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जामिया मिल्लिया इस्लामिया: छात्रों की रचनात्मकता का प्रतीक ‘रिटेल थेरेपी’ पत्रिका लॉन्च

विवरणजानकारी
पत्रिका का नामरिटेल थेरेपी (वॉल्यूम-2)
संस्थानजामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI)
योगदानकर्ताएम.कॉम (बिजनेस मैनेजमेंट) छात्र
मुख्य अतिथिकुलपति प्रो. (डॉ.) मजहर आसिफ
मुख्य विषयरिटेल मार्केटिंग और उपभोक्ता संस्कृति
एक्सेसQR कोड के माध्यम से डिजिटल डाउनलोड उपलब्ध

नई दिल्ली:

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) ने अपने शैक्षणिक नवाचार और छात्र-नेतृत्व वाली पहलों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय के यासिर अराफात हॉल में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान छात्र-संचालित पत्रिका ‘रिटेल थेरेपी’ (Retail Therapy) के दूसरे संस्करण का आधिकारिक विमोचन किया गया। यह पत्रिका न केवल छात्रों की अकादमिक समझ को दर्शाती है, बल्कि खुदरा विपणन (Retail Marketing) के बदलते आयामों पर उनके गहन शोध का प्रमाण भी है।


कुलपति ने सराहा छात्रों का बौद्धिक प्रयास

पत्रिका का विमोचन विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) मजहर आसिफ द्वारा किया गया। अपने संबोधन में कुलपति ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक विचारशील और बौद्धिक रूप से आकर्षक प्रयास बताया। उन्होंने कहा:

“यह देखकर गर्व होता है कि छात्र पारंपरिक अकादमिक ढांचे से बाहर निकलकर कुछ नया सोच रहे हैं। ‘रिटेल थेरेपी’ जैसे प्रयास छात्रों को खुदरा विपणन के व्यापक और विकसित होते आयामों को खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”


कक्षा के असाइनमेंट से ‘बौद्धिक मंच’ तक का सफर

‘रिटेल थेरेपी’ वॉल्यूम-2 (2026) की सबसे खास बात यह है कि इसमें शामिल सभी 15 मूल लेख वाणिज्य और व्यावसायिक अध्ययन विभाग के एम.कॉम (बिजनेस मैनेजमेंट) के छात्रों द्वारा स्वयं लिखे, क्यूरेट और निर्मित किए गए हैं।

  • रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच: जो शुरुआत कभी कक्षा के एक साधारण असाइनमेंट के रूप में हुई थी, वह अब रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और सहयोगात्मक शिक्षा के एक गतिशील मंच के रूप में विकसित हो चुकी है।
  • रटंत विद्या से मुक्ति: इस प्रकाशन का प्राथमिक उद्देश्य ‘रटंत विद्या’ (Rote Learning) से हटकर छात्रों में विश्लेषणात्मक जुड़ाव पैदा करना है। यह छात्रों को खुदरा क्षेत्र, उपभोक्ता संस्कृति और उभरते बाजार रुझानों पर अपने विविध दृष्टिकोण व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

सहयोग और नवाचार की संस्कृति

पत्रिका के संपादक और विषय शिक्षक प्रो. देबर्षी मुखर्जी ने इस परियोजना की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह एक जीवंत बौद्धिक अभ्यास बन गया है जो नवाचार और स्वतंत्र विचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने छात्र योगदानकर्ताओं के समर्पण की प्रशंसा की और संकाय संपादकों—डॉ. इजहार अहमद और डॉ. विवेक—के अटूट समर्थन को भी स्वीकार किया, जिनके मार्गदर्शन ने इस प्रकाशन को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह पत्रिका छात्रों की समकालीन मुद्दों का विश्लेषण करने और उन्हें स्पष्टता व रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत करने की क्षमता का प्रमाण है। यह जेएमआई की उस संस्कृति को भी दर्शाती है जहाँ पारंपरिक कक्षा के दायरे से बाहर विचारों को पोषित किया जाता है और छात्रों की आवाज़ को बुलंद किया जाता है।


डिजिटल पहुंच और भविष्य की विरासत

विश्वविद्यालय समुदाय और बाहरी पाठकों की सुविधा के लिए पत्रिका को डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराया गया है। आधिकारिक संचार में प्रदान किए गए QR कोड के माध्यम से पाठक पत्रिका को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

‘रिटेल थेरेपी’ वॉल्यूम-2 की सफल रिलीज जामिया में एक बढ़ती विरासत का संकेत है। यह संस्थान की नवाचार, शैक्षणिक उत्कृष्टता और छात्र-नेतृत्व वाली पहलों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। आने वाले समय में, ऐसी पत्रिकाएं छात्रों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

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