मुशफिकुर भाई के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना किसी सपने जैसा है: अमित हसन
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विशेष साक्षात्कार/ढाका/स्पोर्ट्स डेस्क
बांग्लादेश क्रिकेट के घरेलू गलियारों में पिछले कई वर्षों से एक नाम अपनी बल्लेबाजी की तकनीक और गजब के धैर्य के कारण चर्चा में था—अमित हसन। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बाद आखिरकार नियति ने इस युवा बल्लेबाज को वह मौका दिया है, जिसका उन्हें वर्षों से इंतजार था।
पाकिस्तान के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम में चुने जाने के बाद, अमित हसन ने ‘ढाका पोस्ट’ के खेल संवाददाता शाकिब शावन से खास बातचीत की। इस साक्षात्कार में उन्होंने अपने संघर्ष, अनुशासन और अपने आदर्श मुशफिकुर रहीम के साथ खेलने की उत्सुकता पर विस्तार से चर्चा की।

लंबे इंतजार का मीठा फल
प्रश्न: आखिरकार राष्ट्रीय टीम का बुलावा आ गया। इस ऐतिहासिक क्षण पर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या है?
अमित हसन: अल्हम्दुलिल्लाह, यह अहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बहुत अच्छा लग रहा है। सच कहूं तो यह वही दिन है जिसका मुझे वर्षों से इंतजार था। मैं राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने के लिए जी-जान से मेहनत कर रहा था। आज जब आधिकारिक तौर पर चयन की खबर मिली, तो लगा कि मेहनत सफल हो गई।
प्रश्न: क्या आपको उम्मीद थी कि पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में आपको मौका मिलेगा?
अमित हसन: ईमानदारी से कहूं तो मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि ‘वर्तमान’ में जीना सबसे जरूरी है। जब मैं बीसीएल (बांग्लादेश क्रिकेट लीग) में खेल रहा था, तो मेरा पूरा ध्यान उसी पर था। मैंने कभी चयनकर्ताओं की नजर या भविष्य की सीरीज के बारे में सोचकर खुद पर दबाव नहीं डाला।
शांता भाई की सलाह और टीम में भूमिका
प्रश्न: क्या टीम प्रबंधन ने आपको स्पष्ट किया है कि आपकी भूमिका क्या होगी?
अमित हसन: फिलहाल भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, नेशनल क्रिकेट लीग (NCL) खत्म होने के बाद कप्तान नजमुल हुसैन शांता भाई ने मुझे फोन किया था। उन्होंने मुझे कुछ तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देने को कहा और सबसे महत्वपूर्ण सलाह दी—’धैर्य बनाए रखना’। उन्होंने मुझे लगातार अपने रूटीन पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रश्न: आपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लाल गेंद से ढेरों रन बनाए हैं। क्या आपको लगता है कि राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने में थोड़ी देरी हुई?
अमित हसन: नहीं, मेरे मन में ऐसा कोई मलाल नहीं है। मेरा मानना है कि हर चीज का एक सही समय होता है। अब जब मौका मिल गया है, तो मेरा पूरा ध्यान इस बात पर है कि मैं टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकूं। मैं वही स्वाभाव और वही तकनीक अपनाऊंगा जिसने मुझे घरेलू क्रिकेट में सफलता दिलाई है।
अनुशासन: सफलता की असली कुंजी
प्रश्न: आपकी पहचान एक बेहद अनुशासित क्रिकेटर की है—समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना और घंटों अभ्यास। यह अनुशासन कितना जरूरी है?
अमित हसन: मेरा मानना है कि अनुशासन के बिना कोई भी एथलीट लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सकता। यह सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी जरूरी है। मैं हमेशा से अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा हूं क्योंकि यही चीजें आपको मुश्किल समय में मानसिक रूप से मजबूत रखती हैं।
प्रश्न: कई खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में आते हैं और जल्दी ही ओझल हो जाते हैं। क्या आप इसे एक चुनौती मानते हैं?

