बकरीद 2026 : बंगाल में गाय की कुर्बानी पर बढ़ा भ्रम
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले गाय की कुर्बानी को लेकर असमंजस का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया पर तरह तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में कहा जा रहा है कि राज्य की नई भाजपा सरकार ने कुछ शर्तों के साथ गाय की कुर्बानी की इजाजत दे दी है। वहीं दूसरी तरफ पशुपालक और मवेशी व्यापारी परेशान हैं। मंडियां सूनी दिखाई दे रही हैं। खरीदार कम हैं। बेचने वाले ज्यादा।
सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या वाकई पश्चिम बंगाल सरकार ने गाय की कुर्बानी को लेकर कोई नई अनुमति दी है या फिर पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू करने की बात हो रही है। चूंकि सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर स्पष्ट और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, इसलिए भ्रम बढ़ता जा रहा है।
सोशल मीडिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है। कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि सरकार ने कुछ नियम और शर्तों के साथ गाय की कुर्बानी की इजाजत दी है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
पश्चिम बंगाल में मुसलमान गाय की कुर्बानी कर सकता है,
— Saba Khan (@sabakhan21051) May 20, 2026
सुवेंदु अधिकारी ने गाइडलाइन जारी किया है,
सुवेंदु अधिकारी क्या हिंदुत्व की सरकार चलाएंगे अंधभक्तों?
ये तो अभी से फेल साबित हो चुके हैं,
मुझे तो चिंता गौरक्षकों की हो रही है अब कौन बंगाल में गौ माता की रक्षा करेगा ? pic.twitter.com/0OPeJiNoOf
एक्स पर सक्रिय यूजर सबा खान ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमान गाय की कुर्बानी कर सकते हैं और इस संबंध में गाइडलाइन जारी की गई है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में सवाल भी उठाया कि क्या अब हिंदुत्व की राजनीति करने वाले लोग इस फैसले को स्वीकार करेंगे।
इसी बहस को आगे बढ़ाते हुए आरजेडी समर्थक पुष्पराज यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि सरकार 1950 के पुराने कानून के तहत पशु वध संबंधी नियम लागू कर रही है। उनके मुताबिक इस कानून के तहत गाय, बैल, बछड़ा या भैंस जैसे पशुओं का वध बिना सरकारी प्रमाणपत्र के नहीं किया जा सकता। और प्रमाणपत्र तभी मिलेगा जब पशु 14 साल से अधिक उम्र का हो या फिर वह स्थायी रूप से बीमार, अशक्त या काम के योग्य न रह गया हो।
पश्चिम बंगाल में नयी भाजपा सरकार ने गाय-भैंस और अन्य बोवाइन पशुओं के वध को लेकर जो नियम लागू किए हैं वह जवान गाय भैंस को जीवन और बूढ़े गाय भैंस को कत्ल करने के लिए है।।
— Pushpraj Yadav (@pushprajyadav97) May 20, 2026
यह नियम 1950 के कानून West Bengal Animal Slaughter Control Act के तहत लागू किया जा रहा है , नियम भी पढ़… pic.twitter.com/EjG1WAoZm5
इन पोस्टों ने लोगों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। कुछ लोग इसे व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक और राजनीतिक नजरिये से देख रहे हैं। वहीं कई लोग सिर्फ इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर जमीन पर सच क्या है।
इस पूरे मामले के बीच एक और तस्वीर सामने आ रही है। पशुपालकों और मवेशी व्यापारियों की चिंता। बकरीद से पहले जिन मंडियों में आमतौर पर बड़ी संख्या में मवेशियों की खरीद बिक्री होती थी, वहां इस बार सन्नाटा दिखाई दे रहा है। कई व्यापारी दावा कर रहे हैं कि खरीदार बाजार में नहीं आ रहे। खासकर गाय खरीदने वाले बहुत कम हैं।
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कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं जिनमें दावा किया गया कि कई मंडियों में मुसलमान खरीदार पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। वजह डर, भ्रम और अनिश्चितता बताई जा रही है। लोग साफ नियम जानना चाहते हैं। वे किसी कानूनी विवाद या सामाजिक तनाव में पड़ना नहीं चाहते।
इस बीच कई इस्लामिक विद्वानों और मुस्लिम नेताओं ने भी मुसलमानों से गाय की कुर्बानी से परहेज करने की अपील की है। उनका कहना है कि सामाजिक सौहार्द और शांति सबसे जरूरी है। पहले भी कई धार्मिक मंचों से ऐसी सलाह दी जाती रही है।
इस पूरे मसले पर एक रिपोर्ट ने चर्चा को और बढ़ा दिया। एक राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि पश्चिम बंगाल में 1950 के पशु वध कानून को सख्ती से लागू करने की घोषणा के बाद मवेशी व्यापारियों और डेयरी मालिकों के बीच चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापारियों का कहना है कि पशुओं की उम्र तय करना आसान नहीं है। सरकारी प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं है। इस कारण लोग पशु खरीदने से बच रहे हैं।
#WestBengal
— Hindu Voice (@HinduVoice_in) May 16, 2026
For the last few days, this guy has been visiting several cow-selling markets and taking interviews of cow sellers.
Through his interviews, he is saying that Cow slaughter is banned, which is wrong.
Cow slaughter is not banned in West Bengal, but it is restricted… pic.twitter.com/Y1XbqlyX6I
बताया जा रहा है कि कोलकाता और आसपास के कुछ इलाकों में गोमांस की कीमतों में भी असर दिखने लगा है। हालांकि यह स्थिति कितनी व्यापक है, इसे लेकर अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या सूचना की कमी है। अभी तक मुख्यधारा मीडिया में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या सरकार ने कोई नई नीति बनाई है या सिर्फ पुराने कानूनों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। यही अस्पष्टता भ्रम की वजह बन रही है।
राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा संवेदनशील माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बकरीद का समय नजदीक है। ऐसे में पशु खरीद, धार्मिक परंपराएं और कानून, तीनों सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं। यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो गलतफहमियां बढ़ सकती हैं।
West Bengal: In #Magrahat, a Hindu youth came to the cattle market to sell a cow, but some local #Muslims asked him to leave, questioning, “You consider the cow your mother, so why have you brought it here to be sold for sacrifice?
— MuslimMirror.com (@MuslimMirror) May 18, 2026
We will not buy #cows since the administration… pic.twitter.com/KFyGIeDoPp
लोगों की मांग है कि सरकार इस मसले पर साफ और सार्वजनिक बयान जारी करे। नियम क्या हैं। कौन सा कानून लागू है। क्या अनुमति है और क्या नहीं। यह स्पष्ट होना जरूरी है। क्योंकि त्योहार करीब है और लोगों को समय रहते फैसला लेना है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल में गाय की कुर्बानी को लेकर सवाल ज्यादा हैं और जवाब कम। ऐसे में अफवाहों की जगह स्पष्ट जानकारी ही हालात को सामान्य बना सकती है।

