विजय सरकार में कौन होंगे मुस्लिम चेहरे, चर्चा तेज
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, चेन्नई
तमिलनाडु में थलपति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही एक ऐसा बयान दिया, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। शपथ ग्रहण मंच से, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में विजय ने कहा, “आज और अभी से सेक्युलर सरकार शुरू।” इस एक वाक्य ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी नई सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व कितना होगा और किन चेहरों को जगह मिल सकती है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि हाल में कुछ राज्यों में नई सरकारें बनने के बावजूद मुस्लिम चेहरों की भागीदारी सीमित दिखी है। ऐसे में तमिलनाडु की नई सरकार को अलग नजर से देखा जा रहा है।
Tamil Nadu has chosen.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 10, 2026
A new generation. A new voice. A new imagination.
My good wishes to Thiru Vijay – may he fulfil the hopes of the people of Tamil Nadu. pic.twitter.com/sp8FsMLBOb
शपथ के बाद बढ़ी सियासी हलचल
थलपति विजय के लिए मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना आसान नहीं माना गया। चुनाव में बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद सरकार गठन को लेकर कई दौर की अटकलें चलीं। राज्यपाल के साथ प्रक्रिया को लेकर खिंचाव की खबरें भी सामने आईं।
इसी बीच विजय की कुछ पुरानी फिल्मों को लेकर जारी एक पुराने फतवे और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हुईं। कुछ राजनीतिक जानकारों को लगने लगा था कि तमिलनाडु में भी आखिरी समय में कोई नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।
लेकिन आखिरकार विजय ने चेन्नई के भरे हुए स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और नई सरकार की शुरुआत का संकेत दिया।
#CMJosephVijay
— Amock (@Politicx2029) May 10, 2026
“This is a new beginning. A new era of real secular social justice starts now.”
— Tamil Nadu CM Vijay 🗿
Confidence and clarity🔥🔥
Imagine the meltdown of BJP trolls 😭 pic.twitter.com/7uBQMiePlA
मुस्लिम चेहरों को लेकर चर्चा क्यों
विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने 2026 विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया है। हालांकि सरकार गठन के लिए उसे सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ी। ऐसे में अब माना जा रहा है कि कैबिनेट गठन में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन पर खास ध्यान दिया जाएगा।
ALSO READ तमिलनाडु में ‘थलापति’ का राज: क्या विजय की जीत के पीछे कोई ‘गुप्त स्क्रिप्ट’ है?
भारतीय सियासत का नया मोड़: हाशिए पर मुसलमान और बदलाव की छटपटाहट
मुस्लिम वोट, सोशल मीडिया और सियासी भ्रम का खेल
राजनीतिक चर्चाओं में कई मुस्लिम विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ ऐसे नेता हैं जिन्हें मंत्री पद या अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

इन नामों में ई.ए. साहूल हमीद का नाम प्रमुख है, जो रामनाथपुरम से आगे बताए जा रहे हैं। वी.एम.एस. मुस्तफा मदुरै सेंट्रल से मजबूत स्थिति में हैं। आर.के. अब्दुल जलील कडयनल्लूर से चर्चा में हैं।
इसके अलावा एस. सैयद बुरखान, एस.एस. हारून रशीद, यू. अजरुद्दीन, जे. मोहम्मद परवेज, के.एम. शरीफ, पी. इम्तियाज और आई. ताहिरा जैसे नाम भी संभावित चेहरों में गिने जा रहे हैं।
हालांकि अभी तक पार्टी की तरफ से मंत्रिमंडल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सहयोगी दलों की भूमिका अहम
नई सरकार में सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और विदुथलाई चिरुथैगल काची ने सरकार गठन में TVK का समर्थन किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की मजबूती बनाए रखने के लिए सहयोगी दलों और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देना विजय सरकार की प्राथमिकता हो सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में सामाजिक संतुलन हमेशा अहम रहा है। यहां जातीय और धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टियां काफी सावधानी बरतती रही हैं। ऐसे में मुस्लिम चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना को गंभीरता से देखा जा रहा है।
Governor appoints C.Joseph Vijay as the Chief Minister of Tamilnadu pic.twitter.com/eS3jhd90YY
— VTL Team (@VTLTeam) May 9, 2026
‘सेक्युलर सरकार’ बयान के मायने
विजय का “सेक्युलर सरकार” वाला बयान भी चर्चा में है। कुछ लोग इसे उनके राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं। वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन सहयोगियों और अल्पसंख्यक समुदायों को भरोसा देने की कोशिश भी हो सकती है।
हालांकि विजय सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने वादों को जमीन पर उतारने की होगी। कैबिनेट गठन को लेकर अगले कुछ दिन अहम माने जा रहे हैं।
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में एक ही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। क्या विजय अपनी नई सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को मजबूत करेंगे या फिर यह चर्चा केवल सियासी अटकलों तक सीमित रह जाएगी।

