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योगी के बयान पर सियासत, रूहुल्लाह की नसीहत

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बकरीद 2026 से पहले दिया गया बयान अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर उनकी सख्त टिप्पणी पर देशभर में प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। मुस्लिम संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं अब जम्मू कश्मीर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी भी इस बहस में खुलकर सामने आए हैं।

योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि सड़कें आम जनता के इस्तेमाल के लिए होती हैं और किसी भी धार्मिक गतिविधि के कारण यातायात को रोकना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और इसे “तमाशा” करार देते हुए चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री का कहना था कि सड़क पर जाम लगने से सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को होती है। कोई मरीज अस्पताल जाने की जल्दी में होता है। किसी को दफ्तर पहुंचना होता है। व्यापारी अपने काम के लिए निकलते हैं। ऐसे में घंटों तक सड़क रोकना दूसरों के अधिकारों पर असर डालता है। सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

योगी के इस बयान के बाद बहस केवल नमाज तक सीमित नहीं रही। सवाल यह उठने लगा कि क्या सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर एक समान नजरिया अपनाया जाता है या नहीं।

कई सामाजिक संगठनों और मुस्लिम नेताओं ने कहा कि त्योहारों के दौरान केवल मुसलमान ही सड़कों का इस्तेमाल नहीं करते। हिंदू त्योहारों में भी कई बार सड़कें बंद होती हैं। दिवाली, होली और धार्मिक शोभायात्राओं के दौरान यातायात प्रभावित होता है। सबसे ज्यादा चर्चा कांवड़ यात्रा को लेकर हो रही है, जहां कई इलाकों में लंबे समय तक सड़कें प्रभावित रहती हैं और तेज आवाज में डीजे बजने की शिकायतें भी सामने आती हैं।

आलोचकों का कहना है कि यदि सड़क जाम और सार्वजनिक असुविधा मुद्दा है, तो फिर सभी धार्मिक आयोजनों के लिए एक जैसा नियम होना चाहिए। केवल एक समुदाय को निशाना बनाने की धारणा समाज में दूरी बढ़ा सकती है।

इसी बीच श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लामी शिक्षाओं में सड़कों को रोककर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई है। उनके अनुसार यह एक गंभीर धार्मिक और सामाजिक विषय है, जिस पर मुस्लिम समाज को भी आत्ममंथन करना चाहिए।

रूहुल्लाह मेहदी ने कहा, “शरीयत में हमें सड़कों को ब्लॉक करने और उन पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है। यह एक अलग मुद्दा है। मुसलमानों को कुछ मामलों में आंतरिक सुधार की जरूरत है और इस पर चर्चा होनी चाहिए।”

हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि सड़कें केवल नमाज के कारण बंद नहीं होतीं। हिंदू त्योहारों के दौरान भी कई मौकों पर रास्ते प्रभावित होते हैं। उनके अनुसार, अगर बहस सार्वजनिक असुविधा की है, तो चर्चा सभी आयोजनों पर समान रूप से होनी चाहिए।

रूहुल्लाह ने अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने से मुद्दे और जटिल हो जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि संवेदनशील विषयों को संतुलित नजरिये से देखा जाए।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बकरीद नजदीक है और धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर दिशा निर्देश भी सख्त किए जा रहे हैं।

फिलहाल बहस दो हिस्सों में बंटी दिख रही है। एक पक्ष कानून और व्यवस्था की बात कर रहा है। दूसरा पक्ष समान नियमों और बराबरी के व्यवहार की मांग उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।

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