Sports

रोनाल्डो ने सऊदी अरब में रचा इतिहास

मुस्लिम नाउ ब्यूरो | रियाद

फुटबॉल की दुनिया में कुछ नाम सिर्फ खिलाड़ी नहीं होते। वे एक दौर बन जाते हैं। क्रिस्टियानो रोनाल्डो ऐसा ही नाम हैं। मैदान पर उनका हर कदम रिकॉर्ड बनाता है। हर गोल इतिहास का हिस्सा बनता है। अब इस दिग्गज ने अपनी चमकदार यात्रा में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है। इस बार मंजिल बना है सऊदी अरब।

करीब तीन साल पहले जब रोनाल्डो ने यूरोपीय फुटबॉल छोड़कर अल नास्र का दामन थामा था, तब दुनिया भर में बहस छिड़ गई थी। कई लोगों ने कहा कि यह उनके करियर का ढलान है। कुछ ने इसे सिर्फ पैसों का फैसला बताया। लेकिन रोनाल्डो ने एक बार फिर साबित किया कि उन्हें कम आंकना आसान नहीं।

22 मई 2026 की रात रियाद में फुटबॉल प्रेमियों ने एक ऐसा पल देखा, जिसका इंतजार लंबे समय से था। अल नास्र ने दामाक एफसी को 4-1 से हराकर सऊदी प्रो लीग का खिताब अपने नाम कर लिया। यह सिर्फ क्लब की जीत नहीं थी। यह रोनाल्डो की उस अधूरी कहानी का पूरा होना था, जो जनवरी 2023 में सऊदी अरब पहुंचने के साथ शुरू हुई थी।

सबसे खास बात यह रही कि इस ऐतिहासिक जीत में रोनाल्डो ने खुद दो गोल दागे। बड़े मुकाबलों में सामने आकर जिम्मेदारी उठाना उनकी पहचान रही है। यहां भी वही हुआ। जब टीम को अपने सबसे बड़े सितारे की जरूरत थी, रोनाल्डो ने जवाब दिया।

मैच खत्म होने के बाद स्टेडियम जश्न में डूब गया। हजारों समर्थकों ने खुशी मनाई। खिलाड़ियों ने मैदान पर एक दूसरे को गले लगाया। लेकिन कैमरों की नजर सबसे ज्यादा जिस चेहरे पर थी, वह रोनाल्डो का था। उनके चेहरे पर संतोष साफ दिख रहा था। जैसे कोई लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ हो।

यह खिताब इसलिए भी खास है क्योंकि अल नास्र ने रोनाल्डो के आने के बाद पहली बार लीग ट्रॉफी जीती है। क्लब का यह कुल 11वां सऊदी प्रो लीग खिताब है। लेकिन पिछले कुछ सालों में टीम लगातार ट्रॉफी से दूर रही थी। इस बार आखिरी मुकाबले तक टक्कर बनी रही। अंत में अल नास्र ने अपने बड़े प्रतिद्वंद्वी अल हिलाल को पीछे छोड़ दिया।

इस जीत में दूसरे सितारों का भी अहम योगदान रहा। पूर्व लिवरपूल खिलाड़ी सादियो माने ने भी गोल किया। वहीं जोआओ फेलिक्स, जो पहले एटलेटिको मैड्रिड और चेल्सी के लिए खेल चुके हैं, टीम का हिस्सा रहे। टीम के कोच जॉर्ज जीसस की रणनीति भी पूरे सीजन में असरदार साबित हुई।

लेकिन कहानी का सबसे बड़ा किरदार फिर भी रोनाल्डो ही रहे।

सऊदी अरब आने के बाद से उन्होंने लगातार गोल किए। आलोचना हुई। सवाल उठे। उम्र को लेकर बातें हुईं। लेकिन मैदान पर उनका जवाब हमेशा मजबूत रहा। अब तक वह अल नास्र के लिए 100 से ज्यादा गोल कर चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि 41 साल की उम्र में भी उनका असर कम नहीं हुआ।

इस जीत के साथ रोनाल्डो ने एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जो शायद ही कोई दूसरा खिलाड़ी दोहरा पाए।

उन्होंने अब पुर्तगाल, इंग्लैंड, स्पेन, इटली और सऊदी अरब में घरेलू लीग खिताब जीत लिया है। फुटबॉल के पांच अलग अलग देशों में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। हर लीग का अंदाज अलग होता है। हर देश का फुटबॉल कल्चर अलग होता है। लेकिन रोनाल्डो ने हर जगह खुद को साबित किया।

उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता।

पुर्तगाल में शुरुआत हुई। फिर मैनचेस्टर यूनाइटेड में दुनिया ने उनका सितारा चमकते देखा। इंग्लैंड में उन्होंने प्रीमियर लीग जीती। उसके बाद रियल मैड्रिड में पहुंचकर वह फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल हो गए। स्पेन में उन्होंने कई ट्रॉफियां जीतीं। फिर जुवेंटस के साथ इटली में सफलता हासिल की। अब सऊदी अरब में भी उन्होंने अपना झंडा गाड़ दिया।

उनकी ट्रॉफियों की सूची बेहद लंबी है। पांच यूईएफए चैंपियंस लीग खिताब। यूरो कप। नेशंस लीग। कई घरेलू लीग और कप। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत पुरस्कारों में शामिल बैलन डी ओर भी वह पांच बार जीत चुके हैं।

लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ ट्रॉफियां नहीं हैं।

उनकी सबसे बड़ी ताकत है भूख। जीतने की भूख। खुद को बेहतर साबित करने की भूख। यही वजह है कि चार दशक की उम्र पार करने के बाद भी वह युवा खिलाड़ियों जैसी फिटनेस रखते हैं।

रोनाल्डो अभी रुकने वाले नहीं दिखते।

2026 फीफा वर्ल्ड कप में वह पुर्तगाल की टीम के साथ मैदान पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यह उनका छठा विश्व कप होगा। ऐसा करने वाले वह दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल होंगे।

फुटबॉल में महानता को अक्सर आंकड़ों से मापा जाता है। लेकिन रोनाल्डो की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। यह जिद की कहानी है। मेहनत की कहानी है। आलोचनाओं के बीच खड़े रहने की कहानी है।

सऊदी अरब में यह खिताब शायद उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि न हो। लेकिन यह उन लोगों के लिए मजबूत जवाब जरूर है, जिन्होंने सोचा था कि रोनाल्डो का सफर खत्म होने लगा है।

रियाद की उस रात एक बार फिर दुनिया ने देखा कि कुछ खिलाड़ी उम्र से नहीं, अपने इरादों से पहचाने जाते हैं। और क्रिस्टियानो रोनाल्डो अब भी उसी जुनून के साथ खेल रहे हैं, जिसने उन्हें दुनिया का सुपरस्टार बनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *