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यूपी में सड़कों पर नमाज पर रोक, योगी आदित्यनाथ का विवादति बयान

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि सड़कों पर नमाज पढ़ना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को भी विशेष दर्जा नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कानून व्यवस्था और आम जनता की सुविधा को सर्वोपरि बताया है।

एक हालिया कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पढ़ना अवैध है। इस पर उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया कि यह पूरी तरह अवैध है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी नागरिक को सड़क रोकने का अधिकार नहीं है। सड़कों का निर्माण आम जनता के आवागमन के लिए किया गया है। नमाज पढ़ने के लिए धार्मिक स्थल तय हैं और सभी को वहीं जाकर अपनी प्रार्थना पूरी करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर मस्जिदों या घरों में जगह की कमी है तो लोगों को शिफ्ट में नमाज पढ़नी चाहिए। सरकार किसी को भी अपनी धार्मिक इबादत करने से नहीं रोक रही है। लेकिन यह सब तय सीमाओं के भीतर होना चाहिए। सड़कों को अवरुद्ध करके दूसरों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

बढ़ती आबादी और संसाधनों की कमी पर भी मुख्यमंत्री ने सीधी बात की। उन्होंने कहा कि अगर रहने या इबादत करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है तो जनसंख्या पर नियंत्रण पाना जरूरी है। बिना सोचे समझे आबादी बढ़ाने से समस्याएं ही पैदा होती हैं। इस बयान के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों से उनकी बात का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सामाजिक संतुलन और अनुशासन के बिना विकास संभव नहीं है।

योगी आदित्यनाथ ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा बातचीत और प्यार से बात समझाने की कोशिश करती है। अगर लोग नियम-कायदों को प्यार से मान जाते हैं तो यह सबसे अच्छा है। लेकिन अगर लोग सीधे तरीके से कानून का पालन नहीं करेंगे तो सरकार के पास दूसरे तरीके भी मौजूद हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन हर जरूरी कदम उठाएगा।

मुख्यमंत्री ने सड़कों की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि रास्ते आम नागरिकों के लिए होते हैं। सड़कों पर एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल जाना होता है। कर्मचारियों को अपने दफ्तर और व्यापारियों को अपने काम पर जाना होता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक गतिविधि के कारण घंटों तक ट्रैफिक को रोकना आम लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। सरकार आम जनता को होने वाली इस असुविधा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर काफी सख्त रही है। पहले भी ऐसे कई निर्देश जारी किए जा चुके हैं जहां सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की मनाही की गई है। सरकार का तर्क है कि इस तरह के कड़े फैसलों से राज्य में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बना रहता है। सभी समुदायों को बिना किसी भेदभाव के इन नियमों का पालन करना होता है।

इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आलोचक इसे एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। वहीं सरकार के समर्थक इसे कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक जरूरी कदम मान रहे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार किसी के तुष्टिकरण की नीति पर काम नहीं करती है। जो भी कानून तोड़ेगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों और कड़े फैसलों को लेकर योगी सरकार हमेशा सुर्खियों में रहती है। सड़कों पर अतिक्रमण हटाने और अवैध लाउडस्पीकरों को उतरवाने के बाद अब सड़क पर नमाज को लेकर यह बयान आया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को नहीं छीन रहे हैं। बस उस स्वतंत्रता को सार्वजनिक व्यवस्था के दायरे में लाना चाहते हैं। शिफ्ट में नमाज पढ़ने का सुझाव इसी दिशा में एक व्यावहारिक समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में इस बयान का जमीन पर क्या असर दिखता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन को अब मुख्यमंत्री के इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए और अधिक सतर्क रहना होगा। स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नियमों का उल्लंघन न हो। मुख्यमंत्री की इस साफ चेतावनी के बाद अब यह तय है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ प्रशासन और सख्त रुख अख्तियार करेगा।