ‘सुरक्षा क्षेत्र’ वाली जिद
दूसरी तरफ, इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक सीमा सुरक्षित नहीं हो जाती। इजराइली सेना का लक्ष्य दक्षिण लेबनान में लिटानी नदी तक एक ‘बफर जोन’ या सुरक्षा क्षेत्र बनाना है। इजराइल के रक्षा मंत्री का कहना है कि जब तक यह इलाका पूरी तरह सैन्य मुक्त नहीं हो जाता, तब तक उनके नागरिक सुरक्षित घर नहीं लौट पाएंगे।
जमीन पर हिजबुल्ला के ड्रोन और रॉकेट हमले जारी हैं। इजराइली सेना भी बमबारी और जमीनी घुसपैठ से पीछे नहीं हट रही है।
निष्कर्ष: क्या यह सिर्फ एक औपचारिकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता युद्ध को तुरंत खत्म तो नहीं करेगी, लेकिन संवाद का रास्ता खुलना ही अपने आप में बड़ी बात है। वॉशिंगटन की इस बैठक से यह तय होगा कि क्या लेबनान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में शांति चाहता है या वह क्षेत्रीय शक्तियों के दबाव में युद्ध जारी रखेगा। पूरी दुनिया की नजरें अब मार्को रुबियो के दफ्तर से निकलने वाली खबरों पर टिकी हैं।

