एशिया रैंकिंग में जामिया का दबदबा: शीर्ष 160 विश्वविद्यालयों में बनाई जगह
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नई दिल्ली:
देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शुमार जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर भारत का मान बढ़ाया है। प्रतिष्ठित ‘टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026’ में जामिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 160वां स्थान हासिल किया है। पिछले वर्षों की तुलना में यह छलांग न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव की भी पुष्टि करती है।
शैक्षणिक उत्कृष्टता की नई ऊंचाई
एशिया के हजारों विश्वविद्यालयों के बीच 160वीं रैंक हासिल करना जामिया के लिए एक मील का पत्थर है। यह रैंकिंग अनुसंधान (Research), शिक्षण (Teaching), अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और उद्योग आय जैसे कड़े मानकों पर आधारित होती है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस रैंकिंग में हुआ सुधार यह बताता है कि जामिया अब केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि एशियाई स्तर पर शोध और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
कुलपति ने दी ‘जामिया परिवार’ को बधाई
विश्वविद्यालय की इस शानदार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए माननीय कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ़ ने इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि जामिया परिवार के प्रत्येक सदस्य के अटूट समर्पण का प्रमाण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावशाली अनुसंधान और वैश्विक जुड़ाव के प्रति हमारी प्रतिबद्धता ने ही हमें इस मुकाम पर पहुँचाया है।”
[Image description: Jamia Millia Islamia’s iconic building with a celebratory banner highlighting its 160th rank in Asia.]
टीम वर्क और गुणवत्ता पर जोर
रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) मो. महताब आलम रिज़वी ने इस सफलता का श्रेय शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के टीम वर्क को दिया। उन्होंने विशेष रूप से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्थागत प्रयासों के बिना ऐसी वैश्विक पहचान संभव नहीं थी।
वहीं, IQAC की मानद निदेशक प्रो. रफ़त परवीन ने जोर देकर कहा कि रैंकिंग में यह उल्लेखनीय सुधार विश्वविद्यालय द्वारा अपनाए गए कड़े गुणवत्ता मानकों और शैक्षणिक नवाचारों का सुखद परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में जामिया एशिया के टॉप-100 संस्थानों में जगह बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
भविष्य की राह
एशिया की अग्रणी यूनिवर्सिटीज़ की सूची में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद, अब जामिया के सामने अपनी इस बढ़त को बरकरार रखने की चुनौती है। इस रैंकिंग से न केवल विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शोध अनुदान मिलने में आसानी होगी, बल्कि विदेशी छात्रों और फैकल्टी के साथ सहयोग के नए अवसर भी खुलेंगे।
जामिया की यह सफलता न केवल कैंपस के लिए उत्सव का विषय है, बल्कि यह भारतीय उच्च शिक्षा जगत के लिए भी एक गौरवशाली क्षण है।

