News

ईरान समर्थक शियाओं पर सख्ती की मांग, मौलाना रजानी फिर विवादों में

गुजरात के चर्चित शिया मौलाना हसनअली रजानी एक बार फिर अपने विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि ईरान समर्थक शियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो लोग “पैसे लेकर ईरान के समर्थन में रोते हैं” उन पर पाकिस्तान की तरह कार्रवाई होनी चाहिए।

रविवार को जारी एक बयान में मौलाना रजानी ने दावा किया कि देश और दुनिया की मीडिया जब भारतीय शियाओं के ईरान समर्थन पर सवाल पूछती है, तब उन्हें जवाब देने में शर्मिंदगी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि कुछ शिया मौलवी वर्षों से शिया सुन्नी एकता के नाम पर ईरान का समर्थन करते रहे हैं और इससे पूरी शिया बिरादरी की छवि प्रभावित हुई है।

मौलाना रजानी ने अपने बयान में दुबई से कथित तौर पर निकाले गए शियाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के दूसरे देश भी “ईरान समर्थक शियाओं” के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई करें तो “कट्टरता और आतंकवाद” खत्म हो सकता है। उन्होंने अरब देशों की कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया और कहा कि इससे दुनिया को संदेश मिला है कि किसी भी देश को दूसरे देशों के एजेंडे पर काम नहीं करना चाहिए।

उन्होंने पाकिस्तान को भी निशाने पर लिया। रजानी ने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान का “कठपुतली” बनकर करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाया है। उनका दावा था कि आने वाले समय में अरब देशों से पाकिस्तानियों को भी बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से ईरान के मामलों में दखल न देने की अपील की।

अपने बयान में मौलाना रजानी ने यह भी कहा कि दुनिया भर से निकाले गए “ईरान समर्थक शियाओं” को ईरान भेज देना चाहिए, ताकि उन्हें पता चल सके कि ईरान खुद अपने समर्थकों को कितना महत्व देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के शिया “मजहब के साथ हैं, ईरान के साथ नहीं” और कुछ लोग सिर्फ पैसे लेकर ईरान का एजेंडा चला रहे हैं।

सबसे विवादित टिप्पणी करते हुए रजानी ने कहा कि अगर वह देश के प्रधानमंत्री होते तो “सभी ईरान समर्थक शियाओं को फांसी पर लटका देते।” उनके इस बयान पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे नफरत फैलाने वाला और भड़काऊ बयान बताया है।

दरअसल, मौलाना रजानी लंबे समय से ईरान विरोधी और अमेरिका तथा इजरायल समर्थक बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। उनके आलोचक उन पर पश्चिमी देशों के हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें “सीआईए” और “मोसाद” का एजेंट तक बताते हैं। हालांकि इन आरोपों का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान और इजरायल के टकराव और खाड़ी देशों की राजनीति के बीच रजानी के बयान लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। कई मुस्लिम संगठनों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और भारतीय मुसलमानों के भीतर अनावश्यक तनाव बढ़ा सकते हैं।

फिलहाल मौलाना रजानी के इस बयान पर किसी सरकारी एजेंसी या बड़े धार्मिक संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *