हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव: क्या अमेरिका-ईरान युद्ध अब शांति की ओर बढ़ेगा?
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वाशिंगटन/काहिरा
मध्य पूर्व के सुलगते रेगिस्तान और नीले समंदर के बीच एक बार फिर दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पिछले कई दिनों से जारी छिटपुट हमलों और सैन्य तनातनी के बाद शनिवार को एक ‘अस्थायी शांति’ देखी गई। लेकिन यह शांति किसी समझौते का परिणाम नहीं, बल्कि उस तूफान के आने से पहले की खामोशी है, जिसका केंद्र तेहरान और वाशिंगटन बने हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी चीन यात्रा से पहले, व्हाइट हाउस ईरान की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने और शांति वार्ता शुरू करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन ईरान की ओर से अभी तक केवल रहस्यमयी चुप्पी ही मिली है।
कतर का टैंकर: भरोसे की पहली लहर?
इस भारी तनाव के बीच शनिवार को एक दिलचस्प गतिविधि ने सबका ध्यान खींचा। LSEG शिपिंग डेटा के अनुसार, कतर का एक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) टैंकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होते हुए पाकिस्तान की ओर बढ़ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है जब किसी कतरी एलएनजी जहाज को इस संवेदनशील मार्ग से गुजरने की अनुमति मिली है।
सूत्रों का कहना है कि इस पारगमन को ईरान ने हरी झंडी दी है। इसे कतर और पाकिस्तान के साथ ‘विश्वास बहाली’ (Confidence Building) के उपाय के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान इस युद्ध में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, और ईरान का यह कदम कूटनीतिक गलियारों में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
युद्ध का मैदान: हॉर्मुज़ में ब्लॉककेड और झड़पें
भले ही शनिवार को स्थिति शांत रही हो, लेकिन बीते शुक्रवार ने दुनिया को डरा दिया था। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने बताया कि हॉर्मुज़ में ईरानी बलों और अमेरिकी युद्धपोतों के बीच सीधी झड़पें हुईं। अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी तेल टैंकर ‘हर्बी’ (Herby) की घेराबंदी कर दी, जो ईरानी बंदरगाह की ओर जाने की कोशिश कर रहा था।
अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े दो अन्य जहाजों पर भी हमला किया। बताया गया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने इन जहाजों के ‘स्मोकस्टैक्स’ (धुएं निकलने वाली चिमनी) पर निशाना साधा, जिससे उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
ब्लॉककेड का आर्थिक प्रभाव: अमेरिका ने पिछले महीने ईरानी जहाजों पर पूर्ण नाकाबंदी लगा दी थी। हालांकि, एक ताजा सीआईए (CIA) मूल्यांकन ने ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद अगले चार महीनों तक गंभीर आर्थिक संकट से बच सकता है। यह विश्लेषण ट्रंप के उस ‘दबाव तंत्र’ पर सवाल उठाता है, जिसके जरिए वे तेहरान को वार्ता की मेज पर लाना चाहते हैं।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर बढ़ते हमले
तनाव की आंच केवल समुद्र तक सीमित नहीं है। शुक्रवार को ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और तीन ड्रोन को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया। इस हमले में तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं।
ईरान ने इस हमले को ट्रंप के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (हॉर्मुज़ में जहाजों को एस्कॉर्ट करने की योजना) का जवाब बताया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कड़े शब्दों में कहा:
“जब भी मेज पर राजनयिक समाधान की बात होती है, अमेरिका एक लापरवाह सैन्य दुस्साहस का विकल्प चुनता है।”
कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका अकेला?
इस पूरे संघर्ष में अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की और इस बात पर नाराजगी जताई कि यूरोपीय सहयोगी जलमार्ग खोलने के वाशिंगटन के प्रयासों में साथ नहीं दे रहे हैं।
दूसरी ओर, जर्मनी और ब्रिटेन का रुख कुछ अलग है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि हालांकि वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लक्ष्य में अमेरिका के साथ हैं, लेकिन वे वाशिंगटन के साथ अपने मतभेदों को पाटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ब्रिटेन ने स्थिति स्थिर होने पर बहुराष्ट्रीय मिशन के लिए मध्य पूर्व में एक युद्धपोत तैनात करने की घोषणा की है।
चीन यात्रा और नए प्रतिबंध
अगले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात इस युद्ध के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकती है। यात्रा से ठीक पहले, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 10 व्यक्तियों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इनमें चीन और हांगकांग की वे कंपनियां शामिल हैं, जो ईरान को शाहिद (Shahed) ड्रोन बनाने के लिए कच्चा माल और हथियार उपलब्ध करा रही थीं।
अमेरिका का यह कदम चीन को एक सीधा संदेश है कि ईरान के सैन्य तंत्र को मदद देना बंद किया जाए।
निष्कर्ष: ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ यह युद्ध अब अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर रहा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा गुजरता है, वर्तमान में एक रणक्षेत्र बना हुआ है। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के मुहाने पर खड़ी है।
अब सबकी निगाहें तेहरान पर हैं। क्या ईरान अमेरिका के शांति प्रस्ताव को स्वीकार करेगा, या कतर के टैंकर का गुजरना महज एक सामरिक चाल है? आने वाले 48 घंटे मध्य पूर्व के भविष्य और विश्व शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
बड़ी बातें:
अगला कदम: ट्रंप की चीन यात्रा से शांति की उम्मीदें जुड़ी हैं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से जाता है, जो फिलहाल ईरान के नियंत्रण में है।
युद्ध की शुरुआत: 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों से शुरू हुआ।
सीजफायर की स्थिति: 7 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा हुई थी, लेकिन उल्लंघन जारी है।

