ईरान मिसाइल हमले से इजराइल में तनाव, युद्धविराम पर संकट
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, यरुशलम
ईरान और इजराइल के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अप्रैल में लागू हुए नाजुक युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व में फिर से बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। साथ ही अमेरिका, पाकिस्तान, कतर, मिस्र और तुर्किये की ओर से चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर भी दबाव बढ़ गया है।
ईरान के सरकारी प्रसारक ने मिसाइल हमले की पुष्टि की है। हमले के तुरंत बाद तेहरान ने अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया। माना जा रहा है कि ईरान को इजराइल की संभावित जवाबी कार्रवाई का अंदेशा है।
यह ताजा संकट उस समय पैदा हुआ जब इजराइल ने रविवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में हवाई हमला किया। ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया। अमेरिका ने कुछ दिन पहले इजराइल से ऐसे कदमों से बचने का अनुरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद हमला हुआ।
इजराइल का कहना है कि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर रॉकेट दागे थे। इसी के जवाब में बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को निशाना बनाया गया।
ईरान की चेतावनी
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि यदि इस तरह की आक्रामक कार्रवाइयां दोहराई गईं तो जवाब कहीं अधिक व्यापक होगा। बयान में कहा गया कि अमेरिकी और इजराइली ठिकाने पूरे क्षेत्र में निशाने पर आ सकते हैं।
ईरान ने लेबनान पर हमले के अलावा अपनी तटीय सीमाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की गतिविधियों का भी जिक्र किया। तेहरान का कहना है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
इजराइल में बजे सायरन
मिसाइल हमले के बाद इजराइल के कई इलाकों में हवाई हमले के सायरन बज उठे। लाखों लोग बंकरों और सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इजराइली सेना ने दावा किया कि अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया गया।
उत्तरी इजराइल के कई हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि कुछ देर बाद सेना ने घोषणा की कि नागरिक सुरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकल सकते हैं।
इजराइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि ईरान ने गंभीर गलती की है। सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने भी संकेत दिया कि आदेश मिलते ही जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप नहीं चाहते नया युद्ध
स्थिति की गंभीरता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इजराइल के सार्वजनिक प्रसारक कान की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप का मानना है कि इस समय इजराइल को और सैन्य कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को लेबनान में हुआ इजराइली हमला अमेरिका के साथ समन्वय में नहीं था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी भी जताई।
अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि ईरान मिसाइल हमले रोके और वार्ता की मेज पर लौटे। उनका मानना है कि कूटनीतिक समाधान अभी भी संभव है।
लेबनान बना नया विवाद
कुछ दिन पहले अमेरिका की मेजबानी में लेबनान और इजराइल के बीच युद्धविराम समझौते पर सहमति बनी थी। हालांकि हिजबुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया।
रविवार को बेरूत में हुए इजराइली हमले में दो लोगों की मौत हुई जबकि 20 लोग घायल हुए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है।
इजराइली सेना ने साफ किया है कि वह लेबनान में अपने अभियानों को जारी रखेगी। दूसरी ओर हिजबुल्लाह का कहना है कि वह इजराइल के साथ किसी प्रत्यक्ष वार्ता का समर्थन नहीं करता।
क्षेत्रीय युद्ध का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं है। लेबनान, सीरिया, इराक और खाड़ी देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
ईरान लगातार कह रहा है कि किसी भी व्यापक समझौते में लेबनान की स्थिति को शामिल किया जाना चाहिए। वहीं इजराइल का ध्यान हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को कमजोर करने पर है।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू घरेलू राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उत्तरी सीमा के हजारों निवासी लंबे समय से असुरक्षा की स्थिति में हैं। ऐसे में नेतन्याहू पर सख्त जवाब देने का दबाव बढ़ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
मध्य पूर्व संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।
ईरान इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए हुए है। वहीं अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर दबाव जारी है। तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
युद्धविराम लागू होने के बाद भी ईरान खाड़ी देशों की दिशा में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां जारी रखे हुए है। उसका दावा है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बना रहा है।
इराक और सीरिया ने बंद किया हवाई क्षेत्र
ईरानी मिसाइल हमलों के बाद इराक के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने 72 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की घोषणा की। वहीं सीरिया ने भी 12 घंटे के लिए एयरस्पेस बंद कर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इससे क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता जारी
तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास थमे नहीं हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी रविवार को तेहरान पहुंचे। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई को पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का संदेश सौंपा।
हालांकि संदेश की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें तनाव कम करने और वार्ता आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
पाकिस्तान ने कहा है कि कतर, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के सहयोग से वह अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहा है।
समाधान की राह अभी कठिन
काहिरा में मिस्र और कतर के विदेश मंत्रियों ने भी संभावित समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। वहीं मिसाइल हमलों के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिटेन, मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की।
फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ मिसाइल हमले और सैन्य बयानबाजी है। दूसरी तरफ बातचीत के प्रयास जारी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है या फिर कूटनीति तनाव को नियंत्रित करने में सफल होगी।
FAQ
ईरान का कौन-कौन देश साथ दे रहा है?
ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और चीन जैसे देशों का रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में ईरान का अपना एक मजबूत गुट है, जिसे “प्रतिरोध की धुरी” (Axis of Resistance) कहा जाता है।
ईरान का समर्थन करने वाले प्रमुख देशों और समूहों का विवरण इस प्रकार है:
ईरान भारत का हज़ारों साल पुराना मित्र ही नहीं है, UN में पाकिस्तान के मंसूबे विफल करने में हमारा निरंतर सहायक भी है, भारत और सेंट्रल एशिया के देशों के बीच आर्थिक कड़ी भी है।
ईरान का सबसे बड़ा दोस्त कौन है?
ईरान का सबसे बड़ा दोस्त कौन है?
ईरान, रूस और पूर्व सोवियत गणराज्यों के साथ नियमित राजनयिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखता है। ईरान और रूस दोनों का मानना है कि मध्य एशिया और ट्रांसकाकेशस में हो रहे घटनाक्रमों, विशेष रूप से कैस्पियन सागर से प्राप्त ऊर्जा संसाधनों से संबंधित घटनाक्रमों में उनके महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित दांव पर लगे हैं।
सैन्य शक्ति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव के मामले में भारत, ईरान की तुलना में कहीं अधिक ताकतवर और बड़ा देश है। भारत दुनिया की शीर्ष महाशक्तियों में गिना जाता है, जबकि ईरान मुख्य रूप से मध्य पूर्व में एक क्षेत्रीय ताकत है।
वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की ताकत का तुलनात्मक विश्लेषण नीचे दिया गया है:
1. सैन्य क्षमता और रक्षा बजट
ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग: मिलिट्री स्ट्रेंथ के मामले में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है, जबकि ईरान 13वें स्थान पर आता है।
रक्षा बजट: भारत का रक्षा बजट लगभग $86 बिलियन है, जो ईरान के बजट (लगभग $8 बिलियन) का करीब 11 गुना है।
सैनिक और उपकरण: भारतीय सेना में लगभग 30 लाख (सक्रिय और रिज़र्व) सैनिक हैं। वहीं, ईरान के पास लगभग 6.5 लाख सक्रिय सैनिक हैं। भारत के पास हजारों की संख्या में आधुनिक टैंक, जंगी जहाज और लड़ाकू विमान मौजूद हैं।
परमाणु क्षमता: भारत एक घोषित परमाणु संपन्न देश है, जबकि ईरान के पास कोई आधिकारिक परमाणु हथियार नहीं है।
2. आर्थिक ताकत
भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
ईरान के पास तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है, लेकिन लंबे समय से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण उसकी अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में काफी कमजोर है।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव
जनसंख्या और क्षेत्रफल: भारत की विशाल आबादी (140 करोड़ से अधिक) और भौगोलिक आकार इसे रणनीतिक लाभ देते हैं। ईरान की जनसंख्या करीब 9 करोड़ है।
कूटनीतिक पहुंच: संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर G20 तक वैश्विक मंचों पर भारत की कूटनीतिक पकड़ बहुत मजबूत है, और भारत को दुनिया के अधिकांश देशों का समर्थन प्राप्त है।
ईरान के पास क्या है?
परंपरागत सैन्य और आर्थिक रूप से भारत आगे है, लेकिन मध्य पूर्व में ईरान एक असममित शक्ति (Asymmetric Power) माना जाता है। ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों और कामिकेज़ ड्रोन्स का बहुत बड़ा जखीरा है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे प्रॉक्सी (छद्म) समूहों का नेटवर्क ईरान का समर्थन करता है।
समग्र रूप से, भारत एक विशाल और सर्व-आधुनिक सैन्य व आर्थिक शक्ति है, जो वैश्विक स्तर पर ईरान से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।

