एशियाई चैंपियनशिप में मोहम्मद लुकमान अली ने हासिल किया पाँचवां स्थान
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अखाड़े की मिट्टी से अंतर्राष्ट्रीय पटल तक: मोहम्मद लुकमान अली – जहाँ शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ल

खेल और शिक्षा—ये दो मार्ग अक्सर जीवन की यात्रा में विपरीत दिशाओं में खड़े दिखाई देते हैं। क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली जैसे नाम खेल के शिखर पर पहुँचे, लेकिन अक्सर औपचारिक शिक्षा से समझौता किया। यह एक स्थापित परंपरा रही है कि सफलता के लिए किसी एक क्षेत्र को चुनना अनिवार्य है। लेकिन, इस पुरानी धारणा को तोड़ते हुए, एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं—मोहम्मद लुकमान अली।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक छोटे से गाँव मोहरका पट्टी की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर, लुकमान ने न सिर्फ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती मंचों पर अपनी धाक जमाई है, बल्कि वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) से समाज कार्य में परास्नातक (Master of Social Work) के एक होनहार छात्र भी हैं। लुकमान आज उन चुनिंदा रोल मॉडलों में शामिल हैं, जिनसे युवा एथलीट यह जानने आते हैं कि सफलता की इस दौड़ में खेल और पढ़ाई के बीच अचूक संतुलन कैसे साधा जा सकता है। उनके जीवन का हर पहलू—उनकी लगन, उनकी विनम्रता और उनका दृढ़ संकल्प—वास्तव में प्रेरणा से भरा है।

बाल्यकाल और कुश्ती का प्रारंभिक जुनून
मोहम्मद लुकमान अली का कुश्ती से नाता बचपन से ही जुड़ गया था। उनके पिता, छज्जो अली, रेलवे में कार्यरत थे और स्वयं भी कुश्ती के प्रति गहरा अनुराग रखते थे। पिता की संघर्ष की कहानियों और जीवन के अनुभवों ने नन्हें लुकमान के मन में कुछ असाधारण कर दिखाने की आग जलाई। उनकी माँ, ज़ायदा, ने उन्हें सिर्फ धार्मिक शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीवन में नैतिकता, अनुशासन और समर्पण के मूलभूत पाठ भी सिखाए, जो एक पहलवान के लिए सबसे ज़रूरी गुण हैं। बचपन में गाँव के मिट्टी के अखाड़ों से अपनी यात्रा शुरू करने वाले लुकमान ने, अपनी अथक मेहनत और लगन के दम पर, देश के कुश्ती के प्रतिष्ठित प्रशिक्षण केंद्र छत्रसाल स्टेडियम तक का सफर तय किया। वर्ष 2018 में उन्हें पहली बड़ी जीत मिली, और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया: शिक्षा और समर्पण का प्रमाण
लुकमान अली जामिया मिल्लिया इस्लामिया के गौरवशाली पूर्व छात्र और वर्तमान कर्मचारी हैं। उन्होंने जेएमआई से हिंदी में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की और बाद में समाज कार्य में एम.ए. किया। वह विश्वविद्यालय के खेल एवं क्रीड़ा विभाग के लिए एक असाधारण एथलीट रहे हैं, जिन्होंने कई राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में जामिया का प्रतिनिधित्व किया और कई पदक जीते। लुकमान का यह अटल विश्वास है कि खेल और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही दिशा और समय का प्रबंधन मिले।
उनकी दिनचर्या किसी तपस्या से कम नहीं है: हर दिन सुबह 4 बजे उठकर अखाड़े में पसीना बहाना, एक सख्त दिनचर्या का पालन करना, और खुद से किया गया एक मज़बूत वादा। इन्हीं की बदौलत लुकमान ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में न सिर्फ गौरवशाली भागीदारी की, बल्कि कई विजय भी हासिल कीं। वर्ष 2022 में नंदिनी नगर में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीतकर यह साबित किया कि कठिन मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पंचम स्थान और विश्वविद्यालय का गौरव
हाल ही में, 8 से 11 अक्टूबर, 2025 तक ईरान के उरुमिह में आयोजित हुई 7वीं एशियाई ज़ुर्कानेह स्पोर्ट्स एंड कोश्ती पहलवानी चैंपियनशिप-2025 में, लुकमान अली ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन किया। 20 देशों की भागीदारी वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने पाँचवाँ स्थान हासिल किया।
इससे पहले, वर्ष 2023 में लुकमान ने थाईलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए छठा स्थान प्राप्त किया था। उस पल को याद करते हुए वे कहते हैं, “जब मैंने पहली बार भारत की जर्सी पहनी, तो मेरी आँखों में गर्व के आँसू थे।” उनका प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में जामिया की बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण है।

जामिया नेतृत्व द्वारा सराहना और प्रोत्साहन
मोहम्मद लुकमान अली की उपलब्धियों ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी सम्मान और गर्व की लहर पैदा की है। जामिया के माननीय कुलपति, प्रो. मज़हर आसिफ़, ने श्री लुकमान को बधाई दी और इस महत्वपूर्ण सम्मान को प्राप्त करने तथा अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत में जामिया का नाम रोशन करने के लिए उनके अटूट समर्पण की सराहना की।
जामिया के रजिस्ट्रार, प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी, ने ईरान में आयोजित चैंपियनशिप में श्री अली के असाधारण प्रदर्शन की दिल खोलकर प्रशंसा की और भविष्य के टूर्नामेंटों के लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मानद खेल निदेशक, प्रो. नफीस अहमद, ने भी विश्वविद्यालय के लिए यह सम्मान प्राप्त करने में श्री लुकमान की प्रतिबद्धता और परिश्रम की सराहना करते हुए उन्हें अपने दृढ़ संकल्प और ईमानदार प्रयासों से जामिया को गौरवान्वित करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
भविष्य का लक्ष्य: ओलंपिक और सामाजिक जिम्मेदारी
एक खिलाड़ी और छात्र होने के अलावा, लुकमान समाज कार्य में परास्नातक के छात्र होने के नाते, समाज के प्रति भी पूरी तरह सजग हैं। वे मानते हैं कि खेल के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने कोचों, परिवार, और बचपन के मित्र आरिफ चौधरी सहित उन सभी को देते हैं।
लुकमान का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है, और 2028 ओलंपिक उनका सपना है। वर्तमान में, वे खेलो इंडिया कुश्ती चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे हैं, फिर जुलाई में एशियाई इंडोर चैंपियनशिप पर ध्यान केंद्रित करेंगे। लुकमान के अनुसार, दिन की सही योजना, दृढ़ संकल्प और टीम भावना से हर क्षेत्र में सफलता संभव है। वह आज उन युवा खिलाड़ियों के लिए एक सच्चे पथप्रदर्शक हैं, जो खेल और शिक्षा में संतुलन स्थापित कर कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं। मोहम्मद लुकमान अली न सिर्फ एक पहलवान हैं, बल्कि एक प्रेरणा, पथप्रदर्शक, और भारत का उभरता हुआ सितारा हैं, जो अखाड़े और कक्षा दोनों में समान रूप से चमक रहा है।

