Culture

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने लॉन्च की दूरस्थ शिक्षा की खास पत्रिका ‘शहर-ए-आरज़ू’

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने एक बार फिर शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी धाक जमाई है। विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र यानी CDOE ने अपनी वार्षिक त्रभाषी पत्रिका ‘शहर-ए-आरज़ू’ का दूसरा अंक जारी कर दिया है। यह कार्यक्रम जामिया के प्रशासनिक ब्लॉक स्थित यासिर अराफात हॉल में आयोजित किया गया। इस मौके पर शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। जामिया का यह कदम दूरदराज के इलाकों में बैठकर पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पत्रिका का विमोचन जामिया के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मज़हर आसिफ के हाथों संपन्न हुआ। कुलपति ने इस पहल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह पत्रिका केवल पन्ने नहीं है बल्कि यह छात्रों की सोच और उनकी रचनात्मकता का आईना है। उन्होंने CDOE की पूरी टीम को बधाई दी। प्रोफेसर आसिफ का मानना है कि दूरस्थ शिक्षा लेने वाले छात्रों को भी मुख्यधारा के छात्रों की तरह अपनी बात कहने का मंच मिलना चाहिए। यह पत्रिका उसी कमी को पूरा करने का काम कर रही है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर महताब आलम रिज़वी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर रहे छात्रों को अक्सर लगता है कि वे कैंपस की गतिविधियों से दूर हैं। ‘शहर-ए-आरज़ू’ जैसे प्रयास उन्हें विश्वविद्यालय से सीधे तौर पर जोड़ने का काम करते हैं। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता में सुधार होता है और उन्हें कुछ नया लिखने की प्रेरणा मिलती है।

CDOE के डीन प्रोफेसर मुशाहिद आलम रिज़वी ने इस पत्रिका को पूरी तरह से अपने छात्रों को समर्पित किया। उन्होंने पत्रिका के सफर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह अब केवल एक मैगजीन नहीं रह गई है। यह एक ऐसा मंच बन गया है जहां छात्र अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे रहे हैं। प्रोफेसर रिज़वी ने उन कर्मचारियों की भी सराहना की जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस अंक को तैयार किया है।

इस गरिमामय समारोह में बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के कई दिग्गज सदस्य भी पहुंचे। इनमें आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर हेमंत बी. कौशिक और एएमयू के प्रोफेसर नफीस अहमद अंसारी शामिल थे। इग्नू के प्रोफेसर अरविंद कुमार झा ने भी कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इनके अलावा जामिया के प्रोफेसर इक्तिदार मोहम्मद खान और प्रोफेसर कविता चौहान भी वहां मौजूद रहे। इन विशेषज्ञों की मौजूदगी यह बताती है कि जामिया की इस पत्रिका की अहमियत कितनी ज्यादा है।

‘शहर-ए-आरज़ू’ के इस नए अंक की सबसे बड़ी खूबी इसका त्रभाषी होना है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाओं के लेख शामिल किए गए हैं। यह संगम जामिया की मिली-जुली संस्कृति को दर्शाता है। इस अंक में कुल 65 रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। इनमें अकादमिक लेख भी हैं और दिल को छू लेने वाली साहित्यिक रचनाएं भी। छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर समकालीन मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। यह पत्रिका बताती है कि भाषा कोई भी हो, विचार मजबूत होने चाहिए।

इस बार की पत्रिका में एक खास इंटरव्यू भी शामिल है। यह इंटरव्यू जामिया की पूर्व छात्रा सोफिया सिद्दीकी का है। सोफिया ने यूपीएससी की परीक्षा में 253वीं रैंक हासिल कर संस्थान का नाम रोशन किया है। उनका यह सफर उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा बनेगा जो घर बैठकर बड़े सपने देख रहे हैं। सोफिया की कामयाबी यह साबित करती है कि अगर लगन हो तो दूरस्थ शिक्षा के जरिए भी आसमान छुआ जा सकता है।

जामिया की यह कोशिश देश के उन इलाकों तक पहुंच रही है जहां संसाधन सीमित हैं। ‘शहर-ए-आरज़ू’ के जरिए छात्र अपनी बात पूरी दुनिया के सामने रख रहे हैं। यह वॉल्यूम जामिया की उस प्रतिबद्धता को दोहराता है जिसमें शिक्षा को हर दरवाजे तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। दूर बैठे छात्रों को अब यह महसूस होता है कि वे भी जामिया परिवार का एक अभिन्न हिस्सा हैं। आने वाले समय में यह पत्रिका नई प्रतिभाओं को तराशने का एक बड़ा जरिया बनेगी।