गाय पर अरशद मदनी की बड़ी अपील
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
देश में गाय, गोमांस और मॉब लिंचिंग को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार चर्चा की वजह बने हैं जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी। उन्होंने गाय को “राष्ट्रीय पशु” घोषित करने और पूरे देश में इस पर एक समान कानून लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म होगा, बल्कि गाय के नाम पर होने वाली हिंसा और नफरत की राजनीति पर भी रोक लग सकेगी।
मौलाना अरशद मदनी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पर बहस जारी है। उनका तर्क साफ है। अगर एक देश में एक कानून की बात हो रही है, तो पशु वध से जुड़े नियम भी पूरे देश में एक जैसे होने चाहिए। क्योंकि अभी अलग अलग राज्यों में अलग कानून लागू हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दारुल उलूम देवबंद भी लंबे समय से मुसलमानों को गाय की कुर्बानी से बचने की सलाह देता रहा है। देवबंद का मानना रहा है कि भारत जैसे बहुधार्मिक समाज में सामाजिक सौहार्द सबसे अहम है। चूंकि देश की बड़ी आबादी गाय को श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखती है, इसलिए ऐसे मुद्दों से बचना चाहिए जो समाज में तनाव पैदा करें।
#DarulUloom #Deoband had issued a Directive in 1955:”In the interest of Peace ✌️CoExistence between Communities We advise #Muslims to Refrain from offering #Cow for Sacrifice during #EidAlAdha & Otherwise because Alternatives are Available”Lets abide by it in Letter & Spirit
— zafar sareshwala 🇮🇳 (@zafarsareshwala) May 18, 2026
मौलाना अरशद मदनी ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कहा कि गाय सिर्फ एक जानवर नहीं है। देश की बहुसंख्यक आबादी उसे मां का दर्जा देती है। ऐसे में सरकार को इस भावना का सम्मान करना चाहिए और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए।
उनका कहना है कि यह समझ से परे है कि सरकार अब तक ऐसा फैसला क्यों नहीं ले पाई। अगर देश में बाघ राष्ट्रीय पशु हो सकता है, तो गाय क्यों नहीं। उनके मुताबिक इस कदम से एक बड़ा सामाजिक संदेश जाएगा और विवादों का रास्ता बंद हो सकता है।
मौलाना मदनी ने गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां सिर्फ शक के आधार पर लोगों की जान ले ली गई। कई निर्दोष लोग हिंसा का शिकार हुए। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं कही जा सकती।
उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर इंसानों का खून बहना बंद होना चाहिए। अगर सरकार एक सख्त और समान कानून बनाए, जिसे पूरे देश में बराबरी से लागू किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
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मौलाना मदनी ने राज्यों में अलग अलग कानूनों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में खुलेआम गोमांस बिकता है। वहां इसको लेकर कोई विवाद नहीं होता। लेकिन जिन इलाकों में मुसलमान रहते हैं, वहां अक्सर तनाव पैदा हो जाता है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी चीज को लेकर समाज में इतनी संवेदनशीलता है, तो फिर कानून भी पूरे देश में एक जैसा होना चाहिए। सिर्फ कुछ राज्यों में सख्ती और कुछ जगह खुली छूट से भ्रम पैदा होता है।
मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि हैरानी की बात यह है कि कुछ ऐसे राज्य भी हैं जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें होने के बावजूद गोमांस पर पूरी तरह रोक नहीं है। वहीं कई नेता सार्वजनिक रूप से बीफ खाने की बात भी स्वीकार कर चुके हैं। इसके बावजूद विवाद सिर्फ चुनिंदा जगहों पर ही क्यों दिखाई देता है, यह समझना जरूरी है।
उनकी राय में यह मामला सिर्फ धार्मिक भावना का नहीं है। यह न्याय और समानता का भी सवाल है। अगर कोई कानून बने तो उसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। नियम सबके लिए बराबर हों। यही लोकतंत्र की असली भावना है।
गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा दिया जाना चाहिए। देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि आखिर कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है, जिसके कारण सरकार गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा देने से बच रही है? गाय के…
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) May 20, 2026
इस मुद्दे पर इससे पहले कोलकाता की नाखुदा मस्जिद के इमाम भी ऐसी अपील कर चुके हैं। उन्होंने भी सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों से गाय की कुर्बानी से बचने की बात कही थी। अब मौलाना अरशद मदनी की मांग ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है।
हालांकि इस मुद्दे पर अलग अलग राय होना स्वाभाविक है। कुछ लोग इसे सामाजिक शांति की दिशा में जरूरी कदम मानते हैं। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्यों के अधिकारों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि गाय, कानून और सामाजिक सौहार्द को लेकर देश में चर्चा फिर तेज हो गई है।
मौलाना अरशद मदनी का कहना है कि उनका मकसद किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि खत्म करना है। उनका मानना है कि ऐसा रास्ता निकले जिससे न किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों, न किसी निर्दोष की जान जाए और न राजनीति के लिए समाज को बांटने का मौका मिले। यही देश और समाज दोनों के हित में होगा।

