हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका ईरान में नया तनाव
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा तेज है, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के दावे अलग अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि समझौता लगभग तैयार है और इसके तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा। दूसरी ओर ईरान ने साफ कर दिया है कि इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण उसका ही रहेगा।
शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता काफी हद तक तय हो चुका है। उन्होंने लिखा कि कुछ अंतिम पहलुओं पर बातचीत जारी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग अलग देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है।
हालांकि, ट्रंप के बयान के तुरंत बाद ईरान की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आई। ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने ट्रंप के दावे को अधूरा और वास्तविकता से अलग बताया। एजेंसी ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच जो मसौदा बातचीत में है, उसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण किसी दूसरे देश को सौंपने की बात नहीं है।
ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि यह समुद्री मार्ग उसकी निगरानी और प्रशासन के तहत ही रहेगा। तेहरान का मानना है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और प्रबंधन उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बातचीत को लेकर सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच माहौल पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर अहम मुद्दे पर सहमति बन गई है।
सरकारी टेलीविजन से बातचीत में उन्होंने बताया कि ईरान एक 14 बिंदुओं वाले ढांचे पर काम कर रहा है। यह प्रारंभिक समझौते की तरह होगा। इसके बाद व्यापक समझौते पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अंतिम समझौते तक पहुंचने में 30 से 60 दिन का समय लग सकता है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि कई बड़े मुद्दों पर अभी मतभेद बाकी हैं। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी स्पष्ट सहमति नहीं बनी है। तेहरान यह भी कह रहा है कि शुरुआती बातचीत में परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया जाएगा।
तनाव सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है। सैन्य बयानबाजी भी तेज हो गई है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका फिर किसी सैन्य कार्रवाई की कोशिश करता है तो उसे पहले से ज्यादा गंभीर जवाब मिलेगा।
गालिबाफ ने कहा कि युद्धविराम के दौरान ईरानी सेना ने खुद को और मजबूत किया है। अगर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका को पहले दिन से भी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी मीडिया में ईरान पर फिर से संभावित हमलों की अटकलें सामने आई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। माना जा रहा है कि पाकिस्तान संघर्ष कम करने और संवाद बहाल कराने की कोशिशों में भूमिका निभा रहा है।
जानकारों का कहना है कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव अचानक बढ़ गया था। तब से कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इस्लामाबाद में आमने सामने बैठकर वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ी है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी टकराव का असर तेल की कीमतों पर तुरंत पड़ सकता है।
दूसरी ओर, आम ईरानी नागरिकों के बीच भी चिंता का माहौल है। तेहरान की रहने वाली 39 वर्षीय शहरजाद ने कहा कि युद्ध और शांति के बीच की स्थिति सबसे ज्यादा डर पैदा करती है। उन्होंने कहा कि वह नई नौकरी शुरू करने वाली हैं, लेकिन डर है कि अगर हालात बिगड़े तो उन्हें फिर शहर छोड़ना पड़ सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी हाल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres से बातचीत की। उन्होंने कहा कि तमाम मतभेदों और अविश्वास के बावजूद ईरान कूटनीतिक रास्ता बंद नहीं करना चाहता।
इस दौरान ईरान ने तुर्किये, इराक, कतर और ओमान के नेताओं से भी संपर्क बढ़ाया है। क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। कतर के अमीर ने भी ट्रंप, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के नेताओं से बातचीत की है। बातचीत का मकसद हालात को शांत करना बताया गया।
हालांकि, क्षेत्र में हिंसा पूरी तरह थमी नहीं है। लेबनान में इजराइली हमलों की खबरें सामने आई हैं। अप्रैल में हुए संघर्ष विराम के बावजूद सीमा पर तनाव जारी है।
अब सबकी नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर है। सवाल सिर्फ परमाणु कार्यक्रम का नहीं है। असली चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता और पूरे मध्य पूर्व में शांति की है। आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि बातचीत आगे बढ़ती है या फिर तनाव एक बार फिर टकराव में बदलता है।