अमित हसन: मैं इसे चुनौती के बजाय एक प्रक्रिया के रूप में देखता हूं। मैं बहुत आगे की नहीं सोच रहा। मेरा लक्ष्य सिर्फ अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखना है। चुनौतियां हर जगह होती हैं, लेकिन अगर आप अपनी प्रक्रिया पर टिके रहते हैं, तो परिणाम पक्ष में आते हैं।
टेस्ट स्पेशलिस्ट का टैग और भविष्य के लक्ष्य
प्रश्न: आप पर ‘टेस्ट क्रिकेटर’ का टैग लग चुका है। क्या आप इसे तोड़कर सीमित ओवरों के क्रिकेट (ODI/T20) में भी पहचान बनाना चाहते हैं?
अमित हसन: भविष्य के बारे में कौन जानता है? अभी मुझे टेस्ट टीम में मौका मिला है, इसलिए मेरी पूरी एकाग्रता लाल गेंद के खेल पर है। लेकिन हाँ, एक क्रिकेटर के तौर पर मैं तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहता हूं। अगर मैं घरेलू टी20 या वनडे में अच्छा प्रदर्शन करता हूं, तो मुझे यकीन है कि चयनकर्ता उस पर भी विचार करेंगे। मेरा मानना है कि जो खिलाड़ी टेस्ट की मुश्किल परिस्थितियों में ढल सकता है, वह किसी भी फॉर्मेट में खेल सकता है।

कोच और सिलहट टीम का योगदान
प्रश्न: नारायणगंज से होने के बावजूद आपने सिलहट के लिए लंबे समय तक खेला। वहां का अनुभव कैसा रहा?
अमित हसन: सिलहट मेरे लिए परिवार जैसा है। पिछले 6-7 सालों से मैं उनके साथ हूं। वहां का माहौल बहुत सकारात्मक है। जहां तक मेरे करियर की बात है, हन्नान सर और राजिन सर का योगदान अतुलनीय है। हन्नान सर ने ही राजिन सर को मेरा नाम सुझाया था जब सिलहट को एक विकेटकीपर-बल्लेबाज की जरूरत थी। राजिन सर के अनुभवों ने मुझे आज का ‘अमित हसन’ बनाया है।
प्रश्न: आप विकेटकीपिंग भी करते हैं, लेकिन इसकी चर्चा कम होती है। क्या हम आपको दस्ताने पहने देखेंगे?
अमित हसन: मुझे विकेटकीपिंग बहुत पसंद है। हालांकि कई बार टीम संतुलन के कारण मुझे स्लिप या अन्य पोजीशन पर फील्डिंग करनी पड़ती है, लेकिन मैं इसे छोड़ना नहीं चाहता। अगर टीम को जरूरत हुई, तो मैं राष्ट्रीय टीम के लिए भी यह जिम्मेदारी निभाने को तैयार हूं।
आदर्श: मुशफिकुर रहीम और एक सपना
प्रश्न: क्रिकेट में आपके प्रेरणास्रोत कौन हैं?
अमित हसन: (मुस्कुराते हुए) मुशफिकुर भाई! बचपन से ही मैं उन्हें अपना आदर्श मानता आया हूं। उन्हें बल्लेबाजी और कीपिंग करते देखकर ही मैंने क्रिकेटर बनने का फैसला किया था। घरेलू क्रिकेट में उनके साथ बल्लेबाजी करने का मौका मिला, तो उन्होंने मेरा बहुत मार्गदर्शन किया। अब उन्हीं के साथ राष्ट्रीय टीम के ड्रेसिंग रूम को साझा करना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
परिवार और स्वभाव
प्रश्न: आप स्वभाव से बहुत शांत और विनम्र हैं। क्या यह आपके खेल में मदद करता है?
अमित हसन: यह स्वभाव मुझे विरासत में मिला है। मेरे परिवार में सभी लोग ऐसे ही हैं। और हां, शांत रहने से मुझे मैदान पर दबाव की स्थितियों में बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है।
प्रश्न: इस उपलब्धि पर घर का माहौल कैसा है?
अमित हसन: परिवार बहुत खुश है। उन्होंने मेरा संघर्ष करीब से देखा है। मेरी सफलता में उनका त्याग मुझसे कहीं ज्यादा है। आज जब मैं अपने सपने के करीब हूं, तो उनकी खुशी ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
अमित हसन का प्रथम श्रेणी करियर: एक नजर में
- कुल रन: 3,000 से अधिक
- प्रमुख टीम: सिलहट डिवीजन
- विशेषता: लंबी पारी खेलने की क्षमता और ठोस डिफेंस।
निष्कर्ष: अमित हसन का चयन उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश है जो घरेलू क्रिकेट में तपस्या कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि अगर आपके पास अनुशासन और रनों का अंबार है, तो राष्ट्रीय टीम के दरवाजे एक न एक दिन जरूर खुलते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उनका डेब्यू बांग्लादेश क्रिकेट के लिए एक नई उम्मीद की किरण हो सकता है।

