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जामिया में एआई सीखने का मौका

नई दिल्ली:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ तकनीकी दुनिया का शब्द नहीं रह गया है। नौकरी, कारोबार, शिक्षा, रिसर्च और रोजमर्रा की जिंदगी तक इसकी पहुंच तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में अगर कोई छात्र या शिक्षक एआई और मशीन लर्निंग सीखना चाहता है, तो उसके लिए एक बड़ी खबर है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने इस क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए तीन सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया का कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग 30 जून से 17 जुलाई 2026 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर एक शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने जा रहा है। यह इस कार्यक्रम का चौथा संस्करण होगा। पिछले वर्षों में इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और अब इसे और व्यापक रूप में पेश किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए खास है जो एआई को सिर्फ समझना नहीं, बल्कि उसके साथ काम करना भी सीखना चाहते हैं। इसमें थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल प्रशिक्षण पर खास जोर रहेगा। यानी प्रतिभागी सिर्फ सुनेंगे नहीं, बल्कि खुद कोडिंग करके सीखेंगे।

आज के समय में एआई सीखना सिर्फ तकनीकी छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। डॉक्टर, शिक्षक, शोधकर्ता, कारोबारी और मीडिया पेशेवर भी इसे समझना चाहते हैं। यही वजह है कि जामिया ने इस कार्यक्रम को अलग अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला रखा है।

डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी शोधार्थी और शिक्षक इस कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि एक शर्त है। उम्मीदवार का गणितीय पृष्ठभूमि होना जरूरी है। इसका मतलब यह है कि गणित की बुनियादी समझ रखने वाले छात्र और पेशेवर इस कोर्स का लाभ उठा सकेंगे।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यावहारिक ढांचा है। पाठ्यक्रम को पायथन प्रोग्रामिंग के आधार पर तैयार किया गया है। पायथन आज दुनिया में एआई और मशीन लर्निंग की सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषाओं में मानी जाती है। इसलिए प्रतिभागियों को शुरुआत से ही उस तकनीक से जोड़ा जाएगा जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रही है।

कोर्स के दौरान एआई और मशीन लर्निंग के जरूरी सिद्धांतों को आसान तरीके से समझाया जाएगा। लेकिन ध्यान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशिक्षण में कोडिंग आधारित अभ्यास को प्राथमिकता दी गई है ताकि प्रतिभागी अपने हाथों से सीख सकें।

दिलचस्प बात यह है कि कार्यक्रम में कुछ ऐसे तरीके भी शामिल किए जाएंगे, जिनमें बिना ज्यादा कोडिंग के एआई का इस्तेमाल सिखाया जाएगा। यानी जो लोग तकनीकी पृष्ठभूमि से बहुत मजबूत नहीं हैं, वे भी इस नई दुनिया को समझने का अवसर पा सकेंगे।

तीन सप्ताह के इस कार्यक्रम को पांच अलग अलग मॉड्यूल में बांटा गया है ताकि प्रतिभागियों को चरणबद्ध तरीके से विषय की समझ मिल सके।

पहले मॉड्यूल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का परिचय और पायथन की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। यहां से छात्र यह समझ पाएंगे कि एआई आखिर काम कैसे करता है और प्रोग्रामिंग की शुरुआत कैसे की जाती है।

दूसरे मॉड्यूल में एप्लाइड डेटा साइंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम पर फोकस होगा। इसमें प्रतिभागी सीखेंगे कि बड़े डेटा को कैसे समझा जाए और मशीन को फैसले लेने के लिए कैसे प्रशिक्षित किया जाए।

तीसरा मॉड्यूल कंप्यूटर विजन पर आधारित होगा। इसमें डीप लर्निंग की तकनीकों को केरस और टेंसरफ्लो जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से सिखाया जाएगा। यह वही तकनीक है जिसकी मदद से मशीन तस्वीरों को पहचानती है और विजुअल डेटा को समझती है।

चौथा मॉड्यूल प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण यानी एनएलपी पर केंद्रित होगा। आज चैटबॉट, भाषा अनुवाद और स्मार्ट असिस्टेंट जैसी तकनीकों के पीछे यही प्रणाली काम करती है। प्रतिभागियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि मशीन इंसानी भाषा को कैसे समझती है।

कार्यक्रम में सिर्फ जामिया के शिक्षक ही नहीं पढ़ाएंगे। देश और विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी के विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा करेंगे। इंडस्ट्री से जुड़े पेशेवर भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनेंगे ताकि प्रतिभागियों को वास्तविक दुनिया की जरूरतों की समझ मिल सके।

जामिया ने इस बार प्रशिक्षण को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में उपलब्ध कराया है। कुल 160 सीटें रखी गई हैं। इनमें 60 सीटें ऑफलाइन और 100 सीटें ऑनलाइन मोड के लिए निर्धारित हैं।

विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि सीटों का आवंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। यानी आवेदन में देरी करने वालों के लिए मौका सीमित हो सकता है।

सत्र सोमवार से शनिवार तक आयोजित होंगे। रोजाना सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कक्षाएं चलेंगी। प्रतिभागियों की प्रगति को समझने के लिए क्विज और असाइनमेंट भी कराए जाएंगे। यानी सिर्फ उपस्थिति काफी नहीं होगी। सीखने की प्रक्रिया लगातार परखी जाएगी।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सफल प्रतिभागियों को जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। यह प्रमाण पत्र उन छात्रों और पेशेवरों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जो एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।

आज दुनिया तेजी से बदल रही है। एआई को लेकर नौकरियों की मांग बढ़ रही है। कंपनियां ऐसे लोगों को तलाश रही हैं जो तकनीक को समझते हों और उसके साथ काम कर सकें। ऐसे समय में जामिया का यह कार्यक्रम सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी जैसा दिखाई देता है।

जो छात्र और शिक्षक इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें जल्दी करनी होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 23 मई 2026 तय की गई है। इसके बाद पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा।

तकनीक की इस नई दौड़ में पीछे रहना आसान है। आगे बढ़ने के लिए सीखना जरूरी है। शायद यही वजह है कि जामिया का यह कार्यक्रम कई युवाओं के लिए नई दिशा साबित हो सकता है।

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